मेरठ (ब्यूरो): उत्तर प्रदेश के शहरों में 'स्मार्ट सिटी' का सपना तो दिखाया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यहाँ की सड़कें और खुले नाले 'मौत के कुएं' में तब्दील हो चुके हैं। अभी नोएडा में खुले नाले की वजह से इंजीनियर युवराज मेहता की मौत का मामला ठंडा भी नहीं हुआ था कि मेरठ में सिस्टम की घोर लापरवाही ने एक और हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं।READ ALSO:-मेरठ में हाई-वोल्टेज ड्रामा: सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति ने 'लाइव लोकेशन' से बेनकाब की बेवफा पत्नी, होटल के कमरे में प्रेमी संग मिली इंश्योरेंस मैनेजर
\r\n\r\n\r\n\r\n
मेरठ के पॉश इलाके आबूलेन के पास काठ के पुल पर शुक्रवार की शाम एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहाँ एक ई-रिक्शा अनियंत्रित होकर गहरे और खुले नाले में जा गिरा। करीब 30 मिनट तक चालक नाले के गंदे पानी और कीचड़ में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ता रहा, लेकिन अफसोस कि जब तक मदद (पुलिस) पहुंची, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
घटना का आँखों देखा हाल: खौफनाक था वह मंजर
\r\n\r\nशुक्रवार शाम करीब 5 बजे का वक्त था। आसमान में काले बादल छाए हुए थे और मौसम अचानक खराब हो गया था। सदर बाजार के रजबन, खटीक कॉलोनी का रहने वाला 42 वर्षीय सनी (पुत्र गुरदीप सिंह) अपने ई-रिक्शे के साथ घर की ओर लौट रहा था। वह दिन भर की मेहनत-मजदूरी के बाद अपनी थकान मिटाने घर जा रहा था, लेकिन उसे क्या पता था कि रास्ते में मौत उसका इंतजार कर रही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
तीखी ढलान और मौत की छलांग
\r\n\r\nप्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सनी बेगमपुल से सवारी उतारकर खाली ई-रिक्शा लेकर काठ के पुल के रास्ते रजबन की तरफ जा रहा था। काठ के पुल से आगे रजबन की ओर जाने वाली सड़क पर एक तीखी ढलान है। बारिश की वजह से सड़क पर फिसलन थी। ढलान पर उतरते वक्त अचानक ई-रिक्शा अनियंत्रित हो गया।
\r\n\r\nFollow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › \r\n\r\n
चूंकि नाले के किनारे कोई सुरक्षा दीवार (Boundary Wall) नहीं थी, इसलिए अनियंत्रित रिक्शा सीधा नाले में जा पलटा। रिक्शा पलटते ही सनी उसके नीचे दब गया। नाला गहरा था और उसमें गंदा पानी व गाद (कीचड़) भरा हुआ था। भारी-भरकम ई-रिक्शे के नीचे दबने के कारण सनी को संभलने या बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिला।
\r\n\r\n\r\n\r\n
तमाशबीन भीड़ और पुलिस की लेटलतीफी
\r\n\r\nइस हादसे का सबसे दुखद पहलू समाज की संवेदनहीनता और पुलिस प्रशासन की सुस्ती रही।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n भीड़ ने वीडियो बनाया, हाथ नहीं बढ़ाया: हादसे के तुरंत बाद मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। लोग नाले के किनारे खड़े होकर नीचे झांकते रहे, आपस में बातें करते रहे, लेकिन किसी ने भी नीचे उतरकर सनी को बचाने की हिम्मत नहीं दिखाई। अगर भीड़ में मौजूद कुछ लोग हिम्मत दिखाते, तो शायद रिक्शा हटाकर सनी का सिर पानी से बाहर निकाला जा सकता था।\r\n \r\n
- \r\n 30 मिनट बाद पहुंची 'मित्र पुलिस': स्थानीय लोगों ने पुलिस को सूचना दी। घटनास्थल सदर थाने से बहुत दूर नहीं है, इसके बावजूद पुलिस को मौके पर पहुंचने में 30 मिनट लग गए। यह 30 मिनट सनी के जीवन के लिए सबसे भारी पड़े।\r\n \r\n
- \r\n रेस्क्यू और अस्पताल: आधे घंटे बाद जब सदर बाजार पुलिस मौके पर पहुंची, तब जाकर स्थानीय लोगों की मदद से रस्से और अन्य उपकरणों के सहारे ई-रिक्शे को सीधा किया गया और सनी को बाहर निकाला गया। पुलिस उसे आनन-फानन में प्यारेलाल शर्मा जिला अस्पताल (PL Sharma District Hospital) लेकर भागी, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया।\r\n \r\n
\r\n\r\n
नोएडा पार्ट-2: इंजीनियर युवराज जैसी लापरवाही
\r\n\r\nयह घटना अनायास ही नोएडा के उस हालिया हादसे की याद दिलाती है जिसने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया था। नोएडा के सेक्टर-150 में एक खुले नाले ने इंजीनियर युवराज मेहता की जान ले ली थी। वह भी घंटों मदद का इंतजार करते रहे थे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मेरठ का यह हादसा साबित करता है कि प्रशासन ने पुरानी गलतियों से कोई सबक नहीं लिया है।
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n समानता 1: दोनों जगहों पर नाले खुले थे। कोई बैरिकेडिंग या बाउंड्री वॉल नहीं थी।\r\n \r\n
- \r\n समानता 2: दोनों मामलों में रेस्क्यू ऑपरेशन में देरी हुई।\r\n \r\n
- \r\n समानता 3: दोनों ही मामलों में 'सिस्टम' की लापरवाही का खामियाजा आम आदमी को अपनी जान देकर चुकाना पड़ा।\r\n \r\n
\r\n\r\n
स्थानीय निवासियों का कहना है कि कैंट बोर्ड (Cantonment Board) की लापरवाही के कारण आए दिन यहाँ हादसे होते रहते हैं। नाले के किनारे बाउंड्री न होना एक आपराधिक लापरवाही है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
\r\n\r\nमृतक सनी (42 वर्ष) अपने परिवार का एक अहम सहारा था। वह ई-रिक्शा चलाकर अपने बूढ़े माता-पिता और परिवार का भरण-पोषण करता था।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: जैसे ही रजबन में सनी की मौत की खबर पहुंची, कोहराम मच गया। परिजन बदहवास हालत में अस्पताल दौड़े। उनका रोना देखकर अस्पताल में मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं।\r\n \r\n
- \r\n दौरे पड़ने की बात: सीओ कैंट नवीना शुक्ला ने बताया कि मृतक के भाई गुलशन ने पुलिस को जानकारी दी है कि सनी को मिर्गी या दौरे (Seizures) पड़ने की बीमारी थी। आशंका जताई जा रही है कि ढलान पर उतरते वक्त शायद उसे दौरा पड़ा हो, जिससे वह संतुलन खो बैठा। हालांकि, यह जांच का विषय है।\r\n \r\n
- \r\n पोस्टमार्टम से इनकार: परिजनों ने इस मामले में कोई भी कानूनी कार्रवाई करने या शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिस ने पंचनामा भरकर शव परिजनों को सौंप दिया।\r\n \r\n
\r\n\r\n
आखिर कौन है असली गुनहगार?
\r\n\r\nभले ही परिजनों ने कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया हो, लेकिन यह हादसा कई गंभीर सवाल खड़े करता है जिनका जवाब मेरठ प्रशासन को देना ही होगा।
\r\n\r\n\r\n\r\n
(A) कैंट बोर्ड की आपराधिक चुप्पी
\r\n\r\nआबूलेन और रजबन का यह इलाका मेरठ कैंटोनमेंट बोर्ड के अंतर्गत आता है। सवाल यह है कि:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n घनी आबादी वाले इलाके में नाला खुला क्यों था?\r\n \r\n
- \r\n तीखी ढलान के पास सुरक्षा दीवार (Railing) क्यों नहीं बनाई गई?\r\n \r\n
- \r\n क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?\r\n \r\n
\r\n\r\n
(B) ई-रिक्शा की बनावट और सुरक्षा
\r\n\r\nई-रिक्शा आज शहर की लाइफलाइन बन चुके हैं, लेकिन इनकी बनावट (Design) बेहद हल्की होती है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n थोड़ा सा संतुलन बिगड़ने पर ये तुरंत पलट जाते हैं।\r\n \r\n
- \r\n इनमें ड्राइवर के लिए कोई सुरक्षा बेल्ट या केबिन नहीं होता।\r\n \r\n
- \r\n अगर सनी किसी कार या भारी वाहन में होता, तो शायद नाले में गिरने के बावजूद उसकी जान बच जाती।\r\n \r\n
\r\n\r\n
(C) आपातकालीन प्रतिक्रिया (Emergency Response)
\r\n\r\nशहर के बीचों-बीच पुलिस को पहुंचने में 30 मिनट क्यों लगे? क्या हमारे पास त्वरित प्रतिक्रिया टीम (Quick Response Team) नहीं है जो 5-10 मिनट में मौके पर पहुंच सके? मेडिकल इमरजेंसी में हर एक सेकंड कीमती होता है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
भविष्य की चेतावनी: अगर अब भी नहीं जागे, तो...
\r\n\r\nयह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एक 'चेतावनी' है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक यूपी में बारिश और खराब मौसम का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में खुले नाले मौत का सबब बन सकते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
प्रशासन को तुरंत ये कदम उठाने चाहिए:
\r\n\r\n- \r\n
- \r\n कवरिंग: शहर के सभी प्रमुख खुले नालों को स्लैब डालकर ढका जाए।\r\n \r\n
- \r\n बैरिकेडिंग: जहाँ नाले ढकना संभव न हो, वहां लोहे की मजबूत रेलिंग या दीवार बनाई जाए।\r\n \r\n
- \r\n चेतावनी बोर्ड: तीखी ढलान और खतरनाक मोड़ों पर 'दुर्घटना संभावित क्षेत्र' के बोर्ड लगाए जाएं।\r\n \r\n
- \r\n लाइटिंग: रात के वक्त ऐसे इलाकों में पर्याप्त स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था हो।\r\n \r\n
\r\n\r\n
नागरिकों के लिए विशेष अपील (Safety Advisory)
\r\n\r\n'खबरीलाल' अपने पाठकों से अपील करता है कि खराब मौसम और बारिश के दौरान विशेष सावधानी बरतें:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n किनारे से बचें: पैदल चलते या गाड़ी चलाते समय खुले नालों और गड्ढों से उचित दूरी बनाकर रखें।\r\n \r\n
- \r\n रफ्तार कम रखें: बारिश में सड़क पर फिसलन होती है, विशेषकर दोपहिया और तिपहिया वाहन चालक गति सीमित रखें।\r\n \r\n
- \r\n हेल्पिंग हैंड बनें: अगर आपके सामने कोई हादसा होता है, तो वीडियो बनाने के बजाय पीड़ित की मदद करें या तुरंत पुलिस/एंबुलेंस को कॉल करें। आपकी थोड़ी सी हिम्मत किसी की जान बचा सकती है।\r\n \r\n
एक और फाइल बंद, एक और जान गुम
\r\n\r\nसनी की मौत के साथ पुलिस की फाइलों में एक और पंचनामा दर्ज हो गया। परिवार ने पोस्टमार्टम से इनकार कर दिया, शायद इसलिए कि वे पुलिसिया पचड़ों में नहीं फंसना चाहते थे या वे इसे अपनी किस्मत मान बैठे हैं। लेकिन सवाल वही है—क्या सनी की मौत सिर्फ एक 'हादसा' थी या 'सिस्टम द्वारा की गई हत्या'?
\r\n\r\n\r\n\r\n
जब तक खुले नाले ढके नहीं जाएंगे और अधिकारियों की जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक कभी नोएडा का युवराज तो कभी मेरठ का सनी इसी तरह बेमौत मारे जाते रहेंगे।
\r\n\r\n\r\n\r\n
मेरठ और आसपास की खबरों के लिए जुड़े रहें हमारे साथ।
\r\n\r\n\r\n\r\n
खुले नाले और शहरी नियोजन की विफलता (Extended Analysis)
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश में खुले नालों का इतिहास उत्तर प्रदेश के कई बड़े शहर—चाहे वह लखनऊ हो, कानपुर, गाजियाबाद या मेरठ—ड्रेनेज सिस्टम की बदहाली से जूझ रहे हैं। अंग्रेजों के जमाने के बने नाले अब आबादी के दबाव में 'मौत के जाल' बन चुके हैं। शहरी नियोजन (Urban Planning) के मानकों के अनुसार, रिहायशी इलाकों में कोई भी ड्रेनेज खुला नहीं होना चाहिए। खुले नाले न केवल दुर्घटनाओं को न्योता देते हैं, बल्कि बीमारियों का घर भी होते हैं।
\r\n\r\n\r\n\r\n
ई-रिक्शा: सुविधा या दुविधा? मेरठ शहर में हजारों ई-रिक्शा दौड़ रहे हैं। यह सस्ता और प्रदूषण मुक्त यातायात का साधन जरूर है, लेकिन इसके विनियमन (Regulation) की सख्त जरूरत है।
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n प्रशिक्षण का अभाव: अधिकतर ई-रिक्शा चालकों के पास उचित ड्राइविंग ट्रेनिंग नहीं होती।\r\n \r\n
- \r\n ओवरलोडिंग: कई बार क्षमता से अधिक सवारियां भरने से रिक्शा का संतुलन बिगड़ जाता है। (गनीमत रही कि हादसे के वक्त सनी के रिक्शे में कोई सवारी नहीं थी, अन्यथा जनहानि बड़ी हो सकती थी।)\r\n \r\n
- \r\n इंश्योरेंस और मुआवजा: ऐसे हादसों में अक्सर देखा गया है कि गरीब ई-रिक्शा चालकों का न तो बीमा होता है और न ही उन्हें सरकार से कोई उचित मुआवजा मिल पाता है।\r\n \r\n
\r\n\r\n
हादसे के बाद क्या करें? (Life-Saving Tips) अगर आप कभी ऐसी स्थिति देखें जहाँ कोई वाहन पानी में गिर गया हो:
\r\n\r\n\r\n\r\n
- \r\n
- \r\n शोर मचाएं: तुरंत आसपास के लोगों को इकट्ठा करें।\r\n \r\n
- \r\n रस्सी या कपड़ा: अगर तैरना नहीं आता, तो अपनी शर्ट, बेल्ट या रस्सी फेंककर डूबते व्यक्ति को पकड़ने को कहें।\r\n \r\n
- \r\n वाहन को सीधा करें: अगर व्यक्ति वाहन के नीचे दबा है, तो प्राथमिकता वाहन को हटाने की होनी चाहिए, क्योंकि पानी में दबे होने पर सांस कुछ ही मिनटों में रुक सकती है।\r\n \r\n
- \r\n CPR दें: बाहर निकालते ही अगर सांस न चल रही हो, तो तुरंत सीपीआर (Cardiopulmonary Resuscitation) देना शुरू करें और एंबुलेंस का इंतजार न करें, निजी वाहन से अस्पताल भागें।\r\n \r\n
\r\n\r\n
मेरठ प्रशासन से सवाल इस घटना के बाद अब उम्मीद है कि मेरठ प्रशासन, विशेषकर कैंट बोर्ड, नींद से जागेगा। शहर के कई अन्य इलाके जैसे—बेगमपुल, पीएल शर्मा रोड, और दिल्ली रोड पर भी कई जगह नाले खतरनाक स्थिति में हैं। क्या प्रशासन अगले हादसे का इंतजार करेगा या सनी की मौत से सबक लेकर इन डेथ-स्पॉट्स (Death Spots) को ठीक करेगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.