मेरठ। भामाशाह पार्क में चल रही श्रीराम कथा में बुधवार को पद्म विभूषण स्वामी श्री रामभद्राचार्य महाराज ने प्रवचन देते हुए तुलसी पीठ की महिमा का बखान किया। इस दौरान उन्होंने तुलसी पीठ पर सवाल उठाने वाले लोगों को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि वह हर किसी की कुंडली खोलकर रख सकते हैं।READ ALSO:-मेरठ मेडिकल कॉलेज में 'दंडवत यात्रा': छात्र नेता का अनोखा विरोध, एक बेड पर दो मरीज और लापरवाही का आरोप
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तुलसी पीठ पर प्रश्न उठाने वालों को कड़ा जवाब
\r\n\r\nश्री रामभद्राचार्य ने अपने प्रवचन की शुरुआत में ही कहा कि तुलसी पीठ पर प्रश्न उठाने वालों को जवाब देना बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा, "तुलसी पीठ 24वें त्रेता युग में बना था। मैं उच्च कोटि का ब्राह्मण, एक विशिष्ट संप्रदाय रामानंदाचार्य से हूं। इस संप्रदाय में 70 लाख साधु हैं।" उन्होंने कहा कि कथावाचक की बात को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि उनके वक्तव्य से लाखों लोग रामभक्त बन चुके हैं। उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा, "तुलसीपीठ पर कतई प्रश्न न उठाएं, मेरे पास सबकी कुंडली है, खोलकर रख दूंगा।"
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उन्होंने बताया कि तुलसी पीठ की परंपरा भगवान राम ने स्वयं शुरू की थी जब उन्होंने भरत जी को अपनी पादुका (खड़ाऊ) प्रदान की थी। उसी पीठ के जगद्गुरु रामानंदाचार्य होने का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कोई उनसे शास्त्रार्थ करना चाहेगा, तो वह अपने उत्तराधिकारी से ही शास्त्रार्थ करा देंगे।
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सत्संग और राम की महिमा का किया बखान
\r\n\r\nअपने प्रवचन में उन्होंने सत्संग के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भगवान से आंतरिक संबंध तभी जुड़ता है जब कोई सत्संग में 'एडमिशन' लेता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबको श्रीराम कथा जरूर सुननी चाहिए। उन्होंने भगवान राम को जगद्गुरु बताया और कहा कि वे अवतार और अवतारी दोनों हैं, जो उन्हें अद्वितीय बनाता है। उन्होंने कहा कि भगवान राम प्रभाव का कम, और स्वभाव का अधिक प्रयोग करते हैं।
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मेरठ के प्रति अपना विशेष प्रेम दिखाते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें यहां की कथा बहुत प्रिय है, और जब भी यहां के लोग बुलाएंगे, वे जरूर आएंगे। उन्होंने मेरठ को 'क्रांति की नगरी' भी बताया और कहा कि उन्हें यहां आकर एक विशेष अनुभूति होती है जो कहीं और नहीं मिलती। यह उनकी 1406वीं कथा थी।
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