[मेरठ/नई दिल्ली | पोलिटिकल एवं डेवलपमेंट डेस्क] तारीख: 13 जनवरी 2026
\r\n\r\nपश्चिमी उत्तर प्रदेश (Western Uttar Pradesh)—जो देश की राजनीति और अर्थव्यवस्था में एक अहम भूमिका निभाता है—दशकों से दो बुनियादी हकों के लिए लड़ रहा है: 'सस्ता न्याय' और 'बेहतर इलाज'। सालों से लंबित इस मांग को अब एक नई संजीवनी मिली है। आगामी केंद्रीय बजट और राज्य के बजट सत्र से ठीक पहले, उत्तर प्रदेश सरकार और जनप्रतिनिधियों ने पश्चिमी यूपी की आवाज को दिल्ली के गलियारों तक पूरी ताकत से पहुँचाने का काम किया है।READ ALSO:-Killer in the Sky: मेरठ के आसमान में लहरा रही 'मौत', चाइनीज मांझे ने त्योहार को बनाया 'खूनी खेल'; प्रशासन सुस्त, जनता त्रस्त
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उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना (Suresh Khanna) ने केंद्रीय वित्त मंत्री के साथ हुई अहम 'बजट-पूर्व बैठक' (Pre-Budget Meeting) में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की खंडपीठ (High Court Bench) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया है।
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वहीं, राज्यसभा सांसद ने इस मुहीम को धार देते हुए मेरठ में एम्स का सैटेलाइट सेंटर बनाने के लिए जमीन का ब्यौरा भी पेश कर दिया है। यह खबर पश्चिमी यूपी के करोड़ों लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई है।
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इस विस्तृत विशेष रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि आखिर सरकार का प्लान क्या है, मेरठ में एम्स कहाँ बन सकता है, और हाईकोर्ट बेंच को लेकर क्या नया फार्मूला सुझाया गया है।
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न्याय की आस: हाईकोर्ट बेंच के लिए 'लखनऊ फार्मूला'
\r\n\r\nपश्चिमी उत्तर प्रदेश के वादियों (Litigants) के लिए प्रयागराज (इलाहाबाद) जाकर न्याय मांगना किसी तपस्या से कम नहीं है। मेरठ, सहारनपुर या मुजफ्फरनगर से प्रयागराज की दूरी 600-700 किलोमीटर है। इस दर्द को समझते हुए, अब एक व्यावहारिक समाधान पेश किया गया है।
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क्या है सांसद और वित्त मंत्री का प्रस्ताव?
\r\n\r\nराज्यसभा सांसद ने मांग का समर्थन करते हुए एक अंतरिम समाधान (Interim Solution) सुझाया है:
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- \r\n तत्काल राहत: जब तक पश्चिमी यूपी में अलग से हाईकोर्ट की बेंच स्थापित नहीं हो जाती, तब तक इस क्षेत्र को लखनऊ बेंच (Lucknow Bench) से संबद्ध (Attach) कर दिया जाए।\r\n \r\n
- \r\n तर्क: पश्चिमी यूपी से लखनऊ की दूरी प्रयागराज के मुकाबले कम है और कनेक्टिविटी बेहतर है। इससे वादियों का समय और पैसा दोनों बचेगा।\r\n \r\n
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ई-फाइलिंग पर आपत्ति
\r\n\r\nसांसद ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा ई-फाइलिंग केंद्रों (E-filing Centers) पर लगाए गए प्रतिबंधों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।
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- \r\n मौजूदा नियम: वर्तमान में, ई-फाइलिंग की अनुमति केवल उन वकीलों को है जो इलाहाबाद बार एसोसिएशन में पंजीकृत हैं।\r\n \r\n
- \r\n समस्या: इसका मतलब यह है कि मेरठ या गाजियाबाद का कोई वकील अपने चैंबर से सीधे केस फाइल नहीं कर सकता। उसे इलाहाबाद के वकील की मदद लेनी ही पड़ती है।\r\n \r\n
- \r\n मांग: इस प्रतिबंध को हटाया जाए ताकि पश्चिमी यूपी के वकील डिजिटल माध्यम से अपने मुवक्किलों का केस लड़ सकें।\r\n \r\n
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स्वास्थ्य क्रांति: मेरठ में एम्स या कैंसर अस्पताल?
\r\n\r\nपश्चिमी यूपी के मरीजों को गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अक्सर दिल्ली के एम्स (AIIMS Delhi) पर निर्भर रहना पड़ता है, जहाँ पहले से ही भारी भीड़ है। इस दबाव को कम करने के लिए मेरठ को एक मेडिकल हब के रूप में विकसित करने का खाका तैयार किया गया है।
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52 एकड़ जमीन तैयार
\r\n\r\nसांसद ने खुलासा किया कि मेरठ में जमीन की कोई कमी नहीं है।
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- \r\n लोकेशन: मेरठ मेडिकल कॉलेज (LLRM Medical College) के पास।\r\n \r\n
- \r\n उपलब्धता: यहाँ करीब 52 एकड़ खाली जमीन उपलब्ध है।\r\n \r\n
- \r\n प्रस्ताव: इस जमीन का उपयोग एम्स के सैटेलाइट सेंटर (AIIMS Satellite Center) या एक अत्याधुनिक कैंसर अस्पताल बनाने के लिए किया जा सकता है।\r\n \r\n
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अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो मेरठ, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, बागपत और हापुड़ समेत पूरे संभाग के मरीजों को दिल्ली दौड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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सुरेश खन्ना की 'बजट कूटनीति'
\r\n\r\nउत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ राज्यों के वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। सूत्रों के मुताबिक, खन्ना ने स्पष्ट किया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की आर्थिक और सामाजिक प्रगति के लिए न्यायिक और चिकित्सीय ढांचा मजबूत करना अनिवार्य है।
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प्रमुख मांगें:
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- \r\n पश्चिमी यूपी में हाईकोर्ट बेंच की स्थापना के लिए बजटीय प्रावधान।\r\n \r\n
- \r\n मेरठ में एम्स या सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल के लिए केंद्रीय अनुदान।\r\n \r\n
- \r\n क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड।\r\n \r\n
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सांसद का संकल्प: "संसद में गूंजेगी आवाज"
\r\n\r\nराज्यसभा सांसद ने 'खबरिलाल' से बातचीत में संकेत दिए कि यह लड़ाई अब रुकने वाली नहीं है।
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\r\n\r\n\r\n"मुझे पूरा विश्वास है कि वित्त मंत्री सुरेश खन्ना के समर्थन से इन मुद्दों को बल मिला है। हम इस लड़ाई को और तेजी से लड़ेंगे। आगामी बजट सत्र में मैं इन मांगों को संसद के पटल पर निश्चित रूप से उठाऊंगा। हमें उम्मीद है कि सत्र से पहले ही केंद्र सरकार की ओर से कुछ अनुकूल संकेत मिलेंगे।"\r\n
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मेरठ के संबंध में उनकी चार प्रमुख मांगें हैं, जिनमें एम्स और हाईकोर्ट बेंच सबसे ऊपर हैं। अन्य मांगों में शहर के जाम की समस्या और औद्योगिक विकास शामिल हैं।
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जनता का दर्द: क्यों जरूरी हैं ये दोनों मांगें?
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हाईकोर्ट बेंच क्यों?
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- \r\n दूरी और खर्च: पश्चिमी यूपी के 22 जिलों की आबादी करीब 8 करोड़ है। एक छोटी सी तारीख के लिए प्रयागराज जाने में 2-3 दिन और हजारों रुपये खर्च होते हैं।\r\n \r\n
- \r\n जसवंत सिंह आयोग: 1980 के दशक में गठित जसवंत सिंह आयोग ने भी पश्चिमी यूपी में बेंच की सिफारिश की थी, जो आज तक ठंडे बस्ते में है।\r\n \r\n
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एम्स क्यों?
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- \r\n दिल्ली पर बोझ: पश्चिमी यूपी का पूरा मरीज लोड दिल्ली एम्स पर जाता है।\r\n \r\n
- \r\n कैंसर के बढ़ते मामले: पश्चिमी यूपी के कुछ क्षेत्रों में कैंसर के मामले बढ़े हैं, जिसके लिए स्थानीय स्तर पर कोई बड़ा संस्थान नहीं है। 52 एकड़ जमीन का उपयोग इस दिशा में गेम चेंजर साबित हो सकता है।\r\n \r\n
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उम्मीदों का बजट 2026
\r\n\r\nअब सबकी निगाहें फरवरी में पेश होने वाले केंद्रीय बजट और उसके बाद यूपी के बजट पर टिकी हैं। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और जनप्रतिनिधियों की यह सक्रियता बताती है कि सरकार पश्चिमी यूपी की नाराजगी को दूर करने और विकास की रफ़्तार बढ़ाने के लिए गंभीर है।
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अगर मेरठ को एम्स का सैटेलाइट सेंटर और हाईकोर्ट की कनेक्टिविटी मिल जाती है, तो यह 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
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'खबरीलाल' की राय: विकास केवल सड़कों और एक्सप्रेसवे से नहीं होता। जब तक सस्ता न्याय और अच्छा इलाज आम आदमी की पहुँच में नहीं होगा, विकास अधूरा है। पश्चिमी यूपी का यह हक अब उसे मिलना ही चाहिए।
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[डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट वित्त मंत्री की बैठक और सांसद के बयानों पर आधारित है। अंतिम निर्णय केंद्र और राज्य सरकार के बजट सत्र में लिया जाएगा।]
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