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मेरठ (न्यूज़ डेस्क): उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित भैंसाली बस डिपो (Bhainsali Bus Depot) में बुधवार की आधी रात को एक भीषण अग्निकांड हुआ, जिसने न केवल प्रशासन में हड़कंप मचा दिया, बल्कि रोडवेज कर्मचारियों की सुरक्षा और डिपो की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हरिद्वार से वापस लौटी रोडवेज की बस के अंदर गहरी नींद में सो रहे चालक और परिचालक ने मौत को बेहद करीब से देखा। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और दो बसें पूरी तरह जलकर खाक हो गईं।READ ALSO:-बिजनौर में 'मौत की मिठास': शादी से लाए गए बासी रसगुल्ले खाने से फूड प्वाइजनिंग, 2 साल के मासूम की दर्दनाक मौत
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कैसे हुआ हादसा?

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जानकारी के मुताबिक, रोडवेज बस (UP78FT1789) बुधवार रात करीब 2 बजे हरिद्वार से वापस मेरठ के भैंसाली डिपो पहुंची थी। बस पर मोदीनगर निवासी चालक बबली और बागपत रोड निवासी परिचालक अरुण तैनात थे। अपनी लंबी ड्यूटी पूरी करने के बाद दोनों ने डिपो के अंदर बस खड़ी की और थकान के कारण बस के अंदर ही विश्राम करने लगे।
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 Meerut Bhaisali Depot Bus Fire | Midnight Accident Driver Escapes

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अभी बमुश्किल आधा घंटा ही बीता था कि तड़के करीब 3 बजे परिचालक अरुण की आंख अचानक धुएं और दम घुटने के अहसास से खुली। उसने देखा कि बस का अगला हिस्सा आग की लपटों से घिरा हुआ है। उसने तुरंत चालक बबली को जगाया और शोर मचाया। आग इतनी तेजी से फैली कि दोनों को अपनी जान बचाना भारी पड़ गया। किसी तरह उन्होंने बस के पिछले हिस्से का खिड़की का शीशा तोड़ा और बाहर कूदकर अपनी जान बचाई।
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आग का गोला बनीं बसें

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आग की लपटें इतनी तेज थीं कि पास में ही खड़ी एक अनुबंधित बस (UP15FT1789) भी उनकी चपेट में आ गई। देखते ही देखते दोनों बसें धू-धू कर जलने लगीं। इस अग्निकांड में बस के अंदर मौजूद ई-टिकटिंग मशीन (ETM), कैश से भरा बैग, चालक-परिचालक के कीमती कपड़े और अन्य जरूरी सामान जलकर खाक हो गए। सूचना मिलते ही दमकल की दो गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब आधे घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक दो बसें पूरी तरह तबाह हो चुकी थीं। तीसरी बस को भी क्षति पहुंची है।
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 यह बस पास ही खड़ी थी, जिसे आग ने चपेट में ले लिया।

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क्या शॉर्ट सर्किट या साजिश? उठ रहे हैं कई सवाल

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इस घटना के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि "बंद खड़ी बस में आग कैसे लगी?"
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    शॉर्ट सर्किट की थ्योरी: शुरुआती छानबीन में आग की वजह शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। लेकिन सवाल यह है कि इंजन बंद होने और बैटरी कट ऑफ होने के बावजूद आग कैसे लगी?
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    विद्युत लाइनों का अभाव: घटनास्थल के आसपास कोई विद्युत लाइन नहीं है, ऐसे में शॉर्ट सर्किट की संभावना पर सवाल उठ रहे हैं।
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    साजिश की आशंका: डिपो में रात के समय काफी लोग मौजूद थे, इसके बावजूद आग इतनी तेजी से कैसे फैली? प्रशासन अब इस बात की भी गहन जांच कर रहा है कि कहीं किसी शरारती तत्व ने तो आग नहीं लगाई।
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सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो

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इस अग्निकांड का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में डिपो के अंदर भारी भीड़ और आग की लपटें साफ देखी जा सकती हैं। इनमें से एक बस सीएनजी (CNG) फिटेड बताई जा रही है, जिससे डर था कि कहीं बड़ा धमाका न हो जाए।
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 अगले हिस्से से आग लगने के बाद पूरी बस में फैल गई।

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प्रशासन ने शुरू की जांच

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फिलहाल दोनों जली हुई बसों को डिपो के वर्कशॉप में भेजा गया है। रोडवेज के उच्चाधिकारियों ने घटना की गहन जांच के आदेश दे दिए हैं। चालक-परिचालक के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और डिपो के सीसीटीवी फुटेज को खंगाला जा रहा है। यह घटना रोडवेज डिपो की सुरक्षा व्यवस्था और बसों के रखरखाव पर भी एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है। प्रशासन का कहना है कि जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। गनीमत रही कि चालक और परिचालक ने समय रहते जान बचा ली, वरना यह हादसा और भी भयावह हो सकता था।
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