मेरठ और इसके सीमावर्ती ज़िले जैसे गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर और हापुड़ दिल्ली-एनसीआर के करीब होने के बावजूद रोज़गार के अवसरों में पीछे हैं। युवाओं के लिए उन्नति के द्वार खोलने और पलायन रोकने के लिए, सरकार को चल रही RRTS, नए ट्रांसपोर्ट हब (मोदीपुरम/भूड़बराल), और एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं को रोज़गार सृजन की रणनीति के साथ एकीकृत करना होगा।READ ALSO:-मेरठ का कायाकल्प: जाम-प्रदूषण मुक्त शहर और रोजगार की बहार; एक मास्टरप्लान जो पूरे पश्चिमी यूपी की बदलेगा तस्वीर
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1. इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और लॉजिस्टिक्स हब का विकास
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बेहतर कनेक्टिविटी रोजगार को सीधे आकर्षित करती है। सरकार को मेरठ को एक उच्च-क्षमता वाले लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करना चाहिए।
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    कनेक्टिविटी को अंतिम रूप देना: रैपिड रेल (RRTS), गंगा एक्सप्रेसवे और ईस्टर्न पेरीफेरल एक्सप्रेसवे जैसी परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जाना चाहिए। ये परियोजनाएं न केवल आवागमन को सुगम बनाएंगी, बल्कि दिल्ली-एनसीआर के बड़े बाजारों तक स्थानीय उत्पादों की पहुँच भी आसान बनाएंगी।
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    ट्रांसपोर्ट हब: हाल ही में भैंसाली बस अड्डे को शहर से बाहर स्थानांतरित करने का निर्णय सही दिशा में एक कदम है। मोदीपुरम और भूड़बराल जैसे नए हब को मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी (बस, मेट्रो/RRTS, स्थानीय परिवहन) से जोड़कर एक पूर्ण ट्रांसपोर्ट हब बनाया जाए।
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    वेयरहाउसिंग और कोल्ड स्टोरेज: कृषि और स्थानीय उद्योग के लिए वेयरहाउसिंग और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं का विकास किया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर खुलेंगे।
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2. शिक्षा और कौशल का औद्योगिक समन्वय
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युवाओं को ऐसी शिक्षा और कौशल प्रदान करना जरूरी है जो बाजार की वर्तमान मांग के अनुरूप हों।
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    इंडस्ट्री-सेंट्रिक ट्रेनिंग: स्थानीय खेल उद्योग, लाइट मैन्युफैक्चरिंग और फार्मा जैसे क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से ITI और पॉलिटेक्निक संस्थानों के पाठ्यक्रम को अपडेट किया जाए।
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    टेक्नोलॉजी और डिजिटल स्किलिंग: मेरठ में शिक्षित युवाओं के 'ब्रेन ड्रेन' को रोकने के लिए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा साइंस और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में उन्नत तकनीकी प्रशिक्षण केंद्र (Advanced Technology Centers) स्थापित किए जाएं।
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    इंटर्नशिप को अनिवार्य करना: सभी तकनीकी और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में स्थानीय MSMEs के साथ अनिवार्य इंटर्नशिप को लागू किया जाए, ताकि छात्र औपचारिक शिक्षा पूरी होने से पहले ही कार्य अनुभव प्राप्त कर सकें।
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3. स्थानीय MSME और पारंपरिक उद्योगों का उन्नयन
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मेरठ अपनी कैंची, खेल के सामान (Sports Goods) और हथकरघा उद्योगों के लिए प्रसिद्ध है। ये स्थानीय उद्योग रोजगार के आधार स्तंभ हैं, जिन्हें आधुनिक समर्थन की आवश्यकता है।
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    तकनीकी आधुनिकीकरण: इन उद्योगों को पुरानी मशीनरी को बदलने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए आसान ऋण और सब्सिडी दी जानी चाहिए।
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    क्लस्टर विकास: खेल उद्योग और कैंची उद्योग के लिए विशेष उत्पादन क्लस्टर (Production Clusters) विकसित किए जाएं, जहाँ साझा परीक्षण सुविधाएँ (Common Testing Facilities) और डिज़ाइन सेंटर उपलब्ध हों।
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    अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार पहुँच: 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत, इन उत्पादों की वैश्विक मार्केटिंग और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म तक आसान पहुँच सुनिश्चित की जाए।
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4. नई इंडस्ट्री और IT/ITeS को आकर्षित करना
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मेरठ को अब दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते दबाव और जेवर एयरपोर्ट की निकटता का लाभ उठाना चाहिए ताकि नए सेक्टरों को आकर्षित किया जा सके।
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    IT/ITeS हब: नोएडा और गुड़गाँव के मुकाबले मेरठ में कम लागत पर कार्यबल उपलब्ध है। सरकार को यहाँ छोटे IT/ITeS पार्क या इंक्यूबेशन सेंटर स्थापित करने चाहिए ताकि दिल्ली से पलायन करने वाली या नई स्थापित होने वाली टेक्नोलॉजी कंपनियों को यहाँ निवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।
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    'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस': नई कंपनियों के लिए भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से सरल और डिजिटल बनाया जाए, ताकि नौकरशाही बाधा न बने।
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5. उद्यमशीलता और स्टार्टअप इकोसिस्टम को बढ़ावा
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युवाओं को नौकरी चाहने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बनने के लिए प्रोत्साहित करना।
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    स्टार्टअप फंडिंग: छोटे व्यवसायों और नवीन विचारों वाले स्थानीय युवाओं को सीड फंडिंग (Seed Funding) और इंक्यूबेशन सुविधाएँ प्रदान की जाएं।
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    सरकारी खरीद में प्राथमिकता: स्थानीय MSME और स्टार्टअप द्वारा निर्मित उत्पादों को सरकारी खरीद में प्राथमिकता दी जाए।
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    मेंटॉरशिप प्रोग्राम: सफल उद्यमियों और उद्योग विशेषज्ञों को शामिल करते हुए मेंटॉरशिप और मार्गदर्शन कार्यक्रम (Mentorship and Guidance Programs) शुरू किए जाएं, जिससे स्थानीय युवाओं को सही व्यावसायिक दिशा मिल सके।
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इन रणनीतियों पर एक साथ और मजबूती से काम करके, सरकार मेरठ और आसपास के जिलों को न केवल क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था का केंद्र बना सकती है, बल्कि यहाँ के लाखों युवाओं के लिए स्थायी रोजगार और उन्नति के अवसरों का द्वार भी खोल सकती है।
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