खबरीलाल डेस्क
मेरठ/उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ से अधिक आबादी की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन करने के लिए आज यानी 7 मई का दिन एक ऐतिहासिक कदम का गवाह बन रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'हमारी जनगणना, हमारा विकास' विजन के अनुरूप, मेरठ सहित प्रदेश के सभी 75 जिलों में 'जनगणना-2027' के प्रथम चरण का विधिवत शुभारंभ आज से हो गया है।READ ALSO:-यूपी में महा-सर्वेक्षण का शंखनाद: सीएम योगी ने लॉन्च की 'डिजिटल जनगणना-2027', पहली बार होगी जातीय गणना, जानें आपके लिए क्या है 7 से 21 मई तक का प्लान
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अब तक आपने जनगणना के नाम पर हाथों में मोटे-मोटे रजिस्टर और पेन लिए कर्मचारियों को घर-घर घूमते देखा होगा, लेकिन इस बार पूरी तस्वीर बदल चुकी है। यह भारत की पहली पूर्ण रूप से 'डिजिटल और पेपरलेस' जनगणना है, जिसमें तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया जा रहा है।
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आज से लाइव हुआ स्व-गणना (Self-Enumeration) पोर्टल: खुद बनें अपने प्रगणक

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इस डिजिटल महाभियान का सबसे क्रांतिकारी पहलू 'स्व-गणना' (Self-Enumeration) का विकल्प है, जो आज (7 मई) से आम जनता के लिए खोल दिया गया है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में अब आपको अपनी जानकारी दर्ज कराने के लिए किसी सरकारी कर्मचारी के आपके घर आने का इंतजार नहीं करना होगा।
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स्व-गणना कैसे काम करती है?

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    पोर्टल पर जाएं: नागरिक अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप या टैबलेट के माध्यम से सीधे सरकारी जनगणना पोर्टल या अधिकृत मोबाइल ऐप पर जा सकते हैं।
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    लॉगिन प्रक्रिया: अपने मोबाइल नंबर या आधार कार्ड का उपयोग करके पोर्टल पर लॉगिन करें। आपके नंबर पर एक सुरक्षित OTP (वन-टाइम पासवर्ड) आएगा।
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    जानकारी दर्ज करें: पोर्टल पर एक बेहद आसान और यूजर-फ्रेंडली फॉर्म खुलेगा। इसमें आपको परिवार के मुखिया का नाम, सदस्यों की कुल संख्या, आयु, शैक्षणिक योग्यता, पेशा, मकान की स्थिति (कच्चा/पक्का), पेयजल की सुविधा और घर में मौजूद साधनों (जैसे- टू-व्हीलर, कार, इंटरनेट कनेक्शन, टीवी) की जानकारी भरनी होगी।
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    रेफरेंस नंबर (Reference Number): जैसे ही आप फॉर्म सबमिट करेंगे, आपकी स्क्रीन पर एक विशेष 'रेफरेंस नंबर' या बारकोड जनरेट होगा। इस नंबर का स्क्रीनशॉट ले लें या इसे किसी डायरी में सुरक्षित नोट कर लें।
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    समय सीमा: स्व-गणना की यह विंडो आज 7 मई से शुरू होकर 21 मई तक खुली रहेगी।
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यह सुविधा विशेष रूप से उन नौकरीपेशा, व्यापारी और शहरी नागरिकों के लिए एक वरदान है, जो दिन के समय काम के सिलसिले में घर से बाहर रहते हैं। आप रात में या अपने किसी भी खाली समय में यह फॉर्म आराम से भर सकते हैं।
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22 मई से घर-घर दस्तक देंगे प्रगणक (Door-to-Door Survey)

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प्रशासन इस बात को भली-भांति जानता है कि हर नागरिक के पास स्मार्टफोन या अच्छी इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं है, विशेषकर सुदूर ग्रामीण इलाकों में। इसलिए स्व-गणना के बाद एक व्यापक जमीनी अभियान की रूपरेखा भी तैयार की गई है।
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जो परिवार 7 से 21 मई के बीच ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज नहीं कर पाएंगे, उनके लिए 22 मई से प्रगणकों (Enumerators) का घर-घर सर्वे शुरू होगा।
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    कागज नहीं, टैबलेट से होगी गणना: 22 मई से जब सरकारी शिक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता या स्थानीय लेखपाल प्रगणक के रूप में आपके घर आएंगे, तो उनके हाथ में रजिस्टर नहीं, बल्कि सरकार द्वारा आवंटित स्मार्टफोन या टैबलेट होगा।
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    जनगणना ऐप (Census App) का इस्तेमाल: प्रगणक एक विशेष रूप से डिजाइन किए गए 'जनगणना ऐप' में आपसे सवाल पूछकर आपकी जानकारी फीड करेंगे। यह ऐप ऑफलाइन मोड में भी काम करता है, ताकि नेटवर्क न होने पर भी डेटा फीड हो सके और नेटवर्क क्षेत्र में आते ही वह सर्वर पर अपलोड हो जाए।
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    जिन्होंने स्व-गणना कर ली है, उन्हें क्या करना है? यदि आपने 21 मई से पहले ही खुद पोर्टल पर जानकारी भर दी है, तो 22 मई के बाद जब प्रगणक आपके घर आएंगे, तो आपको दोबारा जानकारी देने की जरूरत नहीं है। आपको सिर्फ पोर्टल से मिला वह 'रेफरेंस नंबर' या बारकोड प्रगणक को दिखाना होगा। प्रगणक उसे अपने ऐप में दर्ज करेगा, सिस्टम उसे तुरंत 'वेरीफाइड' कर देगा और आपका काम कुछ ही सेकंड में समाप्त हो जाएगा।
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मेरठ का एक्शन प्लान: हाई-टेक कंट्रोल रूम और हजारों कर्मचारियों की फौज

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अहम केंद्र मेरठ में इस महाभियान को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है। मेरठ की घनी शहरी आबादी और विस्तृत ग्रामीण क्षेत्र को कवर करने के लिए एक मजबूत प्रशासनिक जाल बिछाया गया है।
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    प्रगणकों की बड़ी टीम: पूरे जिले में हजारों प्रगणकों और उनके कार्यों की निगरानी के लिए सैकड़ों सुपरवाइजरों की ड्यूटी लगाई गई है। इन सभी को पिछले एक महीने से टैबलेट चलाने, ऐप में डेटा फीड करने और तकनीकी बारीकियों की सघन ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
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    विकास भवन में कंट्रोल रूम: मेरठ के विकास भवन में एक हाई-टेक 'सेंट्रल कंट्रोल रूम' स्थापित किया गया है। यहाँ बैठे नोडल अधिकारी जीपीएस (GPS) और लाइव डैशबोर्ड के माध्यम से देख सकेंगे कि किस ब्लॉक, तहसील या वार्ड में कितने प्रतिशत गणना पूरी हो चुकी है।
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    रियल-टाइम मॉनिटरिंग: अगर कोई प्रगणक किसी घर को छोड़ देता है या गलत डेटा भरता है, तो सिस्टम के 'चेक एंड बैलेंस' फीचर के जरिए उच्चाधिकारियों को तुरंत अलर्ट मिल जाएगा।
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पूरी प्रक्रिया 100% डिजिटल होने के बड़े मायने

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दशकों से चली आ रही कागजी व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल में बदलने के पीछे सरकार के कई महत्वपूर्ण और दूरगामी लक्ष्य छिपे हैं:
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    आंकड़ों की गति और सटीकता: पहले कागजी फॉर्म को जमा करने और फिर उसकी डेटा एंट्री करने में 2 से 3 साल का समय लग जाता था। डिजिटल होने से जैसे ही प्रगणक डेटा सबमिट करेगा, वह सीधे दिल्ली और लखनऊ के मुख्य सर्वर पर पहुंच जाएगा। इससे जनगणना के आंकड़े बहुत जल्द जनता के सामने आ सकेंगे।
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    पर्यावरण संरक्षण: इस बार करोड़ों कागजों की छपाई नहीं होगी, जिससे लाखों पेड़ों को कटने से बचाया जा सकेगा। यह भारत की पहली 'ग्रीन जनगणना' भी कही जा सकती है।
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    पारदर्शिता और धोखाधड़ी पर लगाम: ऐप में प्रगणक की जीपीएस लोकेशन ट्रैक होगी। इसका मतलब है कि कोई भी कर्मचारी घर बैठे फर्जी आंकड़े नहीं भर सकेगा। उसे उस घर के दरवाजे तक जाना ही होगा।
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आपके 15 मिनट, देश के अगले 10 साल का भविष्य

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जनगणना सिर्फ लोगों की गिनती नहीं है; यह एक ऐसा महा-दस्तावेज है जो यह तय करेगा कि आपके शहर या गांव में अगला सरकारी अस्पताल, स्कूल, सड़क या पानी की टंकी कहां बनेगी।
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    योजनाओं का असली आधार: सरकार इसी डेटा के आधार पर तय करती है कि आयुष्मान भारत, पीएम आवास योजना या उज्ज्वला योजना के असली हकदार कौन हैं।
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    राजनीतिक परिसीमन: भविष्य में आपके इलाके का वार्ड कैसा होगा, विधानसभा या लोकसभा सीटों का दायरा (Delimitation) कैसा होगा, यह सब इसी जनसंख्या के आधार पर तय किया जाएगा।
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नागरिकों के लिए जिला प्रशासन की विशेष एडवाइजरी

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महाभियान की शुरुआत के साथ ही जिला प्रशासन ने कुछ सावधानियां भी जारी की हैं:
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    सही और स्पष्ट जानकारी दें: अपनी आय, मकान की स्थिति और सदस्यों की संख्या सही बताएं। यह डेटा पूरी तरह गोपनीय रहता है।
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    साइबर ठगों से रहें सावधान: जनगणना के नाम पर कोई भी सरकारी अधिकारी आपसे आपके बैंक खाते का नंबर, एटीएम पिन, यूपीआई (UPI) पिन या बैंक का ओटीपी नहीं मांगेगा। यदि कोई ऐसा करता है, तो तुरंत 112 पर पुलिस को सूचना दें।
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    आधिकारिक प्रगणक की पहचान: 22 मई से घर आने वाले प्रगणक के पास जिलाधिकारी/नोडल अधिकारी द्वारा जारी किया गया आधिकारिक 'पहचान पत्र' (ID Card) जरूर होगा। संदेह होने पर आप उसे देख सकते हैं।
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आज (7 मई) से शुरू हुआ यह डिजिटल महायज्ञ हम सभी के सहयोग से ही पूरा हो सकता है। यह एक राष्ट्रीय कर्तव्य है। अगर आपके पास स्मार्टफोन है, तो आज ही पोर्टल पर जाकर स्व-गणना (Self-Enumeration) के विकल्प का लाभ उठाएं। यदि ऐसा नहीं कर सकते हैं, तो 22 मई से घर आने वाले प्रगणक का स्वागत करें और सही जानकारी देकर अपने क्षेत्र और देश के विकास में भागीदार बनें।