खबरीलाल डेस्क
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से सोमवार को एक बेहद दुखद और हृदयविदारक खबर सामने आई है। शहर के घनी आबादी वाले अलीगंज इलाके में स्थित एक दो मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में सोमवार दोपहर करीब 2:15 बजे भयंकर आग लग गई। इस भयानक लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा में अब तक 14 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जिनमें से ज्यादातर कोचिंग और लाइब्रेरी में पढ़ने वाले बेगुनाह छात्र हैं। आग की लपटें और धुएं का गुबार इतना तेज था कि किसी को संभलने और बाहर भागने का मौका ही नहीं मिला। इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। READ ALSO:- मेरठ में सुप्रीम कोर्ट के आदेश का खौफ: तीसरे दिन भी गरजा आवास विकास का बुलडोजर, 860 संपत्तियों पर एक्शन; विरोध में सड़क पर उतरीं महिलाएं
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कैसे हुआ यह लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा?

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जिस इमारत में यह लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा हुआ, उसकी संरचना काफी घनी और जटिल थी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस बिल्डिंग के बेसमेंट, ग्राउंड और पहले फ्लोर पर पेट शॉप (Pet Shop) और एक क्लीनिक संचालित हो रहा था। वहीं, दूसरे फ्लोर पर 'लर्निंग स्पेस' नाम की लाइब्रेरी (कोचिंग) चल रही थी, जहां बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते थे।
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इसके अलावा, इसी दूसरे फ्लोर पर 'हेड हॉपर स्टूडियो' भी मौजूद था, जिसमें 3D आर्ट प्रोडक्शन और गेम एसेट आउटसोर्सिंग का काम होता था। आग सबसे पहले किस फ्लोर पर और कैसे लगी, इसकी आधिकारिक जांच अभी चल रही है, लेकिन आग लगने के कुछ ही मिनटों के भीतर काला और जहरीला धुआं तेजी से सीढ़ियों के जरिए ऊपर की तरफ उठा। इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा के वक्त बिल्डिंग के अंदर कई दर्जन छात्र, कर्मचारी और ग्राहक मौजूद थे।
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जान बचाने की जद्दोजहद और दर्दनाक मंजर

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प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा हुआ, तो दूसरे फ्लोर पर मौजूद छात्रों में दहशत और भगदड़ मच गई। बाहर निकलने का रास्ता धुएं से भरा होने के कारण, कई छात्रों ने आग की लपटों से बचने के लिए खुद को कोचिंग के बाथरूम में बंद कर लिया, जो दुर्भाग्यवश उनके लिए जानलेवा साबित हुआ।
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अपनी जान बचाने की छटपटाहट में एक छात्र ने पहले फ्लोर की खिड़की से नीचे छलांग लगा दी। लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया और वह सीधे नीचे लगी लोहे की नुकीली ग्रिल पर जा गिरा, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा में बचे एक प्रत्यक्षदर्शी युवक ने खौफनाक मंजर बयां करते हुए बताया, "मैं दूसरी मंजिल पर अंदर था। जैसे ही पीसी (PC) बंद करने के लिए बाहर निकला, देखा कि चारों तरफ सिर्फ धुआं ही धुआं फैल चुका था। मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मैं अपना बैग उठाया और किसी तरह अपनी जान बचाकर बाहर आया। लेकिन मेरे बहुत से साथी अंदर ही फंसे रह गए थे।" युवक का आरोप है कि सूचना देने के करीब आधे घंटे बाद फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची। 
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रेस्क्यू ऑपरेशन: टूटी दीवारें और कम पड़ी एंबुलेंस

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घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन में हड़कंप मच गया। इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा में फंसे लोगों को निकालने के लिए तुरंत फायर ब्रिगेड की करीब 10 गाड़ियां और एक हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म को मौके पर तैनात किया गया। स्थिति की गंभीरता और अंदर फंसे बच्चों की संख्या को देखते हुए राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की विशेष टीमों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगा दिया गया।
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जब फायरकर्मी मुख्य रास्ते से अंदर प्रवेश नहीं कर पाए, तो उन्होंने मजबूरन बिल्डिंग के पीछे की दीवार को भारी मशीनों से तोड़ा। इसी टूटी हुई दीवार के जरिए फायरकर्मियों ने फंसे हुए लोगों और दुखद रूप से कई शवों को बाहर निकाला। मौतों और घायलों का आंकड़ा इतना अधिक था कि मौके पर मौजूद एम्बुलेंस भी कम पड़ गईं। घटना स्थल पर तुरंत पहुंचे डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक और प्रमुख सचिव गृह संजय प्रसाद ने मोर्चा संभाला। ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग के जॉइंट डायरेक्टर को मौके से ही फोन कर तत्काल और एम्बुलेंस भेजने के सख्त निर्देश दिए। इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा के रेस्क्यू ऑपरेशन में स्थानीय लोगों ने भी भारी धुएं के बीच पुलिस का पूरा साथ दिया।
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दम घुटने से हुई ज्यादातर मौतें: KGMU

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इस भयानक लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा में जान गंवाने वालों की मेडिकल रिपोर्ट भी व्यवस्था की पोल खोलती है। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने मीडिया को जानकारी दी कि अस्पताल में अब तक लाए गए शवों में बाहरी जलने की चोटें (External Burn Injuries) बेहद कम दिखाई दे रही हैं।
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डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया, "मौत का मुख्य कारण दम घुटना (Suffocation) हो सकता है। बिल्डिंग में वेंटिलेशन (हवा की निकासी) न होने के कारण जहरीला धुआं भर गया और लोग सांस नहीं ले पाए।" उन्होंने आगे बताया कि अब तक 7 गंभीर रूप से घायल लोगों को अस्पताल लाया गया है, और 12-15 और मरीजों के आने की सूचना है। इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा के पीड़ितों के लिए पूरे केजीएमयू और ट्रॉमा सेंटर को हाई अलर्ट पर रखा गया है।
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प्रशासन के अनुसार, आग लगने के बाद बिल्डिंग में कई लोग फंस गए थे। इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा में फंसे लोगों में अम्मार, अनामिका, आदिल, ज्योति, नीलेश, सागर, सैयम, सैजन, सुखमनी, सौमाल्या, अब्दुल रहमान और अनुचा के नाम सामने आए हैं। 5 बच्चे अब भी लापता या फंसे हुए बताए जा रहे हैं। 
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सीएम योगी का सख्त एक्शन: बीच में छोड़ा अलीगढ़ का दौरा

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इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा की गूंज सीधे उत्तर प्रदेश सरकार के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समय अलीगढ़ के दौरे पर थे और एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। जैसे ही उन्हें अपने शहर में इस दुखद घटना की सूचना मिली, उन्होंने तुरंत अपना दौरा रद्द कर दिया।
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सीएम योगी ने जनसभा के मंच से ही दुख जताते हुए कहा, "मैं अभी अलीगढ़ में रुकना चाहता था, लेकिन मुझे अभी लखनऊ में हुए एक दर्दनाक हादसे की जानकारी मिली है। आग की घटना में कुछ बच्चों की दुखद मौत हुई है। प्रशासन राहत और बचाव कार्य में जुटा है, और इस दुखद घटना के चलते मैं तुरंत लखनऊ लौट रहा हूं।"
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मुख्यमंत्री को सोमवार रात अलीगढ़ सर्किट हाउस में रुकना था और मंगलवार सुबह हाथरस जाना था, लेकिन इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा के कारण उन्होंने सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए। सीएम ने मृतकों के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। उन्होंने राज्य के डीजीपी (DGP) व अपर मुख्य सचिव (गृह) को खुद मौके पर जाकर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा की गहराई तक जांच होगी और सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
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अंततः, सोमवार दोपहर हुआ यह लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि हमारे सिस्टम की उन गहरी खामियों का जीता-जागता सबूत है, जहां कमर्शियल इमारतों में फायर सेफ्टी मानकों की खुलेआम अनदेखी की जाती है। कोचिंग सेंटरों और लाइब्रेरी जैसी जगहों पर, जहां सैकड़ों होनहार छात्र अपने भविष्य के सपने बुनते हैं, वहां आपातकालीन निकास (Emergency Exit) का न होना सीधे तौर पर उनकी जान से खिलवाड़ है। 14 बेगुनाह छात्रों की मौत एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई दुनिया की कोई भी जांच रिपोर्ट या मुआवजा नहीं कर सकता। अब समय आ गया है कि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर सभी इमारतों की सख्त फायर ऑडिट करे। हम यही प्रार्थना करते हैं कि इस लखनऊ बिल्डिंग आग हादसा के दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि भविष्य में कोई भी छात्र शिक्षा के मंदिर में ऐसी खौफनाक मौत का शिकार न हो।
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सोमवार दोपहर करीब 2:15 बजे लखनऊ के अलीगंज में एक दो मंजिला बिल्डिंग में भयंकर आग लग गई, जिसमें दम घुटने से 14 छात्रों की मौत हो गई। आग उस मंजिल पर लगी जहाँ लाइब्रेरी और कोचिंग सेंटर संचालित हो रहे थे। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक मौके पर पहुँचे और अतिरिक्त एंबुलेंस मंगवाई। वहीं, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा बीच में ही रद्द कर दिया और लखनऊ वापस लौट आए। फायर ब्रिगेड, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें दीवारें तोड़कर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं, और घायलों का इलाज केजीएमयू में हाई अलर्ट पर जारी है। सरकार ने मामले की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं।