खबरीलाल डेस्क
लखनऊ, 7 जून, 2026: हर साल 7 जून को विश्व स्तर पर सुरक्षित भोजन के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए एक विशेष दिन मनाया जाता है। इसी कड़ी में, विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 (World Food Safety Day 2026) के महत्वपूर्ण अवसर पर, न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया (NCI) ने अपने समर्पित फूड सेफ्टी स्क्वॉड (FSS) के माध्यम से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के प्रमुख फल और सब्जी बाजारों में एक बड़े पैमाने पर खाद्य सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया। इस वर्ष विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 की वैश्विक थीम "बोझ से समाधान तक - हर जगह सुरक्षित भोजन" (From burden to solutions – safe food everywhere) रखी गई है। इस थीम का मुख्य उद्देश्य खाद्य जनित बीमारियों के स्वास्थ्य और आर्थिक बोझ को कम करना तथा सुरक्षित भोजन के लिए विज्ञान-आधारित समाधान खोजना है। Read also:-Mausam 8 June: मौसम का डबल अटैक! 3 दिन रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चेतावनी, वहीं मानसून की रफ्तार से 19 राज्यों में आंधी-बारिश का हाई अलर्ट
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और खाद्य और कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, दुनिया भर में हर साल लगभग 60 करोड़ लोग दूषित भोजन खाने के कारण बीमार पड़ते हैं, और इनमें से लाखों लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है। इसीलिए विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 एक अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर बन जाता है। इस अवसर का लाभ उठाते हुए, NCI के छात्र स्वयंसेवकों ने सुरक्षित खाद्य प्रथाओं को बढ़ावा देने और ताजे उत्पादों को प्रभावित करने वाली खाद्य सुरक्षा चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए किसानों, विक्रेताओं और उपभोक्ताओं के साथ सीधा संवाद किया।
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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026: लखनऊ के बाजारों में जमीनी पहल

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NCI के फूड सेफ्टी स्क्वॉड के स्वयंसेवकों और विशेषज्ञों ने विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के इस अभियान के तहत बाजार में बिकने वाले ताजे उत्पादों की गुणवत्ता का जायजा लिया। उनका उद्देश्य यह समझना था कि खेत से लेकर उपभोक्ताओं की थाली तक भोजन कैसे सुरक्षित रखा जा सकता है। स्वयंसेवकों ने दुबग्गा और अन्य स्थानीय मंडियों का दौरा किया, जहां ताजे उत्पादों की भारी आवक होती है।
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फलों को पकाने वाले रसायनों का बढ़ता खतरा

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बाजार सर्वेक्षण और अभियान के दौरान, NCI के स्वयंसेवकों ने एक बहुत ही चिंताजनक बात देखी। उन्होंने पाया कि हरी सब्जियों की तुलना में फलों में पकाने (राइपनिंग) और शेल्फ-लाइफ (संरक्षण अवधि) बढ़ाने वाले एजेंटों और रसायनों का उपयोग बहुत अधिक आम था। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के इस अभियान में मुख्य फोकस इसी बात पर रहा कि लोगों को इन हानिकारक रसायनों के खतरों से अवगत कराया जाए।
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हालांकि कई विक्रेता इस बात से अच्छी तरह अवगत थे कि 'कैल्शियम कार्बाइड' (Calcium Carbide) जिसे आम बोलचाल में 'मसाला' कहा जाता है, फलों को जल्दी पकाने के लिए पूरी तरह से असुरक्षित और सरकार द्वारा प्रतिबंधित है। फिर भी, बाजार में मांग पूरी करने के लिए इसका धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा था। कई लोगों को इससे जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों की गंभीरता के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं थी। इसके अलावा, जो स्वीकृत और सुरक्षित विकल्प बाजार में उपलब्ध हैं, उनके उचित उपयोग का ज्ञान भी विक्रेताओं को नहीं था। उदाहरण के लिए, एथिलीन-आधारित पकाने की प्रक्रिया (Ethylene gas ripening) एक मान्यता प्राप्त और FSSAI द्वारा स्वीकृत विधि है। लेकिन, कई विक्रेता इसके सुरक्षित अनुप्रयोग के लिए आवश्यक तापमान, अनुशंसित स्थितियों और रसायन की उचित मात्रा से पूरी तरह अनजान थे।
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स्वास्थ्य पर हानिकारक रसायनों का गंभीर प्रभाव

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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 का यह जागरूकता अभियान सभी हितधारकों को अनधिकृत पकाने वाले रसायनों, अत्यधिक कीटनाशक अवशेषों, कृत्रिम रंगों, मोम (wax) की पॉलिश और फलों की दिखावट में सुधार या शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए उपयोग की जाने वाली अन्य प्रथाओं के खतरों के बारे में शिक्षित करने पर केंद्रित था।
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फूड सेफ्टी स्क्वॉड के विशेषज्ञों ने विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को विस्तार से बताया कि ऐसे खतरनाक रसायनों के लगातार दुरुपयोग से मानव स्वास्थ्य पर कितने प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकते हैं। कैल्शियम कार्बाइड में आर्सेनिक और फॉस्फोरस के जहरीले अंश होते हैं। इसके सेवन से सिरदर्द, चक्कर आना, पेट खराब होना और यहां तक कि लिवर, किडनी, हृदय और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) पर गंभीर और स्थायी असर हो सकता है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 का मुख्य लक्ष्य आम जनता को इन्हीं छिपी हुई बीमारियों के प्रति सचेत करना है।
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विक्रेताओं और किसानों के साथ सकारात्मक संवाद

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जागरूकता अभियान के शुरुआती चरण में, कुछ विक्रेता बाजार की प्रथाओं और रसायनों के उपयोग पर चर्चा करने में काफी संकोच करते दिखे। उनके मन में यह डर था कि शायद यह कोई सरकारी छापा है और उन पर दंडात्मक या संभावित नियामक कार्रवाई हो सकती है।
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हालांकि, स्वयंसेवकों ने बहुत ही समझदारी से काम लिया और उन्हें स्पष्ट किया कि विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के उपलक्ष्य में यह पहल पूरी तरह से शैक्षिक प्रकृति की है। इसका उद्देश्य किसी प्रकार का जुर्माना लगाना या पुलिस कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि सुरक्षित खाद्य प्रबंधन प्रथाओं का समर्थन करना और सही वैज्ञानिक तरीके सिखाना है। विक्रेताओं ने अपनी मजबूरियां बताते हुए कहा कि कोल्ड स्टोरेज की कमी और परिवहन के दौरान फलों के खराब होने के डर से उन्हें कच्चे फल तोड़ने पड़ते हैं। NCI टीम ने उन्हें सरकारी योजनाओं और सुरक्षित राइपनिंग चैंबर (Ripening Chambers) के बारे में जानकारी दी, जिससे एक रचनात्मक और खुली चर्चा को प्रोत्साहन मिला।
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आम जनता और उपभोक्ताओं की चिंताएं

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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के इस अभियान में भाग लेने वाले स्थानीय उपभोक्ताओं और ग्राहकों ने ताजे उत्पादों में रसायनों के बढ़ते उपयोग के संबंध में अपनी गहरी चिंता व्यक्त की। ग्राहकों ने इस बात को स्वीकार किया कि केवल देखने में सुंदर लगने वाले बेदाग फल हमेशा सेहतमंद नहीं होते।
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उपभोक्ताओं ने एक मजबूत निगरानी तंत्र की आवश्यकता पर जोर दिया। कई लोगों ने यह महत्वपूर्ण सुझाव दिया कि फलों और सब्जियों को मुख्य बाजार में पहुंचने और उपभोक्ताओं को बेचे जाने से पहले एक सख्त सुरक्षा और गुणवत्ता जांच (Quality Check) से गुजरना चाहिए। इससे यह सुनिश्चित हो सकेगा कि वे उत्पाद मानव उपभोग के लिए पूरी तरह से उपयुक्त हैं और किसी भी हानिकारक रासायनिक अवशेषों से मुक्त हैं। NCI स्वयंसेवकों ने उपभोक्ताओं को कृत्रिम रूप से पके फलों की पहचान करना भी सिखाया, जैसे कार्बाइड से पके केले बाहर से पीले होते हैं लेकिन डंठल हरा रहता है। 
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सुरक्षित खाद्य प्रणाली के लिए आवश्यक कदम

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जागरूकता सत्रों और सीधे जुड़ाव के माध्यम से, NCI स्वयंसेवकों ने कई महत्वपूर्ण समाधान प्रस्तुत किए। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के अवसर पर सुरक्षित भोजन सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित प्रथाओं को बढ़ावा दिया गया:
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    फलों को पकाने के स्वीकृत और वैज्ञानिक तरीके अपनाना।
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    खेतों में जिम्मेदार और सीमित कीटनाशकों का उपयोग।
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    तापमान-नियंत्रित और उचित भंडारण सुविधाओं का विकास।
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    बाजार में स्वच्छ रख-रखाव (हैंडलिंग) प्रथाओं का पालन।
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    खाद्य जनित बीमारियों को रोकने के लिए अंतरराष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का पालन। 
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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 का संकल्प

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विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 पर चलाया गया यह अभियान इस महत्वपूर्ण संदेश को सुदृढ़ करता है कि 'खाद्य सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है'। जब तक किसान, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता, नियामक संस्थाएं और अंतिम उपभोक्ता मिलकर काम नहीं करेंगे, तब तक देश में खाद्य सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित नहीं की जा सकती है। किसानों, विक्रेताओं, नियामकों और उपभोक्ताओं द्वारा लिए गए जागरूक विकल्प ही सभी के लिए सुरक्षित, पौष्टिक और उच्च गुणवत्ता वाला भोजन सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
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यह सफल पहल खाद्य सुरक्षा जागरूकता को मजबूत करने, सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने और जमीनी स्तर पर जिम्मेदार खाद्य प्रथाओं की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए न्यूट्रिशन काउंसिल ऑफ इंडिया (NCI) और उसके फूड सेफ्टी स्क्वॉड की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। विश्व खाद्य सुरक्षा दिवस 2026 के इस अभियान ने यह साबित कर दिया है कि शिक्षा और जागरूकता के माध्यम से हमारे खाद्य बाजारों को सुरक्षित और स्वस्थ बनाया जा सकता है।