खबरीलाल डेस्क रिपोर्ट: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से एक बेहद दिल दहला देने वाली और दर्दनाक खबर सामने आई है। शहर के सबसे पॉश इलाकों में गिने जाने वाले विकासनगर क्षेत्र में बुधवार की शाम एक ऐसी त्रासदी आई जिसने सैकड़ों परिवारों की जिंदगी भर की जमा-पूंजी को पल भर में राख के ढेर में बदल दिया। यहाँ स्थित झुग्गी-झोपड़ियों में अचानक भड़की भीषण आग ने तांडव मचा दिया। इस हृदयविदारक घटना में दो मासूम बच्चों की जिंदा जलकर मौत हो गई है, जबकि 250 से अधिक परिवार पूरी तरह से बेघर हो गए हैं। आसमान छूती लपटों और धुएं के गुबार ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल पैदा कर दिया। अब इस मामले में एक बेहद गंभीर और सनसनीखेज आरोप सामने आया है, जहां पीड़ित परिवारों ने इसे हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश करार दिया है।Read also:-मेरठ में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का नया युग: 10 नई सिटी बसों ने भरी उड़ान, अब मात्र ₹10 में नमो भारत और मेट्रो स्टेशन से जुड़ेगा आपका घर
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राख के ढेर में अपनों और सपनों की तलाश: घटनास्थल का रुला देने वाला मंजर
\r\n\r\nगुरुवार की सुबह जब विकासनगर के इस इलाके में सूरज निकला, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। कल शाम तक जहां 250 परिवारों की छोटी सी दुनिया बस्ती थी, वहां आज सिर्फ राख, धुआं और जले हुए बर्तनों के अवशेष बचे थे। महिलाओं की चीख-पुकार और रोते-बिलखते बच्चों की तस्वीरें किसी का भी दिल पसीजने के लिए काफी थीं।
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कई परिवार उस राख के ढेर के बीच अपनी जिंदगी भर की कमाई, कुछ बचे हुए पैसे, या पहचान पत्र तलाशते नजर आए। हालांकि, पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से लोगों को घटनास्थल से हटाना शुरू कर दिया है। बीती रात इन बेघर हुए परिवारों के लिए कयामत की रात थी। जिलाधिकारी (DM) विशाख जी. के निर्देश पर कई प्रभावित परिवारों को प्रशासन द्वारा रैन बसेरों में भिजवाया गया, लेकिन बहुत से ऐसे परिवार भी थे जिन्हें कड़ाके की ठंड के बीच पास के ही एक खुले और खाली प्लॉट में रात गुजारनी पड़ी। जिन आंखों में कल तक अपने आशियाने का सुकून था, आज उनमें सिर्फ बेबसी और खौफ नजर आ रहा है।
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सबसे बड़ा आरोप: "झोपड़ी नहीं हटाई तो गोली मार देंगे... और फिर लगा दी आग"
\r\n\r\nइस पूरे अग्निकांड ने उस वक्त एक आपराधिक साजिश का रूप ले लिया जब वहां रहने वाली महिलाओं ने रोते हुए रसूखदार 'कोठीवालों' पर गंभीर आरोप लगाए। बिलखती हुई महिलाओं ने पुलिस और मीडिया के सामने चीख-चीख कर कहा कि यह आग खुद नहीं लगी है, बल्कि लगाई गई है।
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महिलाओं का साफ तौर पर आरोप है कि पास की कोठियों में रहने वाले कुछ रसूखदार लोग लंबे समय से उन पर वहां से हटने का दबाव बना रहे थे। उन्हें खुली धमकी दी गई थी कि अगर उन्होंने अपनी झोपड़ियां वहां से नहीं हटाईं, तो उन्हें गोली मार दी जाएगी। पीड़ितों का कहना है कि जब वे उनकी धमकियों के आगे नहीं झुके और अपनी जगह नहीं छोड़ी, तो बदला लेने के लिए उनकी झोपड़ियों में आग लगा दी गई। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या वाकई जमीन खाली कराने के लिए इतनी बड़ी खौफनाक साजिश रची गई जिसमें दो बेगुनाह बच्चों की जान चली गई? प्रशासन के लिए इन आरोपों की निष्पक्ष जांच करना अब एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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30 से ज्यादा सिलेंडर फटे, 10 किलोमीटर दूर तक दिखा धुएं का गुबार
\r\n\r\nबुधवार शाम करीब 5:30 बजे आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था। झुग्गियों में बांस, प्लास्टिक और तिरपाल होने की वजह से आग तेजी से फैली। इस दौरान सबसे ज्यादा खौफनाक मंजर तब पैदा हुआ जब झोपड़ियों के अंदर रखे रसोई गैस के सिलेंडर आग की चपेट में आने लगे।
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एक के बाद एक 30 से ज्यादा सिलेंडरों में जोरदार धमाके हुए। इन धमाकों की आवाज इतनी तेज थी कि कई किलोमीटर दूर तक लोगों ने इसे सुना। सिलेंडरों के फटने से आग ने और भी भयावह रूप ले लिया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि आसमान में उठा धुएं का काला गुबार 10 किलोमीटर दूर से ही साफ देखा जा सकता था। एहतियात के तौर पर प्रशासन ने तुरंत एक्शन लेते हुए आसपास के करीब 20 पक्के मकानों को भी खाली करा लिया ताकि आग की लपटें वहां तक न पहुंच सकें। सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके की बिजली तुरंत काट दी गई।
\r\n\r\n5 घंटे की कड़ी मशक्कत, 20 दमकल गाड़ियां और खाक हुई गृहस्थी
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घटना की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीमें मौके पर पहुंचीं। आग इतनी भयंकर थी कि दमकल विभाग को शहर के अलग-अलग फायर स्टेशनों से 20 से ज्यादा गाड़ियां बुलानी पड़ीं। तंग रास्तों और भीड़भाड़ की वजह से रेस्क्यू ऑपरेशन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। दमकल कर्मियों ने अपनी जान पर खेलकर लगातार 5 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद इस भीषण आग पर काबू पाया।
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पीड़ितों का दर्द छलक कर बाहर आ रहा है। उनका कहना है कि उनकी जिंदगी भर की पाई-पाई की कमाई पल भर में जलकर खाक हो गई। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि अगर फायर ब्रिगेड की टीम और भी जल्दी पहुंच जाती, तो शायद कुछ लोगों का थोड़ा बहुत सामान बच सकता था। लेकिन जब तक आग बुझी, तब तक 250 झोपड़ियां पूरी तरह से स्वाहा हो चुकी थीं।
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दो मासूमों की दर्दनाक मौत, शिनाख्त की कोशिशें जारी
\r\n\r\nइस अग्निकांड का सबसे दुखद पहलू दो मासूम बच्चों की मौत है। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोगों को अपना सामान तो दूर, जान बचाने का भी मौका बमुश्किल मिला। इसी अफरा-तफरी में दो मासूम बच्चे आग की लपटों में घिर गए और जिंदा जलने से उनकी दर्दनाक मौत हो गई।
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DCP (दीक्षा शर्मा) ने इस घटना पर बयान देते हुए कहा है कि पुलिस फिलहाल मृतकों के परिजनों की पहचान कराने का प्रयास कर रही है। डीएनए टेस्ट और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से शिनाख्त की कार्रवाई की जाएगी ताकि शवों को उनके परिजनों को सौंपा जा सके।
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राजनाथ सिंह से लेकर डिप्टी सीएम तक अलर्ट, भारी पुलिस बल तैनात
\r\n\r\nराजधानी लखनऊ के इस भीषण अग्निकांड की गूंज शासन के उच्च स्तर तक पहुंच गई है। लखनऊ के सांसद और देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने तुरंत मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी विशाख जी. को फोन किया और पूरी घटना की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने प्रशासन को हर संभव मदद पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
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इसके साथ ही, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक भी घटना की सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे। उन्होंने वहां के हालात का जायजा लिया और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि पीड़ितों के राहत और बचाव कार्य में कोई कोताही न बरती जाए।
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वर्तमान स्थिति की बात करें तो विकासनगर इलाके में भारी तनाव का माहौल है। 'कोठीवालों' पर लगे आरोपों और बेघर हुए लोगों के गुस्से को देखते हुए इलाके में बवाल की आशंका बनी हुई है। इसी को ध्यान में रखते हुए गुरुवार सुबह से ही मौके पर भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई है। चप्पे-चप्पे पर हेलमेट और डंडों के साथ पीएसी (PAC) और सिविल पुलिस के जवान मुस्तैद हैं। जिला प्रशासन की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं और नुकसान का बारीकी से आकलन किया जा रहा है ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द सरकारी मुआवजा दिलाया जा सके। पुलिस मामले के हर पहलू, खासकर साजिश वाले एंगल की बारीकी से जांच कर रही है।