लखनऊ (क्राइम डेस्क/स्पेशल रिपोर्ट): बड़ी-बड़ी कांच की इमारतें, एसी की ठंडी हवाएं, और कंप्यूटर स्क्रीन पर दौड़ती उंगलियां—कॉर्पोरेट जगत की यह चकाचौंध बाहर से जितनी आकर्षक लगती है, कई बार इसके अंदर का तनाव उतना ही जानलेवा साबित होता है। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे पॉश इलाकों में से एक विभूतिखंड (Vibhuti Khand) से एक ऐसी ही दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है।
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रविवार की देर शाम, जब लोग अपने दफ्तरों का काम समेट कर घर जाने की तैयारी कर रहे थे, तब पार्श्वनाथ प्लाजा (Parsvnath Plaza) नाम की बहुमंजिला इमारत की 11वीं मंजिल से एक 22 वर्षीय युवती ने आत्महत्या के इरादे से छलांग लगा दी। लेकिन विज्ञान और चमत्कारों के बीच एक अजीब सा इत्तेफाक हुआ और उस लड़की की जान बच गई।
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रायबरेली से लखनऊ तक का सफर: कौन है शिवांशी पाल?
\r\n\r\nइस खौफनाक कदम को उठाने वाली युवती की पहचान 22 वर्षीय शिवांशी पाल (Shivanshi Pal) के रूप में हुई है। शिवांशी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के अजयनगर कमलापुर की रहने वाली है। छोटे शहर से बड़े सपने लेकर शिवांशी राजधानी लखनऊ आई थी। यहां वह चिनहट थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले खरगापुर इलाके में अपनी बहन के साथ एक किराए का कमरा लेकर रह रही थी।
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परिवार की आर्थिक मदद करने और खुद को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शिवांशी ने विभूतिखंड स्थित पार्श्वनाथ प्लाजा की 11वीं मंजिल पर मौजूद 'वोडाफोन एडब्ल्यूएस' (Vodafone AWS) के कार्यालय में बतौर टेलीकॉलर (Telecaller) नौकरी शुरू की थी। वह रोज की तरह अपना काम कर रही थी, लेकिन किसी को इस बात का जरा सा भी अंदाजा नहीं था कि उसके दिमाग में क्या चल रहा है।
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रविवार शाम 7:15 बजे की पूरी टाइमलाइन: जब थम गईं सांसें
\r\n\r\nरविवार का दिन था। ऑफिस में कर्मचारियों की चहल-पहल थी। शाम के करीब 7:15 बज रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस की शुरुआती तफ्तीश के अनुसार, शिवांशी अपनी डेस्क पर बैठकर काम कर रही थी। अचानक वह अपनी सीट से उठी और अपने सहकर्मियों से कहा कि वह वॉशरूम जा रही है और कुछ ही देर में वापस आ जाएगी।
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5 मिनट बीते, 10 मिनट बीते... जब काफी देर तक शिवांशी अपनी डेस्क पर वापस नहीं लौटी, तो उसके साथ काम करने वाले कर्मचारियों को कुछ अंदेशा हुआ। एक महिला सहकर्मी जब उसे देखने के लिए वॉशरूम के अंदर गई, तो वहां का नजारा देखकर उसकी चीख निकल गई। वॉशरूम खाली था, लेकिन वहां मौजूद एक बड़ी खिड़की पूरी तरह से खुली हुई थी।
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जब सहकर्मियों ने अनहोनी की आशंका के चलते उस खुली खिड़की से नीचे झांक कर देखा, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। शिवांशी बिल्डिंग के नीचे फर्श पर खून से लथपथ पड़ी हुई थी। उसने 11वीं मंजिल की उस खिड़की से अपनी जिंदगी खत्म करने के लिए छलांग लगा दी थी।
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टीन शेड ने किया 'चमत्कार', मौत को छूकर लौटी जिंदगी
\r\n\r\nकरीब 100 से 120 फीट की ऊंचाई (11वीं मंजिल) से गिरने के बाद किसी भी इंसान के बचने की गुंजाइश शून्य होती है। यह सीधे मौत की छलांग थी। लेकिन कहते हैं न, 'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय'। शिवांशी के मामले में यह कहावत पूरी तरह से सच साबित हुई।
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जब शिवांशी ने वॉशरूम की खिड़की से छलांग लगाई, तो वह सीधे जमीन के कठोर फर्श पर नहीं गिरी। पार्श्वनाथ प्लाजा की इमारत के डिजाइन के अनुसार, पहले तल (First Floor) के हिस्से पर एक लोहे और टीन का मजबूत शेड (Tin Shed) बाहर की तरफ निकला हुआ है। 11वीं मंजिल से तेजी से नीचे आते हुए शिवांशी सीधे उस टीन शेड पर जा गिरी।
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शेड से टकराने के कारण उसके शरीर के गिरने की जो जानलेवा रफ्तार (Velocity) थी, वह अचानक टूट गई। टीन शेड ने एक शॉक एब्जॉर्बर (Shock Absorber) का काम किया। शेड से टकराने के बाद वह उछलकर नीचे फर्श पर गिरी। इस भयंकर टक्कर के कारण उसकी जान तो चमत्कारिक रूप से बच गई, लेकिन उसका शरीर बुरी तरह टूट गया।
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अस्पताल में जिंदगी की जंग: क्या कह रहे हैं डॉक्टर?
\r\n\r\nबिल्डिंग के फर्श पर लहूलुहान पड़ी शिवांशी को देखकर वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। जानकारी मिलते ही विभूतिखंड थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बिना एक भी सेकंड बर्बाद किए, गंभीर रूप से घायल शिवांशी को एंबुलेंस की मदद से गोमती नगर स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (Dr. Ram Manohar Lohia Institute) के इमरजेंसी वॉर्ड में भर्ती कराया।
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डॉक्टरों के प्रारंभिक मेडिकल बुलेटिन के अनुसार, फर्श पर गिरने के कारण शिवांशी का दाहिना हाथ कई जगह से फ्रैक्चर हो गया है। इसके अलावा उसकी पसलियों (Ribs), पीठ और माथे पर भी बहुत गहरी और गंभीर चोटें आई हैं। उसके शरीर से काफी खून बह चुका था। फिलहाल उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है और डॉक्टरों की एक विशेष टीम उसकी निगरानी कर रही है। उसकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है और अगले 48 घंटे उसके जीवन के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं।
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आखिर क्यों उठाई मौत की राह? पुलिस जांच के 3 अहम एंगल
\r\n\r\nइस घटना ने राजधानी में कॉर्पोरेट कर्मचारियों के बीच काम करने के माहौल और उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 22 साल की एक युवा लड़की ने इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया? इस गुत्थी को सुलझाने के लिए एसीपी विभूतिखंड विनय कुमार द्विवेदी (ACP Vinay Kumar Dwivedi) और इंस्पेक्टर अमर सिंह भारी पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी है। पुलिस मुख्य रूप से तीन एंगल्स पर जांच कर रही है:
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1. मानसिक तनाव और बीमारी का एंगल: घटना की जानकारी मिलते ही शिवांशी की बहन बदहवास हालत में अस्पताल पहुंची। पुलिस पूछताछ में बहन ने एक अहम जानकारी दी है कि शिवांशी पिछले कुछ समय से बीमार चल रही थी। हालांकि, यह बीमारी शारीरिक थी या वह किसी गहरे मानसिक अवसाद (Depression) से गुजर रही थी, यह अभी पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस शिवांशी की मेडिकल हिस्ट्री खंगाल रही है।
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2. वर्कप्लेस स्ट्रेस (ऑफिस का दबाव): पुलिस ने वोडाफोन एडब्ल्यूएस कंपनी के अधिकारियों और शिवांशी के साथ काम करने वाले सहकर्मियों के बयान दर्ज किए हैं। टेलीकॉलिंग की नौकरी में अक्सर भारी टारगेट्स और कस्टमर्स से डील करने का अत्यधिक मानसिक दबाव होता है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या ऑफिस में उस पर किसी तरह का कोई अनुचित दबाव, बॉस की डांट या टारगेट पूरा करने का प्रेशर तो नहीं था, जिसने उसे यह कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
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3. कॉल डिटेल्स और निजी जिंदगी (CDR Investigation): पुलिस ने घटनास्थल (वॉशरूम) और शिवांशी की डेस्क से उसका बैग और मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिया है। साइबर सेल की मदद से फोन को अनलॉक कर उसकी कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR), सोशल मीडिया अकाउंट्स और व्हाट्सएप चैट्स की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाना चाहती है कि घटना से ठीक पहले उसने किससे बात की थी या क्या उसका किसी से कोई विवाद चल रहा था।
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होश में आने का इंतजार, तभी खुलेगा राज
\r\n\r\nफिलहाल, इस पूरे मामले में शिवांशी के परिजनों की तरफ से अभी तक किसी भी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ कोई लिखित शिकायत या एफआईआर (FIR) दर्ज नहीं कराई गई है। परिवार वाले अभी शिवांशी की जान बचने की दुआएं मांग रहे हैं।
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एसीपी विनय कुमार द्विवेदी का कहना है कि पुलिस हर एक पहलू को ध्यान में रखकर गहनता से जांच कर रही है। हालांकि, इस रहस्यमयी और दर्दनाक छलांग के पीछे का असली सच पूरी तरह से तभी सामने आ पाएगा, जब शिवांशी को होश आएगा और मजिस्ट्रेट के सामने उसका आधिकारिक बयान दर्ज किया जा सकेगा।
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यह घटना एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करती है कि आज के युवाओं को अपने मानसिक तनाव को साझा करने और अवसाद से लड़ने के लिए परिवार और सहकर्मियों के मजबूत साथ की कितनी सख्त जरूरत है। पूरे लखनऊ शहर की दुआएं इस वक्त शिवांशी के साथ हैं कि वह मौत को मात देकर जल्द ही स्वस्थ होकर वापस लौटे।