लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के मुख्यालय शक्ति भवन के बाहर आज (बुधवार, 26 नवंबर 2025) सुबह से ही सैकड़ों निविदा/संविदा कर्मचारी विशाल प्रदर्शन के लिए जमा हो गए। प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए इन कर्मचारियों ने अपनी ज्वलंत मांगों को लेकर सड़क पर कारपेट बिछाकर पूरा मार्ग जाम कर दिया, जिससे शक्ति भवन से जीएसटी ऑफिस की ओर जाने वाला यातायात पूरी तरह से ठप हो गया।READ ALSO:-दिल्ली BREAKING: कमला पसंद और राजश्री पान मसाला ग्रुप के मालिक की बहू ने की खुदकुशी, सुसाइड नोट में किया रिश्ते में भरोसे की कमी का ज़िक्र
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प्रदर्शनकारियों ने सरकार और विभाग के खिलाफ 'इंकलाब जिंदाबाद' और 'तानाशाही नहीं चलेगी' जैसे जोरदार नारे लगाए। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार उनकी समस्याओं की लगातार अनदेखी कर रही है।
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कम वेतन और छंटनी का खतरा: 'व्यवस्था हम संभालते हैं...'
\r\n\r\nप्रदर्शन कर रहे लखनऊ बिजली कर्मचारी प्रदर्शन (Lucknow Bijli Karmchari Pradarshan) का मुख्य कारण वेतन विसंगतियां और नौकरी से हटाए जाने का बढ़ता खतरा है। कर्मचारियों का कहना है कि आउटसोर्सिंग और निविदा आधार पर काम करने वाले कर्मचारी बेहद कम, यानी मात्र ₹10,000 से ₹11,000 की मासिक तनख्वाह पर कठिन ड्यूटी करते हैं, लेकिन अब विभाग उन्हें हटाने की तैयारी कर रहा है।
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निविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद खालिद ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "पावर कॉरपोरेशन में कमीशनखोरी की वजह से निविदा कर्मचारियों को हटाने की कवायद चल रही है।" उन्होंने आगे कहा, "प्रदेश में बिजली व्यवस्था सुधारने में सबसे ज्यादा मेहनत आउटसोर्सिंग और निविदा कर्मचारी करते हैं। सिस्टम हम संभालते हैं और सजा हमें मिल रही है। ₹11,000 की तनख्वाह पर काम करने वालों को हटाना सरासर गलत है।"
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₹18,000 न्यूनतम वेतन का आदेश, पर लागू नहीं
\r\n\r\nकर्मचारियों की एक प्रमुख मांग यह है कि उनके लिए ₹18,000 का न्यूनतम वेतन निर्धारित किया जाए, जैसा कि पहले किए गए प्रदर्शनों के बाद आश्वासन दिया गया था। प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय ने बताया कि पूर्व में हुए प्रदर्शन के बाद ₹18,000 न्यूनतम वेतन तय करने का आदेश तो जारी हुआ, लेकिन आज तक इसे लागू नहीं किया गया है।
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इसके अलावा, कर्मचारी वर्टिकल व्यवस्था को लागू करने के विरोध में भी हैं, जिसका मानना है कि इससे बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी होगी, खासकर स्मार्ट मीटर लगने की स्थिति में मीटर रीडरों का समायोजन ठीक से नहीं हो पाएगा।
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मार्ग बाधित और भारी पुलिस बल तैनात
\r\n\r\nजमकर हंगामे और मार्ग जाम की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। शक्ति भवन के बाहर भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। प्रदर्शन के कारण शक्ति भवन से जीएसटी ऑफिस की ओर जाने वाला रास्ता पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। अधिकारियों की टीमें लगातार मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को समझाने और वार्ता के माध्यम से गतिरोध खत्म करने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन कर्मचारी अपनी मांगों पर डटे हुए हैं और मांगें पूरी न होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं।
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लखनऊ बिजली कर्मचारी प्रदर्शन न केवल वेतन बल्कि नौकरी की सुरक्षा के गंभीर मुद्दे को भी उठाता है, जो उत्तर प्रदेश के बिजली क्षेत्र में एक लंबे समय से चला आ रहा विवाद है।
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लखनऊ के शक्ति भवन के बाहर निविदा बिजली कर्मचारियों का यह विशाल प्रदर्शन उनकी कम तनख्वाह, वेतन विसंगतियों और जॉब सिक्योरिटी के गंभीर मुद्दों को उजागर करता है। सड़क पर कारपेट बिछाकर किए गए इस प्रदर्शन से शहर के एक महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। ₹18,000 न्यूनतम वेतन और छंटनी रोकने की मांग को लेकर लखनऊ बिजली कर्मचारी प्रदर्शन कर रहे हैं, और पुलिस बल की मौजूदगी में अधिकारियों की कर्मचारियों से बातचीत जारी है।