खबरीलाल डेस्क

लखनऊ (Crime & Intelligence Desk):

\r\n\r\n

राजधानी लखनऊ के हाई-प्रोफाइल और पॉश इलाकों में बैठकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस्मफरोशी का काला कारोबार चलाने वाले गिरोह की मास्टरमाइंड आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गई है। उज्बेकिस्तान की रहने वाली लोला कायूमोवा, जो पिछले एक साल से पुलिस के साथ 'आंख-मिचौली' खेल रही थी, उसे लखनऊ पुलिस और खुफिया एजेंसियों की संयुक्त टीम ने मंगलवार देर रात सुशांत गोल्फ सिटी स्थित ओमेक्स आर-टू (Omaxe R-2) अपार्टमेंट से दबोच लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन
\r\n\r\n

​लोला पर आरोप है कि वह बिना किसी वैध वीजा और पासपोर्ट के भारत में अवैध रूप से रह रही थी और लखनऊ के लग्जरी अपार्टमेंट्स को अपना ठिकाना बनाकर सेक्स रैकेट संचालित कर रही थी। मामला अंतरराष्ट्रीय सीमाओं और अवैध प्रवास से जुड़ा होने के कारण पकड़ी गई लोला को आगे की पूछताछ के लिए खुफिया एजेंसियों के हवाले कर दिया गया है।

\r\n\r\n

प्लास्टिक सर्जरी कराकर बदला चेहरा, डॉक्टर की भूमिका संदिग्ध

\r\n\r\n

​पुलिस जांच में इस बात का हैरान कर देने वाला खुलासा हुआ है कि फरार रहने के दौरान लोला ने न सिर्फ अपनी लोकेशन बदली, बल्कि पुलिस की नजरों से बचने के लिए अपने चेहरे की प्लास्टिक सर्जरी (Plastic Surgery) भी करवा ली।

\r\n\r\n

 

\r\n\r\n
    \r\n
  • खूबसूरती बढ़ाने और पहचान छिपाने का खेल: लोला ने खुद को जवान दिखाने और अपनी पुरानी पहचान पूरी तरह से मिटाने के लिए प्लास्टिक सर्जरी का सहारा लिया था।
  • \r\n
  • डॉक्टर का कनेक्शन: जांच के दौरान गोमतीनगर के पत्रकारपुरम और अहिमामऊ इलाके में क्लीनिक चलाने वाले डॉ. विवेक गुप्ता का नाम सामने आया है। आरोप है कि डॉ. विवेक गुप्ता ने ही लोला और उसकी अन्य विदेशी साथियों की सुंदरता बढ़ाने और पहचान बदलने के लिए प्लास्टिक सर्जरी की थी।
  • \r\n
  • बिना कागजात ली भारी रकम: डॉक्टर ने इन विदेशी महिलाओं से बिना कोई वैध पासपोर्ट, वीजा या पहचान पत्र मांगे भारी-भरकम रकम वसूली और बिना किसी सरकारी सूचना के उनका इलाज व सर्जरी कर दी। पुलिस अब उक्त डॉक्टर की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है और उन पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी है।
  • \r\n
\r\n\r\n

थाईलैंड से शुरू हुआ जिस्मफरोशी का नेटवर्क

\r\n\r\n

​इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के भारत पहुंचने की कहानी भी बेहद चौंकाने वाली है। पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, लखनऊ का एक सर्जन डॉक्टर कुछ समय पहले थाईलैंड घूमने गया था। वहीं उसकी मुलाकात उज्बेकिस्तान की नागरिक लोला कायूमोवा से हुई।

\r\n\r\n

​इसके बाद डॉक्टर उसे भारत ले आया। भारत आने के बाद लोला ने अपने नेटवर्क का विस्तार किया और उज्बेकिस्तान से अपनी दो और सहेलियों को भारत बुला लिया। इसके बाद गोमतीनगर, हजरतगंज और सुशांत गोल्फ सिटी जैसे लग्जरी इलाकों के किराए के अपार्टमेंट्स में बेखौफ होकर यह गैंग जिस्मफरोशी का धंधा चलाने लगा।

\r\n\r\n

एफआरआरओ (FRRO) की रेड में हुआ था पहला बड़ा खुलासा

\r\n\r\n

​लोला के इस नेटवर्क का पहला सुराग कुछ समय पहले मिला था, जब फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) की टीम ने न्यू हजरतगंज स्थित एक फ्लैट पर छापेमारी की थी।

\r\n\r\n

एफआरआरओ (FRRO) की रेड में हुआ था पहला बड़ा खुलासा

\r\n\r\n

​लोला के इस नेटवर्क का पहला सुराग कुछ समय पहले मिला था, जब फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) की टीम ने न्यू हजरतगंज स्थित एक फ्लैट पर छापेमारी की थी।

\r\n\r\n
    \r\n
  • बिना दस्तावेजों के मिलीं विदेशी महिलाएं: उस छापेमारी के दौरान उज्बेकिस्तान की दो महिलाओं को पकड़ा गया था। जब पुलिस और एजेंसियों ने उनसे वीजा और पासपोर्ट मांगा, तो वे कोई भी वैध दस्तावेज पेश नहीं कर सकीं।
  • \r\n
  • गुमराह करने की कोशिश: उन महिलाओं ने दावा किया था कि 2 साल पहले उनके दस्तावेज खो गए थे, लेकिन जब पुलिस ने शिकायत की कॉपी मांगी तो वे कोई सबूत नहीं दे पाईं।
  • \r\n
  • सरगना के रूप में उभरा लोला का नाम: एफआरआरओ की कड़ाई से की गई पूछताछ में दोनों महिलाओं ने स्वीकार किया था कि इस पूरे रैकेट की मुख्य सरगना और मास्टरमाइंड लोला कायूमोवा ही है, जो उन्हें इस धंधे में लेकर आई थी। तभी से पुलिस और खुफिया एजेंसियां लोला की तलाश में जुटी हुई थीं।
  • \r\n
\r\n\r\n

स्थानीय मददगारों का नेटवर्क और 'अर्जुन राणा' की एंट्री

\r\n\r\n

​जांच में यह भी साफ हुआ है कि लोला अकेले इस बड़े नेटवर्क को अंजाम नहीं दे रही थी। स्थानीय स्तर पर उसे कई सफेदपोश और रसूखदार लोगों की मदद मिल रही थी।

\r\n\r\n
    \r\n
  • ओमेक्स आर-1 कनेक्शन: ओमेक्स आर-1 (Omaxe R-1) अपार्टमेंट में रहने वाला त्रिजिन राज उर्फ अर्जुन राणा इस सिंडिकेट का मुख्य स्थानीय मददगार था।
  • \r\n
  • लॉजिस्टिक्स और रुकने की व्यवस्था: अर्जुन राणा ही विदेशी महिलाओं के रहने, सुरक्षा, ट्रांसपोर्टेशन और ग्राहकों तक पहुंच बनाने का पूरा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क संभालता था। पुलिस अब अर्जुन राणा और गिरोह से जुड़े अन्य बिचौलियों की भी कुंडली खंगाल रही है।
  • \r\n
\r\n\r\n

खुफिया एजेंसियों के सुपुर्द; डीसीपी साउथ ने दी आधिकारिक जानकारी

\r\n\r\n

​मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब संयुक्त रूप से आगे की कार्रवाई कर रही हैं। इस गिरोह के तार किन-किन बड़े लोगों से जुड़े हैं और क्या इसके पीछे कोई मानव तस्करी (Human Trafficking) का बड़ा अंतरराष्ट्रीय रैकेट काम कर रहा है, इस बिंदु पर गहन जांच जारी है।

\r\n\r\n
\r\n

डीसीपी साउथ मोहम्मद मुस्ताक का बयान:

\r\n\r\n

"मामले में फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) और पुलिस की संयुक्त टीम कानूनी कार्रवाई कर रही है। लोला और उसके स्थानीय मददगारों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है ताकि इस सिंडिकेट के पूरे नेटवर्क को जड़ से ध्वस्त किया जा सके। अवैध रूप से रहने और फर्जीवाड़े के तहत सख्त धाराएं लगाई जा रही हैं।"

\r\n
\r\n\r\n

​फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियों को अंदेशा है कि इस पूछताछ में लखनऊ के कई अन्य बड़े नामों और अवैध रूप से रह रहे अन्य विदेशी नागरिकों के बारे में भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।