लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल (Balrampur Hospital) से चिकित्सा जगत का एक हैरान करने वाला, लेकिन राहत भरा मामला सामने आया है। यहां डॉक्टरों की एक टीम ने डेढ़ साल के एक मासूम बच्चे की पीठ पर उग आई 14 सेंटीमीटर लंबी पूंछ (Human Tail) को हटाकर उसे दर्द से मुक्ति दिलाई है। बच्चे की पूंछ की सर्जरी (Bachche Ki Poonch Ki Surgery) बेहद जटिल थी, क्योंकि यह पूंछ केवल बाहरी मांस का टुकड़ा नहीं थी, बल्कि यह बच्चे की रीढ़ की हड्डी (Spinal Cord) की गहराई से जुड़ी हुई थी।READ ALSO:-मेरठ में घर का सपना होगा पूरा: MDA नीलाम करेगा 974 प्लॉट, नमो भारत ट्रेन के पास जमीन खरीदने का मौका
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इस सफल ऑपरेशन के बाद बच्चे की हालत में अब तेजी से सुधार हो रहा है और उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी मिल जाएगी। इस दुर्लभ सर्जरी की चर्चा पूरे शहर में हो रही है।
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रीढ़ की गहराई से जुड़ी थी 14 सेमी लंबी पूंछ
\r\n\r\nबलरामपुर अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक, बच्चे को जन्म से ही पीठ के निचले हिस्से में एक उभार था, जो समय के साथ एक पूंछ की शक्ल ले चुका था। मेडिकल भाषा में इसे 'ह्यूमन टेल' या 'सूडो टेल' (Pseudo Tail) कहा जा सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि यह पूंछ 14 सेंटीमीटर तक लंबी हो गई थी और इसमें संवेदना (Sensation) भी थी।
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बच्चे की पूंछ की सर्जरी करने वाले वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने बताया कि यह पूंछ रीढ़ की हड्डियों (वर्टिब्रा) के बीच स्पाइनल कॉर्ड की झिल्लियों से गहराई से जुड़ी हुई थी। इस वजह से बच्चे को लेटने, करवट बदलने और यहां तक कि चलने की कोशिश करने पर भी असहनीय दर्द होता था। पूंछ में खिंचाव होने पर बच्चा रोने लगता था।
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डेढ़ घंटे चला जटिल ऑपरेशन
\r\n\r\nबच्चे की तकलीफ को देखते हुए डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी का फैसला किया। हालांकि, यह फैसला आसान नहीं था। पूंछ का कनेक्शन स्पाइनल कॉर्ड के संवेदनशील हिस्से से होने के कारण जरा सी चूक बच्चे को हमेशा के लिए अपंग बना सकती थी।
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गुरुवार को बच्चे को भर्ती करने के बाद एमआरआई (MRI) और अन्य जरूरी जांचें की गईं। अगले दिन, शुक्रवार को डॉ. अखिलेश कुमार और उनकी टीम ने लगभग डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद बच्चे की पूंछ की सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। डॉक्टरों ने बेहद एहतियात बरतते हुए स्पाइन को नुकसान पहुंचाए बिना पूंछ को जड़ से अलग किया।
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अंधविश्वास और भ्रम में फंसा था परिवार
\r\n\r\nअक्सर भारत में ऐसे मामलों को लोग चमत्कार या 'हनुमान जी का अवतार' मानकर इलाज से बचते हैं, या फिर झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ जाते हैं। इस मामले में भी परिजनों के मन में कई तरह के भ्रम थे।
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डॉक्टरों ने सबसे पहले माता-पिता की काउंसिलिंग की और उन्हें समझाया कि यह कोई दैवीय चमत्कार नहीं, बल्कि एक मेडिकल कंडिशन (विकृति) है, जिसे 'स्पाइना बिफिडा ऑक्ल्टा' (Spina Bifida Occulta) से जोड़कर देखा जा सकता है। अगर समय रहते बच्चे की पूंछ की सर्जरी नहीं की गई, तो भविष्य में बच्चे को गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। काउंसिलिंग के बाद परिजन ऑपरेशन के लिए राजी हुए।
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स्थानीय डॉक्टरों ने खड़े कर दिए थे हाथ
\r\n\r\nबच्चे के पिता सुशील कुमार ने बताया कि वे अपने बेटे की तकलीफ को लेकर बेहद परेशान थे। उन्होंने अपने क्षेत्र के कई निजी अस्पतालों और स्थानीय डॉक्टरों से संपर्क किया, लेकिन मामला इतना जटिल था कि किसी ने भी ऑपरेशन करने की हिम्मत नहीं जुटाई। हर जगह से निराश होने के बाद वे लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी (OPD) में पहुंचे।
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यहां अस्पताल की निदेशक डॉ. कविता आर्या और सर्जन डॉ. अखिलेश कुमार ने केस की गंभीरता को समझा और चुनौती स्वीकार की। आखिरकार, सरकारी अस्पताल में हुई इस बच्चे की पूंछ की सर्जरी ने साबित कर दिया कि यहां की चिकित्सा सुविधाएं किसी कॉर्पोरेट अस्पताल से कम नहीं हैं।
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डॉक्टरों की इस टीम ने किया कमाल
\r\n\r\nइस दुर्लभ और सफल सर्जरी का श्रेय बलरामपुर अस्पताल की पूरी टीम को जाता है।
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- \r\n सर्जन: डॉ. अखिलेश कुमार (पीडियाट्रिक सर्जन)\r\n \r\n
- \r\n एनेस्थीसिया टीम: डॉ. एस.ए. मिर्जा, डॉ. एम.पी. सिंह\r\n \r\n
- \r\n नर्सिंग स्टाफ: निर्मला मिश्रा, अंजना सिंह\r\n \r\n
- \r\n सहयोगी: डॉ. मनीष वर्मा (इंटर्न) और वार्ड ब्यॉय राजू\r\n \r\n
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सर्जरी के बाद बच्चे को कुछ दिन आईसीयू (ICU) में निगरानी में रखा गया था। अब वह पूरी तरह खतरे से बाहर है।
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लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल में हुई बच्चे की पूंछ की सर्जरी न केवल चिकित्सा विज्ञान की जीत है, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक सबक है जो शारीरिक विकृतियों को अंधविश्वास से जोड़ते हैं। 14 सेमी लंबी पूंछ से मुक्ति पाने के बाद अब यह बच्चा एक सामान्य और दर्द-मुक्त जीवन जी सकेगा। डॉक्टरों की सूझबूझ ने एक मासूम को नया जीवन दिया है।