खबरीलाल डेस्क
Lucknow bike accident: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) से एक दिल दहला देने वाली और समाज को सोचने पर मजबूर कर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के पॉश इलाके गोमती नगर विस्तार में स्थित जनेश्वर मिश्र पार्क (Janeshwar Mishra Park) के पास रफ्तार के जुनून और स्टंटबाजी ने एक और मासूम की जान ले ली है। रविवार सुबह बुलेट और कावासाकी (Kawasaki) बाइक से रेस लगा रहे 12वीं कक्षा के एक 17 वर्षीय छात्र की सड़क हादसे में दर्दनाक मौत हो गई।READ ALSO:-सर्राफा बाजार में भूचाल: ऑल टाइम हाई से औंधे मुंह गिरा सोना-चांदी, जानिए ग्लोबल टेंशन के बीच क्यों क्रैश हो रहे हैं दाम?
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इस घटना ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया है, बल्कि राजधानी की सड़कों पर बेलगाम दौड़ते युवाओं और पुलिस प्रशासन की लचर व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस विस्तृत रिपोर्ट में हम इस खौफनाक Lucknow bike accident की पूरी टाइमलाइन, सोशल मीडिया के घातक क्रेज, पुलिस की कार्रवाई और सड़क सुरक्षा से जुड़े अहम पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करेंगे।
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 तस्वीर में एक स्कूटी बुलेट से टकराते हुए दिख रही है।

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लखनऊ में रफ्तार का कहर: जनेश्वर मिश्र पार्क के पास हुआ हादसा

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यह घटना रविवार सुबह की है। राजधानी लखनऊ के गोमती नगर विस्तार इलाके में जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नंबर-5 के सामने की चौड़ी और वीआईपी सड़क अक्सर युवाओं के लिए रेसिंग ट्रैक बन जाती है। यहीं पर एक खौफनाक Lucknow bike accident हुआ, जिसने सबको दहला दिया।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार, गोमती नगर विस्तार के विशेष खंड का रहने वाला 17 वर्षीय नैतिक कुमार अपने दो दोस्तों—आदित्य श्रीवास्तव और कृष्ण सिंह—के साथ रविवार सुबह घूमने के लिए निकला था। तीनों दोस्त अलग-अलग महंगी और भारी इंजनों वाली स्पोर्ट्स बाइकों पर सवार थे। नैतिक अपनी रॉयल एनफील्ड बुलेट (Bullet) चला रहा था, जबकि उसका दोस्त आदित्य हाई-स्पीड कावासाकी (Kawasaki) बाइक पर था।
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सुबह करीब साढ़े सात बजे, जब सड़कों पर ट्रैफिक कम होता है, तीनों दोस्तों ने अपनी-अपनी बाइक से रेस लगानी शुरू कर दी। रफ्तार का यह खेल तब मौत के खेल में बदल गया, जब 100 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से दौड़ रही नैतिक की बुलेट के सामने अचानक एक स्कूटी आ गई।
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कौन था नैतिक कुमार और कैसे घटी यह दर्दनाक घटना?

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मृतक की पहचान गोमती नगर विस्तार (विशेष खंड) के निवासी नैतिक कुमार (17 वर्ष) के रूप में हुई है। नैतिक शहर के एक प्रतिष्ठित स्कूल में 12वीं कक्षा का छात्र था। उसके पिता राम इकबाल उत्तर प्रदेश बिजली विभाग में एक सम्मानित इंजीनियर हैं।
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चश्मदीदों के मुताबिक, जब ये तीनों युवक गेट नंबर-5 के पास रेस लगा रहे थे, तभी एक अज्ञात स्कूटी सवार अचानक उनके सामने आ गया। रफ्तार इतनी तेज थी कि नैतिक को ब्रेक मारने या अपनी बुलेट को मोड़ने का जरा भी मौका नहीं मिला। खुद को और स्कूटी सवार को बचाने के प्रयास में नैतिक की बुलेट का संतुलन बिगड़ गया। बुलेट पहले स्कूटी से जोर से टकराई और फिर अनियंत्रित होकर सड़क के बीचों-बीच बने भारी-भरकम डिवाइडर से जा भिड़ी।
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टक्कर इतनी भयंकर थी कि नैतिक बाइक से करीब हवा में उछल गया और सीधे डिवाइडर से जा टकराया। हेलमेट के बावजूद (या हेलमेट न पहनने की स्थिति में) उसके सिर में बेहद गंभीर और जानलेवा चोटें आईं। खून से लथपथ नैतिक वहीं सड़क पर अचेत हो गया। नैतिक के ठीक पीछे कावासाकी चला रहा उसका दोस्त आदित्य भी बेकाबू होकर सड़क पर गिर गया, और तीसरा दोस्त कृष्ण भी दुर्घटना का शिकार होकर फिसल गया।
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'एक पल में सब खत्म हो गया': एम्बुलेंस में वीडियो बनाने पर फूटा लोगों का गुस्सा

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हादसे के तुरंत बाद आसपास सुबह की सैर (Morning Walk) के लिए आए लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों की मदद से खून से लथपथ नैतिक और उसके घायल दोस्तों को तुरंत एम्बुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद नैतिक को मृत घोषित कर दिया। उसके सिर की चोटें इतनी गहरी थीं कि अत्यधिक रक्तस्राव (Heavy Bleeding) के कारण उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। अन्य दोनों दोस्तों, आदित्य और कृष्ण को हल्की चोटें आई थीं, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
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लेकिन इस Lucknow bike accident का सबसे हैरान करने वाला और संवेदनहीन पहलू अस्पताल ले जाते वक्त सामने आया। जब नैतिक एम्बुलेंस में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा था, तब उसका दोस्त आदित्य (जिसे हल्की चोटें आई थीं) अपने मोबाइल से एम्बुलेंस के अंदर का वीडियो बना रहा था।
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नैतिक की मौत की पुष्टि होने के बाद, आदित्य ने वह वीडियो सोशल मीडिया (इंस्टाग्राम/स्नैपचैट) पर पोस्ट कर दिया और कैप्शन लिखा- 'एक पल में सब खत्म हो गया।' यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई। इस घटना ने सोशल मीडिया यूजर्स में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आज की युवा पीढ़ी इतनी संवेदनहीन कैसे हो सकती है कि एक तरफ उनका जिगरी दोस्त दम तोड़ रहा है, और दूसरी तरफ वे सोशल मीडिया पर 'सिम्पैथी' (Sympathy) या व्यूज बटोरने के लिए रील और वीडियो बनाने में व्यस्त हैं।
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परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल, पोस्टमार्टम कराने से किया इनकार
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जैसे ही इस दर्दनाक हादसे की खबर नैतिक के परिवार वालों को मिली, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। गोमती नगर विस्तार स्थित उनके आवास पर चीख-पुकार मच गई। इकलौते बेटे या परिवार के लाडले की इस तरह अचानक मौत से पिता राम इकबाल और नैतिक की मां गहरे सदमे में हैं।
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घटना की सूचना पाकर गोमती नगर विस्तार थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचायतनामा (Inquest) की कार्रवाई शुरू की और शव को पोस्टमार्टम (Post-mortem) के लिए भिजवाने की तैयारी की। हालांकि, परिजनों ने भारी मन से पुलिस से आग्रह किया कि वे अपने बेटे के शव का चीर-फाड़ (पोस्टमार्टम) नहीं कराना चाहते।
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पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने परिवार की भावनाओं का सम्मान करते हुए, और घटना के स्पष्ट होने के कारण (सड़क दुर्घटना), कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया। इसके बाद गमगीन माहौल में परिजन नैतिक का शव लेकर अपने पैतृक गांव बाराबंकी (Barabanki) चले गए, जहां उसका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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पुलिस की जांच और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज का सहारा

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इस हाई-प्रोफाइल Lucknow bike accident के बाद पुलिस महकमा भी हरकत में आ गया है। गोमती नगर विस्तार थाना प्रभारी (SHO) सुधीर अवस्थी ने घटना की आधिकारिक पुष्टि करते हुए बताया कि पुलिस मामले की हर एंगल से जांच कर रही है।
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थाना प्रभारी के अनुसार:

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    सीसीटीवी फुटेज की जांच: घटना की असली वजह, बाइकों की वास्तविक रफ्तार, और उस अज्ञात स्कूटी सवार की पहचान करने के लिए जनेश्वर मिश्र पार्क के गेट नंबर-5 और आसपास के चौराहों पर लगे स्मार्ट सिटी (Smart City) के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है।
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    कावासाकी बाइक का कैमरा: पुलिस ने यह भी बताया कि रेसिंग के दौरान आदित्य की कावासाकी बाइक पर संभवतः एक एक्शन कैमरा (GoPro) लगा हुआ था, जिसमें पूरी घटना रिकॉर्ड होने की संभावना है। पुलिस उस कैमरे और वीडियो फुटेज को भी साक्ष्य के तौर पर कब्जे में ले रही है।
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    स्कूटी सवार की तलाश: पुलिस उस स्कूटी सवार की भी तलाश कर रही है जिससे टकराकर यह हादसा हुआ, ताकि दुर्घटना का सटीक अनुक्रम (Sequence of events) स्थापित किया जा सके।
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गोमती नगर विस्तार: स्टंटबाजी और रीलबाजी का नया अड्डा

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यह कोई पहला मौका नहीं है जब गोमती नगर विस्तार और जनेश्वर मिश्र पार्क के आसपास इस तरह का जानलेवा हादसा हुआ हो। लखनऊ का यह नव-विकसित और वीआईपी इलाका, जहां चौड़ी और चिकनी सड़कें हैं, अब युवाओं के लिए अवैध रेसिंग और 'स्टंटबाजी' का हब बन चुका है।
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खासकर जी-20 रोड (G-20 Road), जनेश्वर मिश्र पार्क के चारों ओर की सड़कें, और मरीन ड्राइव (Marine Drive) का इलाका देर रात और अलसुबह सुपरबाइक्स और मॉडिफाइड कारों के शोर से गूंजता रहता है। युवा यहां बिना हेलमेट के, खतरनाक स्पीड में बाइक दौड़ाते हैं, 'व्हीली' (Wheeling) करते हैं, और अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स (Instagram/YouTube) के लिए रील बनाते हैं। पुलिस की गश्त के बावजूद, ये स्टंटबाज अक्सर पुलिस को चकमा देकर निकल जाते हैं।
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फ्लैशबैक: जब एएसपी श्वेता श्रीवास्तव के 9 वर्षीय बेटे नामिश ने गवाई थी जान

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इस ताजा Lucknow bike accident ने लखनऊ वासियों के जेहन में एक साल पुराने उस खौफनाक हादसे की यादें ताजा कर दी हैं, जिसने पूरे पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया था।
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21 नवंबर 2023 का वह काला दिन: उत्तर प्रदेश पुलिस की एएसपी (ASP) श्वेता श्रीवास्तव का 9 साल का इकलौता बेटा नामिश सुबह-सुबह अपने घर से स्केटिंग (Skating) की प्रैक्टिस करने के लिए निकला था। उसके साथ खुद उसकी मां श्वेता श्रीवास्तव और एक प्रोफेशनल ट्रेनर भी मौजूद थे। गोमती नगर विस्तार की उसी जी-20 रोड (G-20 Road) पर जब नामिश अपने कोच के साथ स्केटिंग की प्रैक्टिस कर रहा था, तभी एक बेहद तेज रफ्तार सफेद रंग की एसयूवी कार ने उसे पीछे से जोरदार टक्कर मार दी।
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टक्कर इतनी भीषण थी कि 9 साल का मासूम नामिश हवा में करीब 15 फीट तक उछल गया और धड़ाम से सड़क पर गिरा। उसके सिर और पेट में गंभीर अंदरूनी चोटें आईं और नाक-मुंह से खून बहने लगा। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पुलिस ने एक बड़ा अभियान चलाया था, दो आरोपियों को गिरफ्तार किया था, लेकिन कुछ ही महीनों बाद हालात फिर से जस के तस हो गए। नैतिक की मौत यह साबित करती है कि हमने उस दर्दनाक घटना से कोई सबक नहीं लिया।
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युवाओं में सोशल मीडिया 'रील्स' (Reels) का बढ़ता खतरनाक क्रेज

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आजकल के युवाओं में महंगी बाइक और 'स्टंटबाजी' का शौक सिर्फ रोमांच के लिए नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर 'फेमस' (Famous) होने की अंधी दौड़ के लिए भी है।
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मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि 'रील कल्चर' (Reel Culture) ने युवाओं के दिमाग पर गहरा मनोवैज्ञानिक असर डाला है।
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    डोपामाइन की लत: वीडियो पर मिलने वाले लाइक्स (Likes), कमेंट्स और शेयर्स युवाओं के दिमाग में 'डोपामाइन' (Dopamine) रिलीज करते हैं, जिससे उन्हें और अधिक खतरनाक स्टंट करने की प्रेरणा मिलती है।
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    पीयर प्रेशर (Peer Pressure): दोस्तों के बीच खुद को 'कूल' (Cool) साबित करने का दबाव। अगर एक दोस्त कावासाकी चला रहा है, तो दूसरा भी अपनी बुलेट को उसी रफ्तार से दौड़ाने की कोशिश करता है, भले ही दोनों बाइकों के डायनामिक्स (Dynamics) और ब्रेकिंग सिस्टम में जमीन-आसमान का फर्क हो।
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    खौफ का खत्म होना: वर्चु्अल दुनिया के नायकों को देखकर युवाओं को लगने लगा है कि वे भी फिल्मों की तरह सड़क दुर्घटनाओं से बच निकलेंगे, लेकिन असल जिंदगी में 'रीटेक' (Retake) का कोई मौका नहीं होता।
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अभिभावकों की जिम्मेदारी: क्या हम अपने बच्चों को मौत के मुंह में धकेल रहे हैं?

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नैतिक की मौत के बाद समाज का एक बड़ा वर्ग माता-पिता और अभिभावकों की भूमिका पर भी सवाल उठा रहा है। 17 वर्ष की उम्र, जो कि भारत में कानूनी तौर पर मोटर वाहन चलाने की वैध उम्र (18 वर्ष) से कम है, में बच्चों को इतनी भारी और पावरफुल बाइक (जैसे बुलेट) सौंप देना कहां तक उचित है?
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अभिभावकों के लिए कड़वे सवाल:

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    अंडरएज ड्राइविंग (Underage Driving): मोटर वाहन अधिनियम के तहत 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को गियर वाला वाहन चलाने की अनुमति नहीं है। फिर माता-पिता खुद अपने बच्चों को ऐसी बाइक की चाबी क्यों सौंपते हैं?
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    महंगी बाइकों की मांग: अक्सर देखा जाता है कि बच्चे जिद करते हैं और माता-पिता प्यार में या समाज में अपना 'स्टेटस' (Status) दिखाने के लिए उन्हें महंगी और हाई-स्पीड बाइक (जैसे कावासाकी, केटीएम आदि) दिला देते हैं।
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    निगरानी का अभाव: बच्चे सुबह 7 बजे बाइक लेकर कहां जा रहे हैं, किसके साथ जा रहे हैं, क्या वे हेलमेट पहन रहे हैं? इन सब बातों की निगरानी करना अभिभावकों का प्राथमिक कर्तव्य है।
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मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicle Act) और पुलिस की विफलताएं

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इस Lucknow bike accident ने लखनऊ पुलिस के चेकिंग अभियानों की पोल खोल कर रख दी है। पुलिस का हमेशा से दावा रहा है कि गोमती नगर विस्तार, जनेश्वर मिश्र पार्क और 1090 चौराहे के पास लगातार 'एंटी-रोमियो' और 'एंटी-स्टंट' (Anti-stunt) चेकिंग अभियान चलाए जाते हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से कोसों दूर है।
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पुलिस की विफलता के मुख्य बिंदु:

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    लगातार मॉनिटरिंग की कमी: पुलिस केवल किसी बड़े हादसे के बाद 2-4 दिन के लिए चेकिंग अभियान चलाती है (Knee-jerk reaction), उसके बाद हालात फिर सामान्य हो जाते हैं।
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    अंडरएज ड्राइविंग पर नरमी: अक्सर रसूखदार परिवारों के बच्चों को पुलिस पकड़ने के बाद मामूली हिदायत देकर या रसूखदारों के फोन आने पर छोड़ देती है।
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    मोटर व्हीकल एक्ट का सख्त पालन न होना: नए मोटर वाहन अधिनियम की धारा 199A के तहत, यदि कोई नाबालिग (Juvenile) मोटर वाहन अपराध करता है, तो वाहन के मालिक या अभिभावक को दोषी माना जाएगा। इसमें 25,000 रुपये का जुर्माना और 3 साल तक की जेल का प्रावधान है। साथ ही वाहन का रजिस्ट्रेशन 1 साल के लिए रद्द हो सकता है। यदि लखनऊ पुलिस इस कानून का सख्ती से पालन शुरू कर दे, तो शायद कोई भी पिता अपने नाबालिग बेटे को बाइक की चाबी देने से पहले सौ बार सोचेगा।
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सड़क सुरक्षा: लखनऊ पुलिस और प्रशासन को उठाने होंगे ये 5 सख्त कदम

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लखनऊ की सड़कों को मौत का कुआं बनने से रोकने के लिए प्रशासन को तत्काल प्रभाव से कुछ कठोर और दीर्घकालिक कदम उठाने की आवश्यकता है:
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    स्पीड रडार और ऑटोमैटिक चालान: जनेश्वर मिश्र पार्क, जी-20 रोड और मरीन ड्राइव जैसी चौड़ी सड़कों पर हाई-टेक स्पीड रडार कैमरे (Speed Radar Cameras) लगाए जाने चाहिए जो ओवरस्पीडिंग करने वाले वाहनों का स्वतः ई-चालान (E-Challan) काट दें।
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    जिगजैग बैरिकेडिंग (Zig-zag Barricading): अलसुबह और देर रात के समय इन संवेदनशील सड़कों पर पुलिस को जिगजैग तरीके से बैरिकेड्स लगाने चाहिए ताकि कोई भी रेस लगाने के लिए लंबी खाली सड़क न पा सके।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    स्पेशल स्टंट टास्क फोर्स: दिल्ली पुलिस की तर्ज पर लखनऊ पुलिस को भी एक 'एंटी-स्टंट टास्क फोर्स' का गठन करना चाहिए, जो विशेष रूप से सोशल मीडिया पर नजर रखे और स्टंट के वीडियो वायरल होने पर घर जाकर बाइक सीज करे।
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    अभिभावकों पर एफआईआर (FIR): नाबालिगों के पकड़े जाने पर केवल चालान न काटा जाए, बल्कि नए एमवी एक्ट के तहत सीधे वाहन मालिक (अभिभावक) पर एफआईआर दर्ज की जाए।
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  9. \r\n
    जागरूकता अभियान: स्कूलों और कॉलेजों में जाकर युवाओं को रफ्तार के खतरों के बारे में जागरूक किया जाए और नामिश या नैतिक जैसे दर्दनाक हादसों के केस स्टडी दिखाए जाएं।
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अंततः, लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क के पास हुआ यह Lucknow bike accident हम सभी के लिए एक गंभीर चेतावनी है। नैतिक कुमार की मौत केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है; यह एक 'सिस्टमेटिक फेल्योर' (Systematic Failure) है। यह विफलता है उस समाज की जो 'रील्स' को हकीकत मान बैठा है, उन माता-पिता की जो बच्चों की गलत जिदों के आगे घुटने टेक देते हैं, और उस पुलिस प्रशासन की जो सड़कों पर अनुशासन कायम रखने में नाकाम साबित हो रही है।
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'एक पल में सब खत्म हो गया'—यह केवल एक वायरल वीडियो का कैप्शन नहीं है, बल्कि यह उस क्रूर सत्य का आईना है जो रफ्तार के हर दीवाने को देखना चाहिए। जब तक युवा यह नहीं समझेंगे कि सड़क कोई रेसिंग ट्रैक नहीं है, और अभिभावक अपने बच्चों को अनुशासन का पाठ नहीं पढ़ाएंगे, तब तक ऐसी दुखद खबरें अखबारों के पन्ने रंगती रहेंगी। उम्मीद है कि इस दर्दनाक घटना से लखनऊ पुलिस और शहर के नागरिक एक कड़ा सबक लेंगे और सड़क सुरक्षा (Road Safety) को सर्वोच्च प्राथमिकता देंगे, ताकि भविष्य में कोई और 'नैतिक' या 'नामिश' रफ्तार की इस अंधी दौड़ की भेंट न चढ़े।