खबरीलाल डेस्क
लखनऊ: प्यार, जुनून, धोखा और फिर एक खौफनाक मौत। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के आलमनगर (Alamnagar) इलाके में शनिवार की दोपहर जो हुआ, उसने देखने वालों की रूह कंपा दी। एक 40 साल का शादीशुदा मर्द और उसकी 25 साल की कुंवारी प्रेमिका। दोनों ने जिंदगी की उलझनों को सुलझाने के बजाय मौत का रास्ता चुना।READ ALSO:-Meerut Kapsad Murder Case: रुड़की स्टेशन पर 'द एंड' हुआ पारस सोम का खेल, 3 दिन, 4 शहर और एक कॉल ने ऐसे पहुंचाया सलाखों के पीछे
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हाथों में हाथ डालकर नहीं, बल्कि ट्रेन की पटरी पर अपनी गर्दन रखकर दोनों ने अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। यह घटना जितनी दर्दनाक है, उससे कहीं ज्यादा पेचीदा है इसके पीछे की कहानी। घटनास्थल से मिले सुसाइड नोट्स (Suicide Notes) ने इस मामले को और भी भावुक और रहस्यमयी बना दिया है। दीपाली ने अपने प्रेमी सूर्यकांत को अपना 'कान्हा' (भगवान कृष्ण) बताया, तो वहीं मरने से पहले सूर्यकांत ने अपनी पत्नी से माफी मांगते हुए उसे ही अपना 'पहला प्यार' बताया।
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'खबरीलाल' आपके लिए लाया है इस घटना की 360-डिग्री विस्तृत रिपोर्ट, जिसमें हम आपको बताएंगे कि आखिर उस दोपहर क्या हुआ था और कैसे एक हंसता-खेलता परिवार इस त्रासदी का शिकार हो गया।
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शनिवार, दोपहर 1:45 बजे: मौत की वो 'वंदे भारत' एक्सप्रेस

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घटना आलमनगर रेलवे स्टेशन के पास जलालपुर फाटक (Jalalpur Crossing) की है। शनिवार का दिन था, स्टेशन पर रोज जैसी ही चहल-पहल थी।
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प्रत्यक्षदर्शी का आँखों देखा हाल: राजाजीपुरम डी-ब्लॉक के रहने वाले विकास कुमार, जो घटना के वक्त वहीं मौजूद थे, ने पुलिस को बताया कि यह जोड़ा अचानक वहां नहीं आया था।
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    "वे दोनों करीब ढाई घंटे (2.5 Hours) से स्टेशन और ट्रैक के आसपास टहल रहे थे। उनके चेहरों पर एक अजीब सी बेचैनी थी। वे आपस में बातें करते, फिर चुप हो जाते। उनके पास बैग भी थे, जैसे वे कहीं जाने की तैयारी में हों।"
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दोपहर के करीब 1 बजकर 45 मिनट का वक्त था। पटरियों में कंपन शुरू हुआ और दूर से 'वंदे भारत एक्सप्रेस' (Vande Bharat Express) के आने का सिग्नल हुआ। ट्रेन अपनी पूरी रफ़्तार में स्टेशन की तरफ बढ़ रही थी।
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जैसे ही ट्रेन करीब आई, सूर्यकांत और दीपाली ने आव देखा न ताव, वे दौड़कर ट्रैक पर पहुंचे। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या उन्हें रोक पाता, दोनों ने पटरी के ऊपर अपनी गर्दन रख दी। लोको पायलट ने हॉर्न बजाया, लोगों ने शोर मचाया, लेकिन वे टस से मस नहीं हुए।
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अगले ही पल, ट्रेन उनके ऊपर से गुजर गई। मंजर इतना वीभत्स था कि देखने वालों ने अपनी आंखें बंद कर लीं। दीपाली का सिर धड़ से कटकर दूर जा गिरा, वहीं सूर्यकांत का सिर और दोनों हाथ शरीर से अलग हो गए। मौके पर ही दोनों की दर्दनाक मौत हो गई।
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पहचान और 'सिंदूर' का राज: सुहागन बनकर मरी दीपाली

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जीआरपी (GRP) और तालकटोरा पुलिस जब मौके पर पहुंची, तो शव क्षत-विक्षत हालत में थे। पुलिस ने जब जांच शुरू की, तो कई चौंकाने वाली चीजें सामने आईं।
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    पहचान: मृतक की पहचान सूर्यकांत (40) निवासी नीलमथा और युवती की पहचान दीपाली (25) निवासी शाहखेड़ा, अर्जुनगंज के रूप में हुई।
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    दीपाली की मांग में सिंदूर: दीपाली कुंवारी थी, लेकिन मरने के वक्त उसकी मांग में गहरा सिंदूर भरा हुआ था। पुलिस का मानना है कि सुसाइड से ठीक पहले या भागने के दौरान दोनों ने मंदिर में या खुद से शादी कर ली थी। वह सुहागन बनकर दुनिया से जाना चाहती थी।
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सामान की बरामदगी: घटनास्थल से पुलिस को दो भारी बैग मिले, जिनमें कई जोड़ी कपड़े थे। इसके अलावा:
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    दो मोबाइल फोन।
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    आधार कार्ड (जिससे पहचान हुई)।
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    कुछ दस्तावेज और नकद रुपये।
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    दो अलग-अलग सुसाइड नोट।
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सुसाइड नोट: "मम्मी-पापा माफ करना, मुझे कान्हा मिल गया"

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इस पूरी घटना का सबसे भावुक पहलू वे दो चिट्ठियां हैं जो पुलिस को मिलीं। इन चिट्ठियों में दोनों ने अपने दिल का आखिरी हाल बयां किया।
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दीपाली का खत (Deepali's Note): दीपाली ने अपने माता-पिता के नाम लिखे भावुक पत्र में अपनी मजबूरी और अपने इश्क का इजहार किया। उसने लिखा:
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"मम्मी-पापा मुझे माफ कर देना। मैं आप लोगों को हर्ट (दुखी) नहीं करना चाहती थी, लेकिन मैं मजबूर थी। मुझे मेरा 'कान्हा' (सूर्यकांत) मिल गया है। मैं उनके बिना नहीं जी सकती। मैं जा रही हूँ।" उसने सूर्यकांत को अपना भगवान, अपना सबकुछ मान लिया था।
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सूर्यकांत का खत (Suryakant's Note): वहीं, 40 वर्षीय सूर्यकांत, जो पहले से शादीशुदा था और एक बच्चे का पिता था, उसने अपनी पत्नी सविता के लिए एक अजीब कशमकश वाला संदेश छोड़ा। उसने लिखा:
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"सविता, मुझे माफ कर देना। मैंने तुम्हारे साथ गलत किया। लेकिन सच यही है कि मेरा पहला प्यार तुम ही हो और हमेशा रहोगी।"
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यह लाइन मनोवैज्ञानिकों के लिए भी एक पहेली है। एक तरफ वह अपनी प्रेमिका के साथ जान दे रहा था, और दूसरी तरफ अपनी पत्नी को अपना पहला प्यार बता रहा था। शायद यह अपराधबोध (Guilt) था जो उसे अंदर ही अंदर खाए जा रहा था।
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लव स्टोरी का फ्लैशबैक: ऑफिस, अफेयर और 15 साल का फासला

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पुलिस की शुरूआती जांच में पता चला है कि यह प्रेम कहानी सदर (Sadar) स्थित एक ऑफिस में शुरू हुई थी।
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    दफ्तर का रोमांस: सूर्यकांत और दीपाली दोनों सदर के एक ही ऑफिस में काम करते थे। साथ काम करते-करते दोनों में नजदीकियां बढ़ीं।
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    उम्र का अंतर: सूर्यकांत 40 साल का परिपक्व मर्द था, जबकि दीपाली 25 साल की युवा लड़की। 15 साल का यह फासला उनके प्यार के आड़े नहीं आया।
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    सूर्यकांत का अतीत: सूर्यकांत की शादी 10 साल पहले सविता से हुई थी। यह भी एक लव मैरिज थी। दोनों का 3 साल तक अफेयर चला था, जिसके बाद परिवार की रजामंदी से शादी हुई थी। उनका 7 साल का एक बेटा कृष्णकांत (उर्फ अरमान) भी है।
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इसके बावजूद, सूर्यकांत दीपाली के प्यार में पड़ गया। शायद रोजमर्रा की जिंदगी की नीरसता या कुछ नया पाने की चाहत उसे इस मोड़ पर ले आई।
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आखिरी 3 दिन: 'अंसल सिटी' में साथ रहे, पत्नी को मायके भेजा

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आत्महत्या से पहले के 72 घंटे बेहद अहम थे। पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि दोनों ने पूरी प्लानिंग के साथ यह कदम उठाया था।
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    8 जनवरी (साजिश की शुरुआत): सूर्यकांत ने सबसे पहले अपने रास्ते के 'कांटे' यानी अपनी पत्नी और बच्चे को हटाया। वह 8 जनवरी को अपनी पत्नी सविता और बेटे को निशातगंज स्थित उसकी ससुराल (मायके) छोड़ आया। उसने बहाना बनाया कि उसे ऑफिस के काम से बाहर जाना है।
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    फरारी: इसके बाद सूर्यकांत और दीपाली 3 दिन पहले अपने-अपने घरों से गायब हो गए।
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    लिव-इन (Live-in): दोनों ने लखनऊ के पॉश इलाके अंसल सिटी (Ansal City) में एक कमरा किराए पर लिया।
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      जांच में पता चला कि सूर्यकांत ने कमरे का किराया एडवांस में दिया था।
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      ये तीन दिन वे पति-पत्नी की तरह साथ रहे। शायद यही वह वक्त था जब दीपाली ने अपनी मांग में सिंदूर भरा और उन्होंने शादी की रस्में निभाईं।
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    बैग में कपड़े: उनके बैग में मिले ढेर सारे कपड़े यह इशारा करते हैं कि उनका प्लान कहीं दूर भागकर नई जिंदगी शुरू करने का था। वे आलमनगर स्टेशन भी ट्रेन पकड़ने ही आए थे। लेकिन फिर अचानक ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने ट्रेन पकड़ने के बजाय ट्रेन के नीचे आने का फैसला किया? यह अभी भी एक राज है। क्या उन्हें पकड़े जाने का डर था? या लोक-लाज का खौफ?
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पुलिस एक्शन और परिवार का हाल

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घटना के बाद दोनों परिवारों में कोहराम मचा हुआ है।
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    गुमशुदगी दर्ज थी: दीपाली के परिजनों ने गुरुवार को ही सुशांत गोल्फ सिटी थाने (Sushant Golf City Thana) में उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इंस्पेक्टर राजीव रंजन उपाध्याय के मुताबिक, पुलिस की दो टीमें सर्विलांस के जरिए उनकी तलाश कर रही थीं। लोकेशन ट्रेस की जा रही थी, लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही मौत उन तक पहुंच गई।
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    पत्नी सविता का बुरा हाल: सूर्यकांत की पत्नी सविता, जो घर पर सिलाई का काम करके गृहस्थी में हाथ बंटाती थी, उसे जब इस खबर का पता चला तो वह बेसुध हो गई। उसे विश्वास ही नहीं हो रहा कि जिस पति ने 10 साल पहले उससे लव मैरिज की थी, वह किसी और के लिए उसे और उनके 7 साल के बेटे को अनाथ छोड़ गया। वह बार-बार सूर्यकांत के आखिरी खत की रट लगाए बैठी है—"अगर मैं पहला प्यार थी, तो मुझे क्यों छोड़ा?"
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अधिकारियों का बयान: एडीसीपी (ADCP) धनंजय कुशवाहा ने बताया:

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"युवक और युवती दोनों के शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रथम दृष्टया यह प्रेम प्रसंग में आत्महत्या का मामला है। दोनों के पास से सुसाइड नोट और मोबाइल मिले हैं, जिनकी फोरेंसिक जांच कराई जा रही है। कॉल डिटेल्स (CDR) से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मरने से ठीक पहले उन्होंने किससे बात की थी।"
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सामाजिक विश्लेषण: क्यों बढ़ रहे हैं ऐसे मामले?

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यह घटना समाज के सामने कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
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    एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर (Extramarital Affairs): ऑफिस कल्चर में बढ़ते तनाव और साथ बिताए जाने वाले समय के कारण ऐसे रिश्ते पनप रहे हैं। लेकिन इनका अंजाम अक्सर परिवारों की बर्बादी होता है।
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    डिप्रेशन और पलायनवाद: समस्याओं का सामना करने के बजाय जीवन समाप्त कर लेना एक खतरनाक प्रवृत्ति बनती जा रही है। सूर्यकांत के पास एक बेटा था, एक पत्नी थी, लेकिन उसने अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ लिया।
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    उम्र का फासला: 40 और 25 का यह रिश्ता भावनात्मक अपरिपक्वता का भी शिकार हो सकता है।
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पटरियों पर बिखरे सपने

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आलमनगर रेलवे ट्रैक पर अब खून के धब्बे सूख चुके हैं, ट्रेनें फिर से अपनी रफ़्तार से दौड़ रही हैं। लेकिन सविता की जिंदगी और दीपाली के माता-पिता का बुढ़ापा हमेशा के लिए थम गया है। सूर्यकांत और दीपाली को शायद लगा होगा कि मौत उन्हें मिला देगी, लेकिन वे पीछे छोड़ गए हैं कभी न खत्म होने वाले आंसू और सवाल।
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दीपाली को उसका 'कान्हा' मिला या नहीं, यह तो कोई नहीं जानता, लेकिन इस 'कान्हा' के चक्कर में कई जिंदगियां 'महाभारत' बनकर रह गईं।
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Khabreelal की अपील: जिंदगी अनमोल है। कोई भी समस्या इतनी बड़ी नहीं होती कि उसके लिए जान दे दी जाए। अगर आप किसी मानसिक तनाव या रिश्ते की उलझन से गुजर रहे हैं, तो कृपया बात करें, काउंसलिंग लें। आत्महत्या किसी समस्या का हल नहीं है।