उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के ठाकुरगंज थाना क्षेत्र से एक बेहद मर्माहत करने वाली और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक मामूली सी बात पर, मां की डांट से नाराज होकर 20 साल के एक युवक ने मौत को गले लगा लिया। मृतक पेशे से एक डिलीवरी बॉय था और उसने आत्महत्या जैसा खौफनाक कदम उठाने से पहले सोशल मीडिया पर अपने दर्द का इजहार किया और एक लंबा सुसाइड नोट भी छोड़ा।READ ALSO:-बिजनौर में 'वर्चस्व' की जंग: बीच सड़क पर भिड़े किन्नरों के दो गुट, जमकर हुई मारपीट; गाड़ी के शीशे तोड़े
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यह घटना न केवल एक परिवार के उजड़ने की कहानी है, बल्कि आज के युवाओं में कम होती सहनशक्ति और सोशल मीडिया पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की प्रवृत्ति का भी एक दुखद उदाहरण है। 4 पेज के सुसाइड नोट और इंस्टाग्राम पर लगाई गई 5 स्टोरी ने इस घटना को और भी ज्यादा भावुक बना दिया है।
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शनिवार की वो काली रात: कैसे शुरू हुआ विवाद?
\r\n\r\nघटना ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के रहमतगंज इलाके की है। मृतक की पहचान 20 वर्षीय हिमांशु शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना की शुरुआत शनिवार की रात को हुई। हिमांशु जब रात में अपने काम से घर लौटा, तो वह शराब के नशे में था।
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एक मां के लिए अपने बेटे को नशे की हालत में देखना तकलीफदेह था। हिमांशु की मां, रश्मि पाल ने उसे शराब पीकर घर आने पर डांट दिया। यह एक सामान्य पारिवारिक घटना हो सकती थी, जहां एक मां अपने बेटे की भलाई के लिए उसे समझा रही थी। लेकिन, शराब के नशे में धुत हिमांशु को मां की यह डांट बर्दाश्त नहीं हुई। वह गुस्से में आ गया और घर छोड़कर चले जाने की बात करने लगा।
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मां ने रोका रास्ता, तो छत से कूदकर भागा बेटा
\r\n\r\nहिमांशु का गुस्सा देख मां घबरा गई। बेटे को घर से जाने से रोकने के लिए मां रश्मि पाल ने मुख्य दरवाजा बंद कर दिया। उन्हें लगा कि दरवाजा बंद होने पर बेटा शांत हो जाएगा और घर में ही रहेगा। लेकिन हिमांशु के सिर पर तो जैसे खून सवार था। दरवाजा बंद देख वह घर की छत पर चढ़ गया और वहां से कूदकर घर से बाहर निकल गया। उस वक्त किसी को अंदाजा भी नहीं था कि हिमांशु घर से नहीं, बल्कि हमेशा के लिए दुनिया से जाने की तैयारी कर रहा है।
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फैजुल्लागंज का वो सन्नाटा और दोस्तों को आखिरी कॉल
\r\n\r\nघर से निकलने के बाद हिमांशु सीधे फैजुल्लागंज इलाके की तरफ गया। इस दौरान उसके दिमाग में क्या चल रहा था, यह शायद उसकी आखिरी इंस्टाग्राम स्टोरीज और सुसाइड नोट से समझा जा सकता है। घर से निकलने के कुछ ही समय बाद उसने अपने करीबी दोस्तों को फोन किया।
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फोन पर उसकी आवाज लड़खड़ा रही थी। उसने दोस्तों से कहा, "मैंने जहर खा लिया है।" यह सुनते ही दोस्तों के पैरों तले जमीन खिसक गई। अनहोनी की आशंका से घबराए दोस्त पागलों की तरह उसे ढूंढने निकले। लोकेशन ट्रेस करते हुए जब वे फैजुल्लागंज पहुंचे, तो वहां का नजारा देख उनकी रूह कांप गई। हिमांशु वहां बेहोशी की हालत में पड़ा था।
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जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष
\r\n\r\nदोस्तों ने तुरंत इसकी सूचना परिजनों को दी। बदहवास परिजन और दोस्त उसे लेकर आनन-फानन में ट्रॉमा सेंटर पहुंचे। डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, इलाज शुरू किया गया, लेकिन जहर शरीर में पूरी तरह फैल चुका था। जिंदगी और मौत के बीच चले कुछ घंटों के संघर्ष के बाद हिमांशु ने दम तोड़ दिया। एक हंसता-खेलता युवक, जो दिन भर लोगों के घर खुशियां (पार्सल) डिलीवर करता था, वह अपने ही घर में मातम डिलीवर कर गया।
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4 पेज का सुसाइड नोट: हर शब्द में छिपा दर्द और पश्चाताप
\r\n\r\nपुलिस को जांच के दौरान हिमांशु के पास से 4 पेज का एक विस्तृत सुसाइड नोट मिला है। इस नोट का हर एक शब्द पढ़ने वाले की आंखों में आंसू ला दे रहा है। नोट में उसने अपने माता-पिता से माफी मांगी है और अपने दोस्तों को आखिरी संदेश दिया है।
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सुसाइड नोट के प्रमुख अंश: हिमांशु ने लिखा, "सॉरी मम्मी-पापा। अब मैं इस दुनिया में जीने के लायक नहीं हूं। मैं जानता हूं कि आप हमसे बहुत प्यार करते हैं। मैं अपने आप से आत्महत्या कर रहा हूं। इसमें मेरे किसी दोस्त का हाथ नहीं है। ना ही मेरे किसी परिवार वालों का हाथ है।"
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उसने आगे अपनी मां के प्रति प्रेम व्यक्त करते हुए लिखा, "मम्मी आई लव यू टू। अपना और तनु (छोटी बहन) का ख्याल रखना। पापा का भी ख्याल रखना।"
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दोस्तों के नाम आखिरी पैगाम: अपने जिगरी दोस्त विशाल के लिए उसने लिखा, "विशाल मेरी जान, मेरे मम्मी-पापा का ख्याल रखना। प्रियांशु तुमसे भी बोल रहे हैं। दोस्त मेरे परिवार का ध्यान रखना।"
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आर्थिक जिम्मेदारियों का जिक्र: हैरानी की बात यह है कि मौत के मुहाने पर खड़े होकर भी उसे अपनी कुछ जिम्मेदारियों का अहसास था। उसने अपनी मामी के बारे में लिखा, "मामी आपके खाते से एलआईसी (LIC) की किस्त कट रही है। उसके सारे पैसे मम्मी को दे दीजिएगा।" साथ ही उसने एक चांदी की चेन को लेकर पापा से बोले गए झूठ का भी जिक्र किया और स्पष्ट किया कि वह चेन उसके दोस्त विशाल के पास नहीं है।
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नोट के अंत में उसने अपने सभी दोस्तों को याद किया: "आई लव यू विशाल, आई लव यू प्रत्यूष, आई लव यू करण, आई लव यू पवन, आई लव यू, सौरभ भाई ठाकुरगंज।"
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इंस्टाग्राम पर 'हैप्पी एंडिंग' की दास्तां
\r\n\r\nआजकल की युवा पीढ़ी अपनी भावनाओं को व्यक्त करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेती है। हिमांशु ने भी यही किया। आत्महत्या जैसा कदम उठाने से ठीक पहले उसने इंस्टाग्राम पर एक के बाद एक 5 स्टोरी अपडेट कीं। ये स्टोरी अब उसके जाने के बाद उसके दर्द की गवाही दे रही हैं।
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- \r\n पहली स्टोरी: बैकग्राउंड में एक बेहद दर्द भरा डॉयलाग चल रहा था- "पता नहीं किस कलम से किस्मत लिखी है मेरी, जब-जब खुश रहने की कोशिश करता हूं, तब-तब एक नया गम मिलता है।" यह लाइन बता रही थी कि वह मानसिक रूप से कितना परेशान था।\r\n \r\n
- \r\n दूसरी स्टोरी: यह स्टोरी सबसे ज्यादा विचलित करने वाली थी। इसमें डॉयलाग था- "जब हम दुनिया से जायेंगे तो लोग खुश होंगे, हैप्पी एंडिंग करके जाएंगे।"\r\n \r\n
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शायद हिमांशु को लगा कि उसके जाने से सब ठीक हो जाएगा, लेकिन वह यह नहीं समझ पाया कि उसकी यह 'हैप्पी एंडिंग' उसके परिवार के लिए कभी न खत्म होने वाला दुख बन जाएगी।
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10 दिन बाद घर लौटे पिता, खुशियां मातम में बदलीं
\r\n\r\nइस घटना का एक और दुखद पहलू यह है कि हिमांशु के पिता अजय पाल, जो प्राइवेट बस चलाते हैं, घटना के समय करीब 10 दिनों के बाद घर लौटे थे। परिवार सोच रहा था कि पिता के आने पर सब साथ मिलकर समय बिताएंगे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। पिता के घर लौटने की खुशी बेटे की मौत के मातम में बदल गई।
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परिवार में अब मां रश्मि पाल और छोटी बहन तनु बची हैं। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। उन्हें बार-बार यही पछतावा हो रहा है कि काश उन्होंने उस रात उसे डांटा न होता, या काश दरवाजा बंद करने के बजाय उसे प्यार से समझा लिया होता। लेकिन समय अब वापस नहीं आ सकता।
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पुलिस की कार्रवाई और जांच
\r\n\r\nघटना की सूचना मिलते ही ठाकुरगंज पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा भरा और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह आत्महत्या का मामला है, जिसकी पुष्टि सुसाइड नोट और दोस्तों के बयानों से होती है। फिर भी पुलिस हर पहलू से मामले की जांच कर रही है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या हिमांशु किसी और तनाव में भी था।
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एक चेतावनी और एक सबक
\r\n\r\nहिमांशु की मौत सिर्फ एक खबर नहीं है, बल्कि समाज के लिए एक चेतावनी है। क्षणिक आवेश और गुस्से में उठाया गया कदम कैसे पूरे परिवार को बर्बाद कर सकता है, यह घटना इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। युवाओं को यह समझने की जरूरत है कि माता-पिता की डांट में उनका प्यार और चिंता छिपी होती है। वहीं, सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाने वाली उदास शायरी और स्टेटस को भी दोस्तों और परिजनों द्वारा गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है, ताकि समय रहते किसी की जान बचाई जा सके।
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फिलहाल, ठाकुरगंज के रहमतगंज इलाके में सन्नाटा पसरा है और हर आंख नम है।
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नोट: अगर आप या आपका कोई परिचित तनाव से गुजर रहा है, तो कृपया अकेले न रहें। अपने दोस्तों या परिवार से बात करें। जीवन अनमोल है।