गाजियाबाद। पवित्र श्रावण मास (सावन) में चल रही कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) अब अपने चरम की ओर बढ़ रही है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौटने वाले शिवभक्त कांवड़ियों का जनसैलाब अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तमाम जिलों से होकर गुजर रहा है। कांवड़ियों की भारी भीड़, सुरक्षा व्यवस्था और शहर की चरमराती ट्रैफिक व्यवस्था को देखते हुए गाजियाबाद जिला प्रशासन ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। जिलाधिकारी (DM) ने जिले के सभी शिक्षण संस्थानों को 4 अगस्त से 12 अगस्त तक पूरी तरह से बंद रखने के आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही, शहर में कांवड़ मार्गों को वन-वे (One-Way) कर दिया गया है, जिससे सोमवार को गाजियाबाद की सड़कों पर भारी जाम की स्थिति पैदा हो गई। दूसरी तरफ, मुरादनगर में एक कांवड़ खंडित होने से भारी बवाल भी देखने को मिला।READ ALSO:-मेरठ: 55 वर्षीय सिक्योरिटी गार्ड की संदिग्ध मौत, माथे पर लगी गोली; 24 घंटे बाद कमरे में खून से लथपथ मिला शव
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आइए, इस पूरी खबर को विस्तार से जानते हैं और समझते हैं कि प्रशासन ने क्या-क्या कदम उठाए हैं।
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डीएम का सख्त फरमान: 4 से 12 अगस्त तक स्कूलों पर लटके रहेंगे ताले

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कांवड़ यात्रा के दौरान स्कूली बच्चों को होने वाली परेशानी, स्कूल बसों के संचालन में आने वाली दिक्कतों और शिवभक्तों के सुगम आवागमन को सुनिश्चित करने के लिए गाजियाबाद के जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मांदड़ ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) को स्पष्ट आदेश दिया है कि कल (4 अगस्त) से 12 अगस्त तक जिले के सभी शिक्षण संस्थान पूरी तरह से बंद रहेंगे।
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इस आदेश के दायरे में कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक के सभी मान्यता प्राप्त स्कूल आएंगे। चाहे वह बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूल हों, सीबीएसई (CBSE), आईसीएसई (ICSE) बोर्ड के हों या फिर यूपी बोर्ड (UP Board) के मान्यता प्राप्त प्राइवेट और सरकारी विद्यालय—सभी पर यह आदेश समान रूप से लागू होगा। इसके अलावा डिग्री कॉलेजों और अन्य तकनीकी शिक्षण संस्थानों को भी बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि के दौरान कोई भी स्कूल खुला पाया गया, तो संबंधित स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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कांवड़ मार्ग पर 'वन-वे' व्यवस्था लागू: पूरे शहर में हाहाकार, रेंगता दिखा ट्रैफिक

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सोमवार (3 अगस्त) को गाजियाबाद प्रशासन ने कांवड़ियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए कांवड़ मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया। सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली-मेरठ मार्ग और अन्य प्रमुख कांवड़ रूट्स को 'वन-वे' (एकतरफा) कर दिया गया। मार्ग का एक पूरा हिस्सा केवल शिवभक्तों के लिए आरक्षित कर दिया गया है, जबकि दूसरे हिस्से से भारी और हल्के वाहनों को निकाला जा रहा है।
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इस 'वन-वे' डायवर्जन का असर यह हुआ कि सोमवार सुबह से ही पूरे गाजियाबाद शहर का ट्रैफिक सिस्टम बुरी तरह चरमरा गया। मोहन नगर, राजनगर एक्सटेंशन, मेरठ तिराहा, मोदीनगर और मुरादनगर के इलाकों में वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। ऑफिस जाने वाले लोगों, ड्यूटी पर जाने वाले कर्मचारियों और आम राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। घंटों तक वाहन जाम में रेंगते नजर आए। ट्रैफिक पुलिस के जवान जगह-जगह पसीना बहाते दिखे, लेकिन वाहनों का दबाव इतना अधिक था कि सारी व्यवस्थाएं नाकाफी साबित हो रही थीं। प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे बेहद जरूरी होने पर ही कांवड़ मार्गों की तरफ जाएं और वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें।
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मुरादनगर में तनाव: कांवड़ खंडित होने पर शिवभक्तों का भारी हंगामा

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कांवड़ यात्रा के दौरान प्रशासन को उस वक्त कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा, जब सोमवार सुबह दिल्ली रोड पर मुरादनगर के पास एक बड़ी घटना घट गई। यहां से गुजर रहे शिवभक्तों के एक जत्थे की कांवड़ किसी कारणवश खंडित हो गई। हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कांवड़ का जमीन पर छू जाना या किसी वाहन आदि से टकराकर उसका जल गिर जाना खंडित माना जाता है।
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जैसे ही यह घटना घटी, वहां मौजूद कांवड़ियों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। सैकड़ों की संख्या में शिवभक्तों ने दिल्ली रोड को पूरी तरह से जाम कर दिया और जमकर हंगामा शुरू कर दिया। नारेबाजी और प्रदर्शन के कारण वहां भारी अफरातफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही कई थानों की फोर्स, पीएसी (PAC) और आला अधिकारी मौके पर दौड़ पड़े। अधिकारियों ने आक्रोशित कांवड़ियों को शांत करने का काफी प्रयास किया। धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करते हुए, प्रशासन ने तुरंत हरिद्वार से दोबारा गंगाजल मंगाने या स्थानीय स्तर पर शास्त्र-सम्मत तरीके से नई कांवड़ की व्यवस्था कराने का आश्वासन देकर मामले को किसी तरह शांत कराया। इस हंगामे के कारण घंटों तक दिल्ली-मेरठ हाईवे पर यातायात पूरी तरह से ठप रहा।
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पश्चिमी यूपी अलर्ट पर: मेरठ-मुजफ्फरनगर समेत 6 अन्य जिलों में पहले से ही छुट्टी

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कांवड़ यात्रा का मुख्य मार्ग उत्तराखंड के हरिद्वार से शुरू होकर मुजफ्फरनगर, मेरठ, गाजियाबाद होते हुए दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की तरफ जाता है। इस पूरे 'कांवड़ हाईवे' पर करोड़ों शिवभक्तों के कदम पड़ते हैं। गाजियाबाद से पहले, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रशासन ने भी इसी तरह के कदम उठाए हैं।
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मेरठ और मुजफ्फरनगर प्रशासन ने पहले ही कांवड़ यात्रा के मद्देनजर अपने जिलों में स्कूलों को बंद करने का आदेश जारी कर दिया था। इसके अलावा सहारनपुर, शामली, बागपत और हापुड़ समेत कुल 6 जिलों में शिक्षण संस्थान एहतियातन बंद चल रहे हैं। पूरे पश्चिमी यूपी में इस वक्त कांवड़ यात्रा को लेकर एक अघोषित 'हाई अलर्ट' जैसी स्थिति है। रूट पर पड़ने वाले सभी मीट-मांस की दुकानों को पहले ही पर्दा लगाकर या पूरी तरह से बंद करा दिया गया है।
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सुरक्षा के कड़े इंतजाम: चप्पे-चप्पे पर ड्रोन और CCTV का पहरा

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जिलाधिकारी और पुलिस कमिश्नर ने संयुक्त रूप से पूरे जिले की सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाल रखी है।
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    हवाई निगरानी: कांवड़ मार्गों, प्रमुख चौराहों और शिविरों के ऊपर लगातार ड्रोन कैमरों से नजर रखी जा रही है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति या असामाजिक तत्व की तुरंत पहचान की जा सके।
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    मेडिकल और राहत शिविर: कांवड़ियों के लिए जगह-जगह भव्य राहत शिविर (Kanwar Camps) लगाए गए हैं, जहां भोजन, आराम और मेडिकल फर्स्ट-एड की सुविधा 24 घंटे उपलब्ध कराई जा रही है।
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    नो-टोल पॉलिसी: कांवड़ियों के वाहनों को टोल प्लाजा पर विशेष लेन से फ्री में निकाला जा रहा है।
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    खुफिया अलर्ट: किसी भी आतंकी या सांप्रदायिक खतरे से निपटने के लिए सादे कपड़ों में पुलिसकर्मी और खुफिया विभाग (LIU) की टीमें कांवड़ियों के भेष में भीड़ के साथ चल रही हैं।
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प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 12 अगस्त तक पूरे जिले में भारी वाहनों (ट्रक, डंपर आदि) की नो-एंट्री (No-Entry) पूरी सख्ती के साथ लागू रहेगी। आम नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे प्रशासन द्वारा जारी की गई आधिकारिक ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट मैप को देखकर ही अपने घरों से निकलें, ताकि किसी भी तरह की परेशानी और जाम से बचा जा सके।
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