दिल्ली-एनसीआर के गाजियाबाद स्थित इंदिरापुरम इलाके में शनिवार की सुबह एक बेहद खौफनाक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। यहां की हाई-प्रोफाइल और पॉश एटीएस एडवांटेज (ATS Advantage) सोसायटी में एक 35 वर्षीय युवक की 23वीं मंजिल से रहस्यमयी परिस्थितियों में गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। सुबह के वक्त जब सोसायटी के अधिकांश लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे या अपनी दिनचर्या की शुरुआत कर रहे थे, तभी इस भयानक हादसे ने पूरी सोसायटी में दहशत और हड़कंप का माहौल पैदा कर दिया। इतनी ऊंचाई से गिरने के कारण युवक का शव सीधे जमीन पर नहीं पहुंचा, बल्कि पहली मंजिल के एक फ्लैट की बालकनी में जाकर बुरी तरह अटक गया। इस खौफनाक दृश्य को जिसने भी देखा, उसकी रूह कांप गई।READ ALSO:-मेरठ के हस्तिनापुर में बड़ा खुलासा: डेयरी की आड़ में चल रही थी नकली गोल्ड फ्लैक सिगरेट की फैक्ट्री, दिल्ली का मास्टरमाइंड गिरफ्तार
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बालकनी में अटका शव और सोसायटी में मची अफरा-तफरी घटना के तुरंत बाद एटीएस एडवांटेज सोसायटी के निवासियों के बीच अफरा-तफरी मच गई। जैसे ही लोगों को इस बात की भनक लगी कि किसी व्यक्ति का शव पहली मंजिल की बालकनी में फंसा हुआ है, वहां भारी भीड़ जमा हो गई। सोसायटी के सुरक्षाकर्मियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) के पदाधिकारियों ने बिना कोई समय गंवाए स्थानीय इंदिरापुरम थाना पुलिस को इस हादसे की तत्काल सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस की एक विशेष टीम दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने सबसे पहले भारी मशक्कत के बाद बालकनी में फंसे क्षत-विक्षत शव को नीचे उतारा और उसे अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। प्रथम दृष्टया पुलिस इस पूरी घटना को आत्महत्या से जोड़कर देख रही है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए किसी भी अन्य एंगल को नकारा नहीं जा रहा है।
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टावर नंबर-10 का रहस्य: वहां क्यों और कैसे पहुंचा तरुण? पुलिस की प्रारंभिक जांच में मृतक की पहचान 35 वर्षीय तरुण के रूप में हुई है। तरुण ज्ञानखंड-3, इंदिरापुरम का ही निवासी था और उसके पिता का नाम जगदीश प्रसाद है। पुलिस तफ्तीश में जो सबसे बड़ा और उलझा हुआ सवाल सामने आ रहा है, वह यह है कि तरुण अपने घर से निकलकर एटीएस एडवांटेज सोसायटी के टावर नंबर-10 तक कैसे पहुंचा? प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 8 बजे तरुण अपने घर से निकला था। वह सीधे टावर नंबर-10 में दाखिल हुआ और लिफ्ट के जरिए 23वीं मंजिल तक पहुंच गया। 23वीं मंजिल पर पहुंचने के कुछ ही देर बाद वह संदिग्ध परिस्थितियों में नीचे गिर गया। अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि तरुण का इस विशेष टावर और 23वीं मंजिल से क्या कनेक्शन था। क्या वह वहां किसी परिचित से मिलने गया था, या फिर उसने आत्महत्या के लिए जानबूझकर इस ऊंची इमारत को चुना था?
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मानसिक तनाव और बीमारी का एंगल आया सामने इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने जब मृतक के परिजनों से संपर्क किया, तो जांच में एक नया और बेहद अहम पहलू जुड़ गया। मृतक तरुण के पिता जगदीश प्रसाद ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि उनके बेटे की मानसिक स्थिति पिछले कुछ समय से ठीक नहीं चल रही थी। तरुण गहरे मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहा था। परिजनों के मुताबिक, पिछले करीब तीन सालों से दिल्ली के शाहदरा स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन बिहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (IHBAS - इहबास) में उसका नियमित इलाज भी चल रहा था। परिवार द्वारा दी गई इस मेडिकल हिस्ट्री और मानसिक बीमारी की जानकारी के आधार पर ही पुलिस की थ्योरी फिलहाल आत्महत्या की तरफ अधिक झुकी हुई है। हालांकि, पुलिस हर बयान को क्रॉस-चेक कर रही है।
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सीसीटीवी फुटेज खोलेगी 23वीं मंजिल का राज इस हाई-प्रोफाइल मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए पुलिस अब पूरी तरह से वैज्ञानिक साक्ष्यों और तकनीकी जांच पर निर्भर है। एटीएस एडवांटेज जैसी पॉश सोसायटी में चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी (CCTV) कैमरे लगे हुए हैं। पुलिस ने सोसायटी के मुख्य गेट, टावर नंबर-10 के एंट्री पॉइंट, लिफ्ट और 23वीं मंजिल के कॉरिडोर की सभी सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है। इन फुटेज को बारीकी से खंगाला जा रहा है ताकि तरुण के सोसायटी में प्रवेश करने से लेकर 23वीं मंजिल तक पहुंचने की हर एक सेकंड की गतिविधि का रिकॉर्ड सामने आ सके। फुटेज से यह भी स्पष्ट हो जाएगा कि क्या तरुण लिफ्ट में अकेला था, या उसके साथ कोई अन्य व्यक्ति भी मौजूद था। इसके साथ ही, 23वीं मंजिल पर गिरने से ठीक पहले क्या हालात थे, इसकी सच्चाई भी कैमरों की रिकॉर्डिंग से ही बाहर आ सकेगी।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल इस घटना ने एटीएस एडवांटेज सोसायटी की चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। एक बाहरी व्यक्ति बिना किसी रोक-टोक के सोसायटी के अंदर कैसे दाखिल हो गया? क्या मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड्स ने तरुण को रोका या उससे पूछताछ की थी? यदि तरुण वहां का निवासी नहीं था, तो उसे टावर नंबर-10 में सीधे प्रवेश कैसे मिल गया? पुलिस इन सभी सवालों के जवाब तलाशने के लिए सोसायटी के सिक्योरिटी गार्ड्स और मैनेजमेंट से भी कड़ी पूछताछ कर रही है। निवासियों में भी इस बात को लेकर गहरी चिंता है कि सुरक्षा में इस तरह की चूक किसी भी बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है।
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पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की आगामी कार्रवाई इंदिरापुरम थाना पुलिस ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले की आत्महत्या, हादसा और हत्या—तीनों ही एंगलों से गहराई से जांच कर रहे हैं। फिलहाल सभी की निगाहें पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही यह साफ हो पाएगा कि मौत गिरने की वजह से ही हुई है या फिर शरीर पर कोई अन्य संघर्ष के निशान मौजूद हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने, सीसीटीवी फुटेज की विस्तृत जांच पूरी होने और फोरेंसिक साक्ष्यों का विश्लेषण करने के बाद ही मौत की असली वजह का अंतिम निष्कर्ष निकाला जा सकेगा। फिलहाल पुलिस 23वीं मंजिल के निवासियों और तरुण के करीबियों के बयान भी दर्ज कर रही है, ताकि इस रहस्यमयी मौत के हर पहलू से पर्दा उठाया जा सके।
Sabse pehle comment karne wale banein.