खबरीलाल डेस्क
देश भर में आज से जनसंख्या की गिनती का महाअभियान शुरू हो गया है। इसी कड़ी में यूपी में जनगणना 2027 का पहला फेज आज से विधिवत रूप से आरंभ हो रहा है। आजादी के बाद देश में पहली बार डिजिटल और जातिगत जनगणना एक साथ की जा रही है। खबरीलाल की इस खास रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि यह पूरी प्रक्रिया कैसे काम करेगी और आपको क्या-क्या तैयारियां करनी हैं। राष्ट्रीय स्तर पर इस पहले चरण (मकान सूचीकरण और मकान गणना) को 30 सितंबर, 2026 (यानी 6 महीने) तक पूरा किया जाना है।READ ALSO:-महंगाई का 'अप्रैल फूल': दिल्ली-मेरठ और देहरादून एक्सप्रेसवे पर सफर हुआ महंगा, टोल टैक्स में भारी बढ़ोतरी से आम आदमी और ट्रांसपोर्टर्स को तगड़ा झटका
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उत्तर प्रदेश के संदर्भ में बात करें, तो यूपी में 22 मई से 21 जून तक जनगणनाकर्मी आपके घर आएंगे और लगभग 33 सवालों के जरिए आपसे महत्वपूर्ण जानकारी इकट्ठा करेंगे। डिजिटल इंडिया की पहल के तहत, इससे 15 दिन पहले यानी 7 मई से यूपी के लोग एक ऑनलाइन पोर्टल (सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल) के जरिए भी अपनी जानकारी खुद भर सकते हैं। जनगणना का दूसरा और मुख्य फेज फरवरी, 2027 से शुरू होगा, जिसमें जनसंख्या की गिनती होगी।
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अब आम जनता के मन में इस पूरी प्रक्रिया को लेकर कई बड़े सवाल हैं। जैसे कि जो लोग नौकरी या किसी अन्य वजह से दूसरे शहर में रह रहे हैं, उनका क्या होगा? अगर कोई व्यक्ति जनगणना में शामिल न होना चाहे या गलत जानकारी दे दे, तब क्या कार्रवाई होगी? क्या इस दौरान आधार, पैन या घर-जमीन के कागजात भी दिखाने अनिवार्य होंगे? आइए, इन सभी सवालों के सटीक और प्रामाणिक जवाब जानते हैं।
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यूपी में जनगणना 2027: आपके हर सवाल का जवाब

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सवाल 1. जनगणना से आम आदमी को क्या फायदा होगा?

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जवाब. अक्सर लोगों को लगता है कि जनगणना सिर्फ सरकारी कागजों का काम है, लेकिन यह सीधे आपके और आपके परिवार के जीवन पर असर डालती है। भले ही इसका फायदा तुरंत न दिखे। जनगणना से सरकार को सटीक डेटा मिलता है कि किस इलाके में कितने और किस वर्ग के लोग रहते हैं। इसी डेटा के आधार पर राशन, प्रधानमंत्री आवास, वृद्धावस्था और विधवा पेंशन जैसी योजनाएं सही और जरूरतमंद लोगों तक पहुंचती हैं। आपके इलाके की आबादी का सही डेटा सामने आने से ही वहां नई सड़कें, अस्पताल और स्कूल/कॉलेज की सही प्लानिंग हो पाती है। इसके अलावा, सरकारी नौकरियों में सीटों का निर्धारण, आरक्षण का संतुलन और विधानसभा/लोकसभा सीटों का परिसीमन (Delimitation) पूरी तरह से जनगणना के डेटा पर ही निर्भर करता है।
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सवाल 2. जनगणनाकर्मी हमसे क्या नहीं पूछ सकते?

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जवाब. पहले चरण में मुख्य रूप से आपके मकान की स्थिति (मकान कच्चा है या पक्का), घर में बिजली, पानी, शौचालय, वाहन (साइकिल/स्कूटर/कार), टीवी और इंटरनेट की सुविधा से जुड़े करीब 33 सवाल पूछे जाएंगे। लेकिन, आपको यह जानना जरूरी है कि जनगणनाकर्मी आपसे ये 3 सवाल बिल्कुल नहीं पूछ सकते:
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    आपकी महीने की कमाई या बैंक बैलेंस से जुड़ा कोई भी सवाल।
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  3. \r\n
    आपसे आधार कार्ड, पैन कार्ड या कोई अन्य कागजात दिखाने का दबाव नहीं बनाया जा सकता।
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    आपका बैंक अकाउंट नंबर या मोबाइल का ओटीपी (OTP) जैसी कोई भी निजी जानकारी नहीं पूछी जाएगी।
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सवाल 3. क्या आधार, पैन कार्ड जैसे कागजात भी दिखाने होंगे?

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जवाब. नहीं। जनगणना में भाग लेने के लिए आपको किसी भी तरह का कोई सरकारी या निजी दस्तावेज जैसे- आधार, पैन कार्ड, वोटर आईडी या नागरिकता से जुड़ा कोई दस्तावेज दिखाने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। इसके साथ ही, आपको अपनी बैंक पासबुक या अपने मकान, घर, खेत वगैरह के मालिकाना हक से जुड़े जमीन के कागजात भी नहीं दिखाने हैं। यह प्रक्रिया पूरी तरह से आपके द्वारा दी गई मौखिक या ऑनलाइन जानकारी पर आधारित है।
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सवाल 4. अगर मैं जनगणना में हिस्सा न लूं या गलत जानकारी दूं, तब क्या होगा?

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जवाब. यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण सवाल है। जनगणना कर्मियों को जानकारी न देना, जानबूझकर गलत जानकारी देना या उनके काम में सहयोग न करना एक कानूनी अपराध है। जनगणना अधिनियम, 1948 (Census Act, 1948) की धारा 8 की उपधारा (2) के तहत, देश का हर नागरिक जनगणना से जुड़े सवालों के सही-सही जवाब देने के लिए बाध्य है। इसी कानून की धारा 11(1)(घ) के मुताबिक, जनगणना से जुड़े सवालों के जवाब देने से साफ मना करना या झूठी जानकारी देना अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसा करने पर संबंधित व्यक्ति पर एक हजार रुपए तक का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
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सवाल 5. क्या हमारी निजी जानकारियों का गलत इस्तेमाल हो सकता है?

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जवाब. बिल्कुल नहीं। जनगणना के तहत इकट्ठा की गई आपकी सभी जानकारियां जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा- 15 के तहत पूरी तरह गोपनीय (Confidential) रखी जाती हैं। इस डेटा को हाई-टेक साइबर सिक्योरिटी के साथ एन्क्रिप्ट (Encrypt) करके सुरक्षित सरकारी सर्वरों में इकट्ठा किया जाता है। व्यक्तिगत डेटा को किसी अन्य एजेंसी के साथ साझा नहीं किया जाता। सिर्फ सरकार इस समग्र डेटा (Aggregate Data) का इस्तेमाल विकास योजनाएं और नीतियां बनाने में करती है। इसलिए इस डेटा के लीक होने या गलत हाथों में पड़ने की गुंजाइश न के बराबर है।
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सवाल 6. मैं जनगणना में किस तरह हिस्सा ले सकता हूं?

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जवाब. आप यूपी में जनगणना 2027 में अपनी सुविधा के अनुसार दो तरह से भाग ले सकते हैं:
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    कैनवसर मैथड (Canvasser Method): इसमें जनगणनाकर्मी (प्रगणक) आपके घर आकर आपसे 33 सवाल पूछेगा और आपके जवाबों को अपने मोबाइल ऐप या डिजिटल पोर्टल पर दर्ज करेगा।
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  3. \r\n
    सेल्फ-एन्यूमरेएशन मैथड (Self-Enumeration Method): यह सबसे नया तरीका है। आप घर बैठे सेल्फ-एन्यूमरेएशन पोर्टल (SE Portal) के जरिए अपनी सारी जानकारी खुद ऑनलाइन भर सकते हैं। फॉर्म का फाइनल सब्मिशन करने के बाद आपको एक यूनिक रेफरेंस आईडी (ID) मिलेगी। बाद में जब जनगणनाकर्मी आपके घर आएगा, तब आप उसे बस वह आईडी दे दें। कर्मचारी उसे अपने सिस्टम में डालकर वैरिफाई कर देगा और आपका काम खत्म हो जाएगा।
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सवाल 7. मैं किराए के मकान में रहता हूं। क्या मेरा परिवार जनगणना से छूट जाएगा?

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जवाब. नहीं, आपका परिवार जनगणना से बिल्कुल नहीं छूटेगा। चाहे आप किराए के घर में हों या खुद के, आपकी गिनती वहीं होगी जहां आप वर्तमान में रह रहे हैं। आप चाहें तो SE पोर्टल के जरिए ऑनलाइन अपनी जानकारी भर सकते हैं या फिर जनगणनाकर्मी के आने पर उसे मौखिक जानकारी दे सकते हैं। फॉर्म भरते समय ‘मकान के मालिकाना हक’ वाले कॉलम में आपके पास दो तरह के ऑप्शन रहेंगे: पहला- आप किराए पर रहते हैं, लेकिन शहर या गांव में कहीं और आपका अपना घर है। दूसरा- आप किराए पर रहते हैं और आपका अपना कोई निजी घर नहीं है। आपको अपनी स्थिति के अनुसार इनमें से कोई एक विकल्प सिलेक्ट करना होगा। साथ ही, किराए के मकान के जितने कमरे या हिस्से में आपका परिवार रहता है, उसकी जानकारी भी देनी होगी।
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सवाल 8. क्या मैं आज ही पोर्टल पर अपनी जानकारी भर सकता हूं?

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जवाब. नहीं। राष्ट्रीय स्तर पर फेज 1 आज से शुरू हुआ है, लेकिन राज्यों के हिसाब से सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल खुलने की तारीख अलग-अलग तय की गई है। किसी भी राज्य में 'हाउस लिस्टिंग और हाउस सेंसेस' का फील्ड वर्क शुरू होने से ठीक 15 दिन पहले तक ही सेल्फ-एन्यूमरेएशन पोर्टल खुला रहेगा। इस निर्धारित दौरान ही आप अपनी जानकारी भर सकेंगे। यूपी के मामले में यह तारीख 7 मई से 21 मई, 2026 तक है। उत्तर प्रदेश के निवासी इस दौरान ही सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर जाकर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
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सवाल 9. सेल्फ-एन्यूमरेशन पोर्टल पर जानकारी भरने का प्रोसेस क्या है?

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जवाब. यह प्रोसेस बेहद आसान और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है। आपको सबसे पहले भारत के महारजिस्ट्रार (RGI) द्वारा जारी आधिकारिक जनगणना पोर्टल या मोबाइल ऐप पर जाना होगा। वहां आपको अपने मोबाइल नंबर की मदद से रजिस्ट्रेशन करना होगा। मोबाइल पर आए ओटीपी (OTP) को दर्ज करने के बाद एक फॉर्म खुलेगा। इसमें पूछे गए 33 आसान सवालों के जवाब भरकर आपको फाइनल सबमिट करना होगा। सबमिट करते ही आपको एक रेफरेंस नंबर मिल जाएगा, जिसे सुरक्षित रखना है।
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सवाल 10. मुझे इंग्लिश नहीं आती, तो मैं ऑनलाइन पोर्टल का इस्तेमाल कैसे करूं?

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जवाब. आपको भाषा को लेकर घबराने की कोई जरूरत नहीं है। भारत की विविधता को देखते हुए पोर्टल पर अंग्रेजी और हिंदी के साथ-साथ 16 क्षेत्रीय भाषाओं (Regional Languages) का ऑप्शन दिया गया है। आप अपनी सहूलियत और समझ के अनुसार अपनी भाषा चुनकर पोर्टल का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप ऑनलाइन प्रक्रिया में सहज नहीं हैं, तो आप बस जनगणनाकर्मी के अपने घर आने का इंतजार कर सकते हैं।
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सवाल 11. ऑनलाइन डेटा भरते समय अगर मुझसे कुछ गलती हो गई तो क्या होगा?

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जवाब. अगर आपसे कोई गलत जानकारी दर्ज हो गई है, तो घबराने या परेशान होने की जरूरत नहीं है। सेल्फ-एन्यूमरेशन फॉर्म को फाइनल सब्मिट करने से पहले आप जितनी बार चाहें अपनी डीटेल्स में बदलाव (Edit) कर सकते हैं। लेकिन अगर फॉर्म सब्मिट होने के बाद आपको याद आता है कि कोई जानकारी गलत भर गई है या कोई बदलाव कराना है, तो इसका भी उपाय है। जब जनगणनाकर्मी वैरिफिकेशन के लिए आपके घर आएं, तब आप उन्हें अपनी सही डीटेल्स बताकर उनके सिस्टम में उसे ठीक (Update) करवा सकते हैं।
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सवाल 12. जब जनगणनाकर्मी मेरे घर आएंगे तो मुझे क्या करना जरूरी है?

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जवाब. जब अधिकृत जनगणनाकर्मी आपके घर आएं, तो एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर आपको मुख्य रूप से ये 3 चीजें करनी हैं (भले ही आप अपना डेटा सेल्फ-एन्यूमरेएशन पोर्टल के जरिए पहले ही भर चुके हों):
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  1. \r\n
    जनगणना कर्मचारियों का सहयोग: उन्हें अपने घर (ड्राइंग रूम या बरामदे) में आने दें और सम्मानपूर्वक बात करें।
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  3. \r\n
    मकान की नंबरिंग: कर्मचारी आपके घर की बाहरी दीवार या दरवाजे पर एक खास जनगणना ब्लॉक नंबर लिखेंगे। उन्हें वह नंबर लिखने दें और उसे मिटाएं नहीं। यह नंबरिंग भविष्य के रिकॉर्ड के लिए बहुत जरूरी है।
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  4. \r\n
  5. \r\n
    सटीक जानकारी: अपनी और अपने परिवार की सभी जानकारी एकदम सही और स्पष्ट रूप से दें, ताकि देश का सटीक डेटाबेस तैयार हो सके।
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  6. \r\n
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अंत में, यह समझना बेहद जरूरी है कि यूपी में जनगणना 2027 केवल आबादी गिनने का एक आम सरकारी कार्यक्रम नहीं है; यह भारत के भविष्य और विकास का ब्लूप्रिंट तैयार करने की मजबूत नींव है। आज से शुरू हुआ यह पहला फेज 30 सितंबर तक चलेगा, और उत्तर प्रदेश में इसका जमीनी काम 22 मई से जोर पकड़ेगा। ऑनलाइन सेल्फ-एन्यूमरेएशन की सुविधा से यह प्रक्रिया अब पहले से कहीं अधिक पारदर्शी, आसान और तकनीक-आधारित हो गई है। हम सभी को इस राष्ट्रीय कर्तव्य में बढ़-चढ़कर और पूरी ईमानदारी के साथ हिस्सा लेना चाहिए। बिना किसी डर या भ्रम के अपने सवालों के जवाब दें, क्योंकि आपका एक सही जवाब कल के बेहतर भारत के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा।
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संक्षिप्त सारांश: देश में आज से जनगणना 2027 का पहला चरण (मकान सूचीकरण) शुरू हो गया है। यूपी में 7 मई से लोग ऑनलाइन पोर्टल पर अपनी जानकारी भर सकेंगे, जबकि 22 मई से घर-घर जाकर 33 सवाल पूछे जाएंगे। इस प्रक्रिया में कोई कागज या बैंक डिटेल नहीं मांगी जाएगी, और गलत जानकारी देने पर 1000 रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।