खबरीलाल डेस्क
भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) ने देश के पांच प्रमुख राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आगामी विधानसभा चुनावों का बिगुल फूंक दिया है। रविवार को विज्ञान भवन में आयोजित एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार की अगुवाई वाली टीम ने असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के लिए विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखें आधिकारिक रूप से घोषित कर दी हैं। इस घोषणा के साथ ही इन सभी पांचों राज्यों में आदर्श आचार संहिता (Model Code of Conduct) तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। राजनीतिक दलों की सरगर्मियां तेज हो गई हैं और पूरा देश अब इन राज्यों के चुनावी महासमर की ओर टकटकी लगाए हुए है।READ ALSO:-कुदरत का 'यू-टर्न': यूपी में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से हाहाकार! 17 जिलों में अलर्ट, खेतों में बिछी फसलें और एक्शन में सरकार
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चुनाव आयोग के विस्तृत कार्यक्रम के अनुसार, इन पांच राज्यों में 9 अप्रैल से मतदान की प्रक्रिया शुरू होगी और सभी राज्यों के चुनावी नतीजे एक साथ 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। इस बार चुनाव आयोग ने मतदान के चरणों को काफी सीमित रखा है, जिससे चुनाव प्रक्रिया को जल्द और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराया जा सके।
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मुख्य चुनाव आयुक्त का ऐलान: चुनाव की पूरी रूपरेखा

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दिल्ली के विज्ञान भवन में शाम चार बजे आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने मीडिया को संबोधित किया। CEC ज्ञानेश कुमार ने बताया कि आयोग ने हाल ही में इन सभी चुनावी राज्यों का दौरा कर वहां की जमीनी तैयारियों, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी का गहन जायजा लिया है।
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आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इन पांच राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश (पुडुचेरी) की कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। इस विशाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लगभग 17.4 करोड़ से अधिक पात्र मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे। मतदाताओं की सुविधा के लिए देशभर में कुल 2.19 लाख पोलिंग स्टेशन (मतदान केंद्र) बनाए जाएंगे, जहां 25 लाख से अधिक चुनाव अधिकारी और कर्मचारी तैनात रहेंगे।
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राज्यवार विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखें और पूरा कार्यक्रम

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चुनाव आयोग ने सुरक्षा बलों की उपलब्धता और स्थानीय त्योहारों व मौसम को ध्यान में रखते हुए मतदान का कार्यक्रम तय किया है। आइए जानते हैं किस राज्य में कब डाले जाएंगे वोट:
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1. असम (Assam Assembly Election 2026 Date) असम की 126 विधानसभा सीटों के लिए इस बार एक ही चरण (Single Phase) में चुनाव संपन्न कराए जाएंगे।
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    मतदान की तारीख: 9 अप्रैल 2026
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    नतीजे: 4 मई 2026
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2. केरल (Kerala Assembly Election 2026 Date) दक्षिण भारत के अहम राज्य केरल की 140 विधानसभा सीटों पर भी मतदाताओं को एक ही दिन वोट डालने का मौका मिलेगा।
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    मतदान की तारीख: 9 अप्रैल 2026
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    नतीजे: 4 मई 2026
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3. पुडुचेरी (Puducherry Assembly Election 2026 Date) केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 विधानसभा सीटों के लिए भी चुनाव आयोग ने सिंगल फेज में वोटिंग कराने का फैसला लिया है।
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    मतदान की तारीख: 9 अप्रैल 2026
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    नतीजे: 4 मई 2026
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4. तमिलनाडु (Tamil Nadu Assembly Election 2026 Date) तमिलनाडु, जहां 234 विधानसभा सीटें हैं, वहां भी चुनाव एक ही चरण में कराए जाएंगे। हालांकि, यहां मतदान की तारीख बाकी दक्षिण भारतीय राज्यों से अलग रखी गई है।
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    मतदान की तारीख: 23 अप्रैल 2026
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    नतीजे: 4 मई 2026
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5. पश्चिम बंगाल (West Bengal Assembly Election 2026 Date) पश्चिम बंगाल में विधानसभा की कुल 294 सीटें हैं। सुरक्षा कारणों और राज्य के बड़े भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए यहां चुनाव दो चरणों (Two Phases) में होंगे।
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    पहले चरण का मतदान (152 सीटें): 23 अप्रैल 2026
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    दूसरे चरण का मतदान (142 सीटें): 29 अप्रैल 2026
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    नतीजे: 4 मई 2026
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पश्चिम बंगाल में चरणों की संख्या में भारी कटौती

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इस बार के चुनाव कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता पश्चिम बंगाल में मतदान के चरणों में की गई भारी कटौती है। याद दिला दें कि साल 2021 के विधानसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में 8 चरणों में मतदान हुआ था, जो काफी लंबा और विवादित रहा था। राजनीतिक दलों ने इतने लंबे चुनाव पर सवाल भी उठाए थे।
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इस बार चुनाव आयोग ने राज्य में केवल दो चरणों में चुनाव कराने का ऐतिहासिक फैसला लिया है। विपक्षी दलों, खासकर वाम दलों और भाजपा ने भी आयोग से मांग की थी कि चुनाव कम से कम चरणों में कराए जाएं ताकि असामाजिक तत्वों की आवाजाही पर रोक लग सके और चुनाव निष्पक्षता से संपन्न हों।
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ईवीएम (EVM) में हुए नए बदलाव और सुविधाएं

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मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस वार्ता में ईवीएम (Electronic Voting Machine) की विश्वसनीयता और मतदाताओं की सुविधा के लिए किए गए नए बदलावों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने बताया कि इस बार के चुनाव में ईवीएम मशीन के बैलेट पेपर (Ballot Paper) को और अधिक सुलभ बनाया गया है।
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    रंगीन फोटो और बड़े फॉन्ट: इस बार ईवीएम पर सभी उम्मीदवारों की रंगीन फोटो (Color Photograph) लगाई जाएगी। इसके साथ ही, उम्मीदवारों के नाम और सीरियल नंबर बड़े फॉन्ट (Large Font) में प्रदर्शित किए जाएंगे, ताकि बुजुर्ग और कम दृष्टि वाले मतदाताओं को वोट डालने में कोई परेशानी न हो।
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    बुनियादी सुविधाएं: सभी 2.19 लाख मतदान केंद्रों पर पीने का पानी, शौचालय, और व्हीलचेयर जैसी 'सुनिश्चित न्यूनतम सुविधाएं' (Assured Minimum Facilities) उपलब्ध कराई जाएंगी।
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    मतदाताओं की सीमा: किसी भी पोलिंग बूथ पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1200 तय की गई है, ताकि लंबी कतारों से बचा जा सके।
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सुरक्षा और पारदर्शिता पर चुनाव आयोग का सख्त रुख

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स्वतंत्र, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। CEC ने सख्त लहजे में कहा कि चुनाव प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की हिंसा, धनबल (Money Power) या बाहुबल (Muscle Power) का इस्तेमाल बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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    वेबकास्टिंग (Webcasting): चुनाव में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए 100 प्रतिशत मतदान केंद्रों पर वेबकास्टिंग की जाएगी। इससे चुनाव आयोग के अधिकारी दिल्ली में बैठकर सीधे हर पोलिंग बूथ की चौबीसों घंटे निगरानी कर सकेंगे।
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    केंद्रीय बलों की तैनाती: खासकर पश्चिम बंगाल और असम के संवेदनशील (Sensitive) और अति-संवेदनशील इलाकों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की पर्याप्त टुकड़ियां तैनात की जाएंगी।
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    माइक्रो-ऑब्जर्वर: मतदान प्रक्रिया की निगरानी के लिए लगभग 49,000 माइक्रो-ऑब्जर्वर तैनात किए जाएंगे।
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मतदाता सूची का विशेष गहन संशोधन (SIR)

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चुनाव आयोग ने इन चुनावों से पहले एक बहुत बड़ा देशव्यापी अभियान चलाया था, जिसे 'विशेष गहन संशोधन' (Special Intensive Revision - SIR) नाम दिया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत यह कदम उठाया गया है।
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इस प्रक्रिया के तहत पुरानी मतदाता सूचियों को पूरी तरह से खंगाल कर नई सूचियां तैयार की गई हैं। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी पात्र मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित न रह जाए और कोई भी अयोग्य या फर्जी मतदाता सूची में शामिल न रहे। चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के बाद अब इन पांचों राज्यों की अंतिम मतदाता सूचियां (Electoral Rolls) प्रकाशित कर दी गई हैं।
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5 राज्यों का राजनीतिक समीकरण: किसकी बनेगी सरकार?

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इन पांच राज्यों के चुनाव केवल राज्य स्तर पर ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले ये विधानसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी (BJP) और विपक्षी गठबंधन (INDIA Bloc) के लिए एक बड़े 'लिटमस टेस्ट' की तरह हैं।
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पश्चिम बंगाल का रण (TMC vs BJP): पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की तृणमूल कांग्रेस (TMC) लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है। TMC अपने 'लक्ष्मी भंडार' जैसी लोकप्रिय कल्याणकारी योजनाओं के दम पर मैदान में है। वहीं, शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा (BJP) 'भ्रष्टाचार' और 'घुसपैठ' के मुद्दों पर ममता सरकार को घेरने में लगी है।
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तमिलनाडु की सियासत (DMK vs AIADMK vs TVK): तमिलनाडु में मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन (M.K. Stalin) के नेतृत्व वाली DMK और कांग्रेस का गठबंधन सत्ता बचाने की लड़ाई लड़ रहा है। विपक्ष में AIADMK और भाजपा का गठबंधन उन्हें कड़ी टक्कर दे रहा है। लेकिन इस बार सबसे दिलचस्प पहलू मशहूर अभिनेता विजय (Thalapathy Vijay) की नई पार्टी 'तमिलगा वेत्री कड़गम' (TVK) की एंट्री है, जिसने इस चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है।
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केरल का कड़ा मुकाबला (LDF vs UDF): केरल में पारंपरिक रूप से हर पांच साल में सत्ता बदलने का रिवाज रहा है, लेकिन 2021 में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन (Pinarayi Vijayan) के नेतृत्व वाले वामपंथी गठबंधन (LDF) ने इस मिथक को तोड़कर लगातार दूसरी बार सरकार बनाई थी। इस बार LDF रिकॉर्ड तीसरी जीत की तलाश में है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला UDF वापसी के लिए बेताब है। भाजपा भी राज्य में अपना खाता मजबूत करने की कोशिश में है।
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असम में हैट्रिक की जुगत में भाजपा: असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा (Himanta Biswa Sarma) के नेतृत्व में एनडीए (NDA) गठबंधन लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक रहा है। भाजपा यहां विकास, एनआरसी (NRC) और स्वदेशी अधिकारों के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही है। दूसरी ओर, कांग्रेस ने सत्ता वापसी के लिए कई क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर एक मजबूत विपक्षी गठबंधन तैयार किया है।
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पुडुचेरी का संग्राम: केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी की 30 सीटों पर मुख्यमंत्री एन. रंगासामी की पार्टी AINRC और भाजपा का गठबंधन सत्ता में है। यहां कांग्रेस और DMK का गठबंधन सत्ता में वापसी की जद्दोजहद कर रहा है।
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लोकतंत्र के इस महापर्व की शुरुआत

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भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में चुनाव किसी उत्सव से कम नहीं होते। चुनाव आयोग द्वारा घोषित की गई विधानसभा चुनाव 2026 की तारीखें राजनीतिक दलों के लिए एक नई चुनौती और आम जनता के लिए अपनी सरकार चुनने का सबसे बड़ा अवसर लेकर आई हैं। 9 अप्रैल से शुरू होकर 29 अप्रैल तक चलने वाले इस चुनावी महासमर में 17 करोड़ से ज्यादा वोटर्स इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का बटन दबाकर 824 विधायकों के भाग्य का फैसला करेंगे। 4 मई को जब ईवीएम (EVM) के ताले खुलेंगे, तब यह स्पष्ट हो जाएगा कि इन पांच राज्यों की जनता ने किस पार्टी की नीतियों पर भरोसा जताया है और किसे विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि वेबकास्टिंग और कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न होने वाले ये चुनाव भारतीय राजनीति की दिशा को किस ओर मोड़ते हैं।