विशेष रिपोर्ट: भारतीय छात्र राजनीति के इतिहास में पिछले 35 दिन एक नए अध्याय के रूप में दर्ज हो गए हैं। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और हालिया परीक्षा विवादों को लेकर शुरू हुआ एक छोटा सा प्रदर्शन देखते ही देखते एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन में तब्दील हो गया। इस पूरे आंदोलन के केंद्र में रही 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP), जिसने अपने अनोखे नाम और दृढ़ संकल्प से पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा।READ ALSO:-मुआवजा नहीं, हमारा बच्चा लौटा दो... कुर्सी जाने से नहीं भरेंगे जख्म!' शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर छलका NEET पीड़ित परिवारों का दर्द
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जब शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को आखिरकार अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा, तो पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके का एक बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया— "हम कॉकरोच हैं, एक बार घुसते हैं तो निकलते नहीं हैं।" इस भारी सफलता के बाद आंदोलन का भविष्य क्या होगा, आगे की रणनीति क्या है और पर्दे के पीछे क्या-क्या हुआ, इस पर CJP के प्रवक्ता आशुतोष राकां, लीगल हेड सौरव दास और 23 दिन भूख हड़ताल करने वाली JNU की छात्रा नेहा ने मीडिया से बातचीत करते हुए बेबाकी से जवाब दिए।
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आशुतोष राकां (प्रवक्ता, कॉकरोच जनता पार्टी) से सीधी बातचीत
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सवाल: आप लोगों ने इस छात्र आंदोलन को उस मुकाम तक पहुंचाया है, जहां एक केंद्रीय मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा। एक युवा नेता के तौर पर अब कैसा महसूस हो रहा है?
\r\n\r\nजवाब (आशुतोष): यह जीत सिर्फ हमारी नहीं, बल्कि देश के हर उस युवा की जीत है जो सिस्टम से निराश हो चुका था। सबसे बड़ी बात यह है कि लोग अब अपने हक के लिए, अपने असल मुद्दों के लिए लड़ना सीख रहे हैं। आज से महज दो महीने पहले किसी ने इस बात की कल्पना भी नहीं की थी कि छात्रों का एक ऐसा हुजूम सड़कों पर उतरेगा और सरकार को यूं जवाबदेह बनाएगा। हमारा यह ऑर्गनाइजेशन (CJP) मुश्किल से डेढ़ महीने पुराना है। जब कोई इतना नया संगठन इतना बड़ा आंदोलन खड़ा करता है, तो शुरुआत में लोगों को सिर्फ एक नयापन लगता है, उनका इंटरेस्ट रहता है। लेकिन असली चुनौती लोगों का भरोसा जीतना होता है। पिछले एक-डेढ़ महीने में हमारे आंदोलन की 'क्रेडिबिलिटी' (विश्वसनीयता) बहुत ज्यादा बढ़ी है। अब आम जनता और छात्रों को यह लगने लगा है कि यह प्लेटफार्म हवा-हवाई बातें नहीं कर रहा, बल्कि सच में कुछ बड़ा करने और इस सड़ी-गली व्यवस्था को बदलने की ईमानदार कोशिश कर रहा है।
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सवाल: शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तो हो गया। क्या अब आपकी पार्टी खत्म हो जाएगी या प्रदर्शन यहीं रोक दिया जाएगा?
\r\n\r\nजवाब (आशुतोष): बिल्कुल नहीं! यह तो बस शुरुआत है, हमारी पहली सीढ़ी है। देश के युवाओं और शिक्षा व्यवस्था के लिए हमारे बहुत बड़े सपने हैं। इस्तीफा एक प्रतीकात्मक जीत है, लेकिन असली लड़ाई तो सिस्टम को सुधारने की है। इसके बाद हमें कई स्तरों पर काम करना है। हम भारत की शिक्षा व्यवस्था की कमियों पर काम करेंगे, ताकि भविष्य में छात्रों को सड़कों पर न उतरना पड़े।
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सवाल: भविष्य में आप 'कॉकरोच जनता पार्टी' को किस तरीके से देख रहे हैं? आपका लॉन्ग-टर्म प्लान क्या है?
\r\n\r\nजवाब (आशुतोष): हम CJP को एक ऐसा निडर और मजबूत राजनीतिक/सामाजिक मंच बनाना चाहते हैं, जहां देश का कोई भी युवा बिना किसी डर, दबाव या झिझक के अपने मुद्दे उठा सके। एक ऐसा मंच जो विपक्ष की तरह सिर्फ राजनीति न करे, बल्कि हम सीधे तौर पर सरकार को उसके फैसलों, उसकी नीतियों और उसके कामकाज के लिए जनता के सामने जवाबदेह (Accountable) ठहरा सकें।
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सवाल: इस उग्र प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस लाठीचार्ज में घायल हुईं आपकी साथी साक्षी अब भी ICU में जिंदगी और मौत से जूझ रही हैं। उनके लिए पार्टी क्या कर रही है?
\r\n\r\nजवाब (आशुतोष): साक्षी का बलिदान और उनकी हिम्मत इस आंदोलन की सबसे बड़ी ताकत है। हमारी पूरी टीम लगातार उनके और उनके परिवार के संपर्क में है। सौरव खुद साक्षी के भाई से नियमित रूप से बात कर रहे हैं। सबसे राहत की बात यह है कि उनकी हालत अब स्थिर (Stable) है। वह होश में हैं और बोल पा रही हैं, हालांकि अभी भी उन्हें एहतियातन वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया है। उन्हें अस्पताल में जो भी बेहतरीन मेडिकल सुविधा चाहिए या भविष्य में जो भी लीगल (कानूनी) मदद की जरूरत होगी, हम एक परिवार की तरह उन्हें हर संभव मदद देंगे।
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सवाल: आपके संस्थापक अभिजीत दीपके को लेकर कुछ लोग कह रहे हैं कि उनमें एक परिपक्व नेता वाली नेतृत्व (Leadership) क्षमता नहीं है?
\r\n\r\nजवाब (आशुतोष): देखिए, यह बात 'आम लोग' नहीं कह रहे हैं। यह राइट-विंग मीडिया, सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं और आईटी सेल के एक खास हिस्से द्वारा जानबूझकर फैलाया जा रहा नैरेटिव है। आप खुद सोचिए, उस शख्स (अभिजीत) ने अपनी जान को खतरे में डाला है, अपना एक बहुत ही सफल और सेटल प्रोफेशनल करियर दांव पर लगा दिया है। महज एक-डेढ़ महीने के अंदर उस युवा ने देश की पूरी सोई हुई जनता को झकझोर कर जगा दिया है। एक लीडर से आप इससे ज्यादा और क्या उम्मीद करते हैं, मुझे नहीं पता।
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अभिजीत दीपके से मेरी निजी दोस्ती सात साल पुरानी है, लेकिन पिछले डेढ़ महीने में मैंने उस व्यक्ति को जो करते देखा है, वह अकल्पनीय है। मैंने उसे तपती धूप में जिस हालत में देखा है, पुलिस से लड़ते हुए, अकेले में रोते हुए, और फिर उठकर हजारों छात्रों को समझाते हुए देखा है। मेरा यह दृढ़ता से मानना है कि आज के इस कठिन दौर में इस आंदोलन को इससे बेहतर नेतृत्व नहीं मिल सकता था। वह हर दिन एक बेहतर और परिपक्व नेता बनकर उभर रहा है।
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सौरव दास (लीगल मामलों के प्रभारी, CJP) से बातचीत:-
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सवाल: जब आप लोग पहली बार बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से बातचीत करने उनके दफ्तर गए थे, तो क्या सच में आपके फोन रखवा लिए गए थे? उस दिन क्या हुआ था?
\r\n\r\nजवाब (सौरव): जी हां, यह बिल्कुल सच है। जैसे ही हम लोग अंदर गए, जाते ही हमारा फोन जब्त कर लिया गया। हमसे साफ कहा गया कि अंदर फोन ले जाना 'अलाउड' नहीं है। हमने शुरुआत में सोचा कि ठीक है, कोई बात नहीं, हम एक बड़े नेता की सिक्योरिटी सिचुएशन को समझते हैं। लेकिन इसके बाद उन्होंने हमें बहुत देर तक एक कमरे में इंतजार ही कराते रखा, कोई मिलने नहीं आया।
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जब बहुत समय बीत गया, तो हमने अधिकारियों से कहा कि हम अपना फोन इस्तेमाल कर लेते हैं, बाहर अपनी टीम के लोगों से बात कर लेते हैं कि वहां प्रदर्शन की सिचुएशन क्या है। लेकिन वे हमें अपना ही फोन इस्तेमाल करने के लिए अलाउ नहीं कर रहे थे। तब हमारा सब्र टूट गया। हमने उन्हें साफ चेतावनी दी कि अगर आप हमें हमारे साथियों से बात नहीं करने देंगे, तो हम इसी दफ्तर के अंदर ही धरना देकर बैठ जाएंगे। हमारी इस सख्ती के बाद उन्होंने हमें फोन अलाउ किया। फिर थोड़ी देर बाद नड्डा जी से हमारी बात हुई, हमने अपनी मांगें रखीं और हम वापस आ गए।
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सवाल: लोग कह रहे हैं कि अभिजीत दीपके लीडर जैसे नहीं लगते, इसलिए उन पर या इस आंदोलन पर पूरी तरह भरोसा नहीं हो रहा?
\r\n\r\nजवाब (सौरव): जो लोग यह कह रहे हैं, उन्हें जमीनी हकीकत नहीं पता। हमने यहां जंतर-मंतर पर 32-33 दिन से ज्यादा समय तक अनवरत प्रोटेस्ट किया है। क्या बिना किसी मजबूत लीडरशिप के इतने लंबे समय तक हजारों छात्रों को एक साथ जोड़े रखना संभव था? बिल्कुल नहीं। यहां कोर टीम में जितने भी लोग हैं, सभी में लीडरशिप क्वालिटीज हैं। हां, हम लोग पहली बार इतने बड़े स्तर का प्रदर्शन कर रहे हैं, इसलिए हमारे काम करने का तरीका पारंपरिक राजनेताओं जैसा नहीं है।
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मुझे नहीं लगता कि भारत के इतिहास में ऐसा कभी हुआ होगा कि तीन लोग (अभिजीत, आशुतोष और मैं), जो इतने यंग हैं, उन्हें इतनी विशाल और उग्र भीड़ को हैंडल करने का मौका मिला हो। हम अपनी इस जिम्मेदारी की गंभीरता को समझते हैं। हम कोई भी फैसला अकेले नहीं लेते, हम लोग हमेशा एक-दूसरे की सलाह और सहमति से ही कदम उठाते हैं।
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सवाल: आप तीनों (अभिजीत, आशुतोष और सौरव) किस तरह से काम करते हैं? किसके पास क्या-क्या जिम्मेदारी है?
\r\n\r\nजवाब (सौरव): हम तीनों ने अपने-अपने काम और जिम्मेदारियां बांट रखी हैं ताकि आंदोलन सुचारू रूप से चले। जब भी सरकार, प्रशासन या पुलिस से बातचीत करने की बारी आती है, तो फ्रंटलाइन पर मैं और आशु चले जाते हैं। वहीं, आंदोलन से जुड़ी जटिल लीगल (कानूनी) चीजों, ड्राफ्टिंग और बैकएंड की रणनीति पर अभिजीत और मैं मिलकर काम करते हैं।
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सवाल: जेपी नड्डा से मिलने वाले डेलिगेशन में अभिजीत दीपके क्यों नहीं गए? लोगों ने कहा कि 20 जुलाई को लीडरशिप गायब थी?
\r\n\r\nजवाब (सौरव): यह लोगों की गलतफहमी है और जानबूझकर फैलाई गई अफवाह है। अभिजीत उस दिन वहीं थे। रणनीति के तहत उनका वहां रुकना जरूरी था। अगर अभिजीत भी प्रोटेस्ट साइट छोड़कर मीटिंग में चले जाते, तो पीछे से भीड़ उग्र हो सकती थी। साथ ही, विरोधियों को यह कहने का मौका मिल जाता कि लीडरशिप डर कर भाग गई है। आंदोलन को लीडरलेस होने से बचाने के लिए उनका वहां मौजूद रहना आवश्यक था।
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सवाल: CJP और इस पूरे छात्र आंदोलन का भविष्य क्या देख रहे हैं? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने से क्या अब सब खत्म हो जाएगा?
\r\n\r\nजवाब (सौरव): यह एक बहुत बड़ा भ्रम है। जंतर-मंतर का 'प्रदर्शन' (Protest) भले ही खत्म हो जाएगा, लेकिन व्यवस्था परिवर्तन का 'आंदोलन' (Movement) हमेशा चलता रहेगा।
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JNU छात्रा नेहा (AISA नेता) से बातचीत: 23 दिन की भूख हड़ताल का अनुभव
\r\n\r\nइस ऐतिहासिक प्रोटेस्ट के दौरान लद्दाख के पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक के साथ JNU (जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय) की स्टूडेंट और AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) की नेता नेहा भी 23 दिनों तक भूख हड़ताल पर बैठी रहीं। उनकी इस तपस्या ने आंदोलन को एक नई ऊर्जा दी।
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सवाल: नेहा, अब तक का आपका सफर कैसा रहा? अभिजीत दीपके और पूरी CJP टीम के साथ आप लोग कैसे जुड़े?
\r\n\r\nजवाब (नेहा): मैं अपने अंडरग्रेजुएट (Undergrad) के तीसरे साल से ही सक्रिय छात्र राजनीति (Student Activism) में हूं। मैंने 2019-20 का इक्वल सिटीजनशिप (CAA-NRC) आंदोलन, ऐतिहासिक किसान आंदोलन और रेसलर्स (पहलवानों) का प्रोटेस्ट बहुत करीब से देखा है और उसमें हिस्सा लिया है। इन तमाम बड़े आंदोलनों से मुझे एक ही सीख मिली कि अगर हम छात्र और युवा ठान लें, तो हम व्यवस्था पर न सिर्फ कड़े सवाल उठा सकते हैं, बल्कि उसकी नीतियों में सीधा दखल भी दे सकते हैं। ये तमाम लड़ाइयां हम लोग लंबे समय से लड़ रहे हैं।
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हम छात्र संगठन हमेशा से चाहते थे कि देश में 'एजुकेशन' के मुद्दे पर एक बहुत ही सीरियस और राष्ट्रीय स्तर की बातचीत हो। इसी दौरान अभिजीत दीपके ने हमसे संपर्क किया। उन्होंने बताया कि वे शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगने के लिए दिल्ली में एक बड़ा प्रदर्शन करने वाले हैं और वे चाहते हैं कि देश के प्रमुख स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन इस लड़ाई का अहम हिस्सा बनें। इसके बाद हमारी एक विस्तृत मीटिंग हुई। मीटिंग में यह तय हुआ कि सोनम वांगचुक जी धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते हुए भूख हड़ताल पर बैठेंगे। हालात की गंभीरता को देखते हुए, हमने बतौर स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन (AISA) इस अनशन में सीधे तौर पर शामिल होने का कड़ा फैसला लिया।
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सवाल: अभिजीत दीपके से आपकी पहली मुलाकात कैसे हुई थी?
\r\n\r\nजवाब (नेहा): वह मुलाकात बहुत ही अजीब और यादगार थी। वे सीधे अमेरिका से फ्लाइट पकड़कर जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के लिए आए थे। जब वे पहुंचे, तो उन्होंने कहा कि "मैं बुरी तरह जेट लैग (Jet Lag) में हूं, मेरे सिर में भयंकर दर्द हो रहा है और मैंने कई घंटों से कुछ भी नहीं खाया है।" उसी बदहाल और थकी हुई हालत में हम उनसे पहली बार मिले थे। हमारी पहले सिर्फ फोन पर बात हुई थी, लेकिन आमना-सामना उसी प्रोटेस्ट साइट पर उस तनावपूर्ण माहौल में हुआ था। उनकी वह लगन देखकर हमें लगा कि यह इंसान सच में कुछ बदलाव चाहता है।
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सवाल: 'कॉकरोच जनता पार्टी' को लेकर आपकी क्या प्लानिंग है? क्या आप पार्टी जॉइन करेंगी?
\r\n\r\nजवाब (नेहा): मैं स्पष्ट कर दूं कि मैं 'कॉकरोच जनता पार्टी' का हिस्सा नहीं हूं और न ही उसे जॉइन करने का मेरा कोई विचार है। मैं 'ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन' (AISA) की एक समर्पित कार्यकर्ता हूं। हम दोनों संगठनों (AISA और CJP) का एक बहुत ही शानदार 'वर्किंग रिलेशनशिप' है क्योंकि यह मूवमेंट (आंदोलन) देश के भविष्य के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है। हम चाहते हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी देश भर में और बेहतर काम करे, लड़े और युवाओं को जागरूक करे। हमारी पूरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।
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सवाल: तो क्या AISA और कॉकरोच जनता पार्टी का साथ बस इसी धरने तक सीमित था?
\r\n\r\nजवाब (नेहा): ऐसा बिल्कुल नहीं है। जब भी देश में छात्रों के हक के ऐसे मुद्दे उठेंगे, शिक्षा को बचाने की बात आएगी, जिसमें हम दोनों संगठनों को साथ आकर लड़ाई को मजबूत करना होगा, तो हम भविष्य में भी पूरी एकजुटता के साथ जरूर सामने आएंगे।
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शिक्षा मंत्री का इस्तीफा भले ही इस 35 दिन लंबे धरने का तात्कालिक परिणाम हो, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी और छात्र नेताओं के इन बयानों से साफ है कि भारत में युवा राजनीति एक नए और आक्रामक युग में प्रवेश कर चुकी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि यह 'कॉकरोच' सिस्टम की जड़ों में घुसकर आने वाले समय में देश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में और क्या बड़े बदलाव लेकर आता है।