दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार विस्फोट की शुरुआती फॉरेंसिक जांच में एक महत्वपूर्ण खुलासा हुआ है, जिसने इस हमले की प्रकृति को स्पष्ट कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, विस्फोट को अंजाम देने के लिए अमोनियम नाइट्रेट (Ammonium Nitrate), फ्यूल ऑयल (Fuel Oil) और डेटोनेटर के घातक मिश्रण का इस्तेमाल किया गया था। इस संयोजन को आमतौर पर ANFO (अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल) विस्फोटक के नाम से जाना जाता है। इस अमोनियम नाइट्रेट ब्लास्ट ने जांच एजेंसियों के सामने दो बड़ी पहेलियाँ खड़ी कर दी हैं: पहला, इतने संवेदनशील विस्फोटक का उपयोग क्यों किया गया, और दूसरा, घायलों के शरीर पर छर्रों या स्प्लिंटर (Splinter) के पारंपरिक निशान क्यों नहीं मिले।Read also:-दिल्ली धमाके के बाद UP में ATS एक्टिव, लखनऊ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से 7 संदिग्ध हिरासत में
\r\n\r\n\r\nधमाके की प्रकृति: ANFO विस्फोटक की भूमिका
\r\nजांच अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली धमाके में अमोनियम नाइट्रेट ब्लास्ट का उपयोग इस बात की ओर इशारा करता है कि आतंकवादियों का लक्ष्य अधिकतम नुकसान पहुँचाना था। अमोनियम नाइट्रेट स्वयं में विस्फोटक नहीं है, लेकिन जब इसे डीजल या पेट्रोल जैसे ईंधन तेल के साथ मिलाया जाता है और एक डेटोनेटर से सक्रिय किया जाता है, तो यह अत्यधिक विनाशकारी ANFO विस्फोटक बन जाता है।
\r\n\r\n
- \r\n
- ऊर्जा और दबाव: फरीदाबाद मॉड्यूल से बरामद 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट की मात्रा को देखते हुए, यह अनुमान लगाया जा रहा है कि विस्फोटक की क्षमता बहुत अधिक थी। ANFO विस्फोट भारी दबाव और ऊष्मा (Heat) पैदा करता है, जो आसपास की इमारतों और वाहनों को नष्ट कर देता है, जैसा कि घटनास्थल पर देखा गया। \r\n
- सुलभता: आरडीएक्स (RDX) या टीएनटी (TNT) जैसे सैन्य-ग्रेड विस्फोटकों की तुलना में अमोनियम नाइट्रेट कीटनाशक या निर्माण सामग्री के रूप में आसानी से उपलब्ध होता है, जिससे आतंकवादियों के लिए इसे हासिल करना आसान हो जाता है। \r\n
जांच की पहेली: छर्रे क्यों नहीं मिले?
\r\nसबसे बड़ी पहेली यह है कि आमतौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) या किसी भी पारंपरिक आतंकी बम में, धातु के टुकड़े (छर्रे, कीलें, बॉल बेयरिंग) का इस्तेमाल हताहतों की संख्या बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं मिला है।
\r\n\r\n\r\nसबसे बड़ी पहेली यह है कि आमतौर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) या किसी भी पारंपरिक आतंकी बम में, धातु के टुकड़े (छर्रे, कीलें, बॉल बेयरिंग) का इस्तेमाल हताहतों की संख्या बढ़ाने के लिए किया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं मिला है।
\r\n\r\n
- \r\n
- LNJP अस्पताल के डॉक्टर्स का बयान: LNJP अस्पताल में शवों की जांच करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि मृतकों के शरीर पर छर्रे या स्प्लिंटर की चोटें नहीं मिली हैं। उन्होंने यह भी नोट किया कि IED विस्फोटों में शरीर अक्सर काले पड़ जाते हैं (Charring), लेकिन इस मामले में यह प्रभाव भी कम दिखा है। \r\n
- लक्ष्य की प्रकृति: छर्रे न मिलने से यह संकेत मिलता है कि अमोनियम नाइट्रेट ब्लास्ट का उद्देश्य लोगों को छर्रों से मारना नहीं, बल्कि उच्च दबाव वाली विस्फोटक लहर (Blast Wave) और आग से नुकसान पहुँचाना था। यह फिदायीन हमला खुद को उड़ाने पर केंद्रित हो सकता है, जैसा कि मास्टरमाइंड डॉ. उमर मोहम्मद के मामले में आशंका जताई गई है। \r\n
- क्रेटर की अनुपस्थिति: फॉरेंसिक टीमों ने घटनास्थल पर कोई गहरा गड्ढा (Crater) न मिलने की बात भी नोट की है, जो उच्च तीव्रता वाले भूमिगत विस्फोटों में आमतौर पर देखा जाता है। \r\n
\r\n\r\n
जांच की दिशा: 'व्हाइट कॉलर' आतंकवाद पर फोकस
\r\nअमोनियम नाइट्रेट ब्लास्ट में विस्फोटक के प्रकार ने इस मामले को फरीदाबाद में भंडाफोड़ हुए 'व्हाइट कॉलर' डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल से जोड़ दिया है। यह मॉड्यूल कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था।
\r\n\r\n\r\nअमोनियम नाइट्रेट ब्लास्ट में विस्फोटक के प्रकार ने इस मामले को फरीदाबाद में भंडाफोड़ हुए 'व्हाइट कॉलर' डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल से जोड़ दिया है। यह मॉड्यूल कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा था।
\r\nएनआईए (NIA) अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या डॉ. उमर ने अपनी बौखलाहट में जल्दबाजी में IED को बिना छर्रों के इस्तेमाल किया, या यह जानबूझकर एक ऐसा विस्फोटक उपकरण था जो केवल बड़े पैमाने पर आग और दबाव की क्षति पहुँचाने के लिए डिज़ाइन किया गया था। एजेंसी हिरासत में लिए गए अन्य छह संदिग्धों से इन सभी पहलुओं पर पूछताछ कर रही है।
\r\nदिल्ली धमाके में अमोनियम नाइट्रेट ब्लास्ट की पुष्टि ने मामले की गंभीरता को बढ़ा दिया है। इस घातक विस्फोटक का इस्तेमाल एक सुनियोजित आतंकी साजिश की ओर इशारा करता है, जिसे कथित तौर पर डॉ. उमर मोहम्मद ने अंजाम दिया था। छर्रों का न मिलना और शरीर पर कालेपन की कमी, हालांकि असामान्य है, लेकिन यह विस्फोट के प्रकार (ANFO) और उसके तत्काल प्रभाव से जुड़ी हो सकती है। जांच एजेंसियों को अब विस्फोटक की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और इस मॉड्यूल के पूरे नेटवर्क का जल्द से जल्द खुलासा करना होगा ताकि देश में ऐसी आतंकी साजिशों को रोका जा सके।