खबरीलाल डेस्क
नई दिल्ली: अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी की दिल्ली में शुक्रवार (10 अक्टूबर) को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस एक बड़े विवाद का केंद्र बन गई है। इस कार्यक्रम में महिला पत्रकारों की एंट्री पर रोक लगाने की खबरें सामने आने के बाद, भारतीय राजनीति में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिली हैं।READ ALSO:-दिवाली 2025: पटाखों पर पूर्ण बैन 'असंभव सा', सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी; दिल्ली-NCR में ग्रीन पटाखों की बिक्री पर फैसला सुरक्षित
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कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि, "भारत में हमारे ही देश की कुछ सबसे सक्षम महिलाओं का अपमान कैसे होने दिया गया, जबकि महिलाएँ ही देश की रीढ़ और गौरव हैं।"
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केंद्र सरकार ने विवाद से झाड़ा पल्ला
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विवाद के तूल पकड़ने पर, भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने तुरंत इस मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है।
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              विदेश मंत्रालय का बयान: MEA ने कहा कि अफगानिस्तान के विदेश मंत्री की प्रेस कॉन्फ्रेंस के आयोजन में भारत सरकार का कोई रोल नहीं था। न ही उनकी तरफ से पत्रकारों को बुलाया गया था। यह प्रेस                    कॉन्फ्रेंस अफगानिस्तानी दूतावास में आयोजित हुई थी और दूतावास भारत सरकार के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।
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MEA के अनुसार, जब अफगानी मंत्री दिल्ली आए, तो मुंबई स्थित अफगानिस्तान के काउंसिल जनरल ने ही चुनिंदा पत्रकारों को आमंत्रण भेजा था।
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प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल पुरुष पत्रकार
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अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री अमीर मुत्तकी 9 से 16 अक्टूबर तक भारत दौरे पर हैं। उन्होंने शुक्रवार को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से द्विपक्षीय वार्ता की, जिसके बाद कोई संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई। मुत्तकी ने बाद में अकेले अफगानिस्तान दूतावास में मीडिया से बातचीत की।
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    पत्रकार चयन: इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में केवल चुनिंदा पुरुष पत्रकार और अफगान दूतावास के अधिकारी ही शामिल हुए।
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    दावा: कई महिला पत्रकारों ने सोशल मीडिया पर यह दावा किया कि उन्हें प्रेस कॉन्फ्रेंस स्थल पर प्रवेश ही नहीं दिया गया।
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    तालिबान का हस्तक्षेप: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह निर्णय मुत्तकी के साथ आए तालिबान अधिकारियों ने लिया था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में कौन शामिल होगा। हालांकि, यह साफ नहीं है कि इस पाबंदी के बारे में तालिबान ने भारत सरकार को पहले बताया था या नहीं।
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विपक्ष ने 'नारी शक्ति' के नारों पर उठाए सवाल
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इस घटना को लेकर विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार की 'नारी शक्ति' और महिलाओं के सम्मान से जुड़े नारों पर सवाल उठाए हैं।
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    राहुल गांधी (कांग्रेस सांसद और नेता प्रतिपक्ष): "PM मोदी, जब आप महिला पत्रकारों को सार्वजनिक मंचों से बाहर रखने की इजाजत देते हैं, तो आप भारत की हर महिला को यह बता रहे होते हैं कि आप बहुत कमजोर हैं और उनके लिए खड़े नहीं हो सकते। इस तरह के भेदभाव पर आपकी चुप्पी नारी शक्ति पर आपके नारों का खोखलापन उजागर करती है।"
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    पी चिदंबरम (पूर्व गृह मंत्री): "मुझे लगता है कि जब पुरुष पत्रकारों को पता चला कि उनकी महिला सहकर्मियों को नहीं बुलाया गया है, तो उन्हें विरोध में बाहर चले जाना चाहिए था।"
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    महुआ मोइत्रा (TMC सांसद): उन्होंने धार्मिक कट्टरता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि एक विदेशी मुस्लिम कट्टरपंथी हमारी जमीन पर हमारे कानूनों और मूल्यों का उल्लंघन करते हुए हमारी औरतों के साथ भेदभाव कर सकता है, इस पर विचार होना चाहिए।
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अफगानिस्तान में महिलाओं पर प्रतिबंध
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ज्ञात हो कि अफगानिस्तान में 15 अगस्त, 2021 को तालिबान हुकूमत के सत्ता में आने के बाद से ही महिलाओं पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। इनमें लड़कियों के स्कूल जाने, सार्वजनिक रूप से बोलने, चेहरा दिखाने और खेलों में भाग लेने पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल हैं। दिल्ली में हुई यह घटना तालिबान की महिला विरोधी नीतियों को भारतीय धरती पर दर्शाती है।