देशभर में आम आदमी को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। केंद्र सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। देश में लागू हुए इस नए LPG Cylinder Price Hike के तहत घरेलू गैस सिलेंडर 60 रुपए तक महंगा हो गया है। राजधानी दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाला LPG गैस सिलेंडर अब 913 रुपए का मिलेगा। पहले इसकी कीमत 853 रुपए थी। वहीं, रेस्टोरेंट और होटल कारोबारियों को भी झटका देते हुए 19 किलोग्राम वाले कॉमर्शियल सिलेंडर में 115 रुपए का भारी इजाफा किया गया है, जिसके बाद इसकी नई कीमत 1883 रुपए हो गई है।Read also:-यूपी में सस्ती होगी बिजली या थमेगी रफ्तार? एक तरफ दरें घटाने की मांग, दूसरी ओर 'बिजली बिल 2025' पर देशव्यापी हड़ताल की चेतावनी
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बढ़ी हुई ये नई कीमतें 7 मार्च 2026 से पूरे देश में लागू हो गई हैं। सरकार ने गैस के दामों में यह बढ़ोत्तरी एक ऐसे संवेदनशील वक्त में की है जब अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही भीषण जंग के चलते पूरी दुनिया में सप्लाई चेन बाधित हो रही है और देश में भी गैस किल्लत की गहरी आशंका जताई जा रही है।
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इस विस्तृत रिपोर्ट में हम इस LPG Cylinder Price Hike के पीछे के अंतरराष्ट्रीय कारणों, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के संकट, सरकार द्वारा उठाए गए इमरजेंसी कदमों और आम जनता के साथ-साथ कॉर्पोरेट सेक्टर पर पड़ने वाले इसके असर का बारीकी से विश्लेषण करेंगे।
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LPG Cylinder Price Hike: पिछली बढ़ोतरी और मौजूदा स्थिति
\r\n\r\nदेश में गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने का यह सिलसिला नया नहीं है, लेकिन इस बार इसके पीछे के कारण पूरी तरह से ग्लोबल हैं। इससे पहले सरकार ने 8 अप्रैल 2025 को घरेलू सिलेंडर के दामों में 50 रुपए का इजाफा किया था। यानी, घरेलू उपभोक्ताओं के लिए यह बढ़ोतरी करीब एक साल के लंबे अंतराल के बाद की गई है।
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वहीं, कॉमर्शियल गैस उपभोक्ताओं की बात करें तो 1 मार्च 2026 को ही कॉमर्शियल गैस सिलेंडर के दाम 31 रुपए तक बढ़ाए गए थे और अब मात्र एक हफ्ते के भीतर इसमें 115 रुपए का और बड़ा इजाफा कर दिया गया है। अचानक हुए इस LPG Cylinder Price Hike ने घरेलू बजट से लेकर रेस्टोरेंट मालिकों तक की चिंता बढ़ा दी है।
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सप्लाई संकट की 2 बड़ी वजहें: आखिर क्यों हुआ LPG Cylinder Price Hike?
\r\n\r\nवर्तमान में जो LPG Cylinder Price Hike हुआ है, वह मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस और कच्चे तेल की सप्लाई में आई भारी रुकावट का नतीजा है। मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में बढ़ते तनाव ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट को हिलाकर रख दिया है। भारत के लिए इस सप्लाई संकट के पीछे मुख्य रूप से दो बड़े कारण हैं:
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1. 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) का लगभग बंद होना
\r\n\r\nभारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए मौजूदा समय में सबसे बड़ी चुनौती 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का लगभग बंद हो जाना है। यह करीब 167 किलोमीटर लंबा एक बेहद अहम समुद्री जलमार्ग (Waterway) है, जो फारस की खाड़ी (Persian Gulf) को अरब सागर और ओमान की खाड़ी से जोड़ता है।
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इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच चल रही भीषण जंग के कारण यह रूट अब जहाजों के लिए सुरक्षित नहीं रह गया है। इस जलमार्ग पर बढ़ते सैन्य खतरे और हमलों की आशंका को देखते हुए कोई भी बड़ा कमर्शियल तेल या गैस टैंकर वहां से गुजरने की हिम्मत नहीं कर रहा है।
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इस जलमार्ग की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनिया के कुल पेट्रोलियम व्यापार का लगभग 20% हिस्सा यहीं से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे बड़े तेल उत्पादक देश भी अपने कच्चे तेल के निर्यात के लिए पूरी तरह इसी रूट पर निर्भर हैं।
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भारत पर असर: भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल (Crude Oil) और 54% लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) इसी रास्ते से मंगाता है। यहां तक कि ईरान खुद इसी रूट से अपना एक्सपोर्ट करता है। रूट ब्लॉक होने से भारत तक गैस और तेल पहुंचने में देरी हो रही है और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट (Freight Charges) कई गुना बढ़ गई है, जिसका सीधा असर इस LPG Cylinder Price Hike के रूप में देखा जा रहा है।
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2. कतर के LNG प्लांट पर ड्रोन हमला और प्रोडक्शन का रुकना
\r\n\r\nगैस सप्लाई में कमी का दूसरा और सबसे तात्कालिक कारण कतर में हुआ ड्रोन हमला है। पिछले हफ्ते अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई अहम सैन्य ठिकानों पर स्ट्राइक की थी। इसके सीधे जवाब में ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए UAE, कतर, कुवैत और सऊदी अरब जैसे देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों और कमर्शियल पोर्ट्स को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।
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ईरान द्वारा किए गए इन खतरनाक ड्रोन हमलों के बाद, भारत को गैस सप्लाई करने वाले सबसे बड़े देश कतर ने सुरक्षा कारणों से अपने प्रमुख LNG प्लांट का प्रोडक्शन अनिश्चित काल के लिए रोक दिया है।
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भारत पर असर: कतर के प्लांट बंद होने से भारत में गैस की सप्लाई अचानक से बहुत ज्यादा घट गई है। आंकड़े बताते हैं कि भारत अपनी कुल जरूरत की लगभग 40% LNG (करीब 2.7 करोड़ टन सालाना) सिर्फ कतर से ही आयात करता है। प्रोडक्शन रुकने से भारत के गैस रिजर्व पर दबाव आ गया है।
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सिलेंडर की किल्लत रोकने के लिए सरकार का बड़ा एक्शन
\r\n\r\nइस LPG Cylinder Price Hike के बीच देश में गैस सिलेंडर की कोई फिजिकल कमी न हो (Out of stock situation), इसके लिए सरकार ने युद्ध स्तर पर कदम उठाए हैं। अंतरराष्ट्रीय संकट को भांपते हुए भारत सरकार ने 5 मार्च 2026 को अपनी "इमरजेंसी पावर" (Emergency Powers) का इस्तेमाल किया।
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सरकार ने देश की सभी ऑयल रिफाइनरी कंपनियों को तत्काल प्रभाव से एलपीजी (LPG - Liquefied Petroleum Gas) का घरेलू उत्पादन बढ़ाने का सख्त आदेश दिया है। इस आदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता और गैस की ग्लोबल सप्लाई चैन सामान्य नहीं होती, तब तक सभी रिफाइनरियां 'प्रोपेन' (Propane) और 'ब्यूटेन' (Butane) का इस्तेमाल सिर्फ और सिर्फ रसोई गैस (LPG) बनाने के लिए ही करेंगी।
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सरकारी कंपनियों को ही होगी सप्लाई
\r\n\r\nसरकार के आदेश के मुताबिक, देश में मौजूद सभी प्राइवेट और सरकारी रिफाइनरी कंपनियों को अपने द्वारा उत्पादित प्रोपेन और ब्यूटेन की पूरी सप्लाई सिर्फ सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को ही करनी होगी।
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इन सरकारी तेल कंपनियों में मुख्य रूप से शामिल हैं:
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- \r\n इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL)\r\n \r\n
- \r\n हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL)\r\n \r\n
- \r\n भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL)\r\n \r\n
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सरकार के इस बड़े और कड़े कदम का इकलौता मकसद यह है कि संकट के इस दौर में भी आम कंज्यूमर्स (घरेलू उपभोक्ताओं) को बिना किसी रुकावट के गैस सिलेंडर की सप्लाई मिलती रहे और बाजार में पैनिक बाइंग (Panic Buying) की स्थिति पैदा न हो।
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CNG कंपनियों ने सरकार को लिखी चिट्ठी, बड़े संकट की चेतावनी
\r\n\r\nजहां एक तरफ LPG Cylinder Price Hike ने आम जनता को परेशान किया है, वहीं दूसरी तरफ ऑटोमोबाइल सेक्टर और सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) नेटवर्क भी इस युद्ध की आंच से झुलस रहा है। देश में गैस की भारी किल्लत की आशंका को देखते हुए 'एसोसिएशन ऑफ सीजीडी एंटिटीज' (ACE - Association of CGD Entities) ने सरकारी गैस कंपनी गेल (GAIL India) को एक आपातकालीन पत्र लिखकर स्थिति पर स्पष्टता मांगी है।
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CNG सप्लाई करने वाली कंपनियों का साफ कहना है कि अगर कतर से आने वाली लंबी अवधि के कॉन्ट्रैक्ट वाली "सस्ती गैस" उन्हें समय पर नहीं मिली, तो मजबूरी में उन्हें 'स्पॉट मार्केट' (Spot Market) से बेहद महंगी गैस खरीदनी पड़ेगी।
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स्पॉट मार्केट में कीमतों में भारी अंतर
\r\n\r\nवर्तमान युद्ध की स्थिति के कारण ग्लोबल स्पॉट मार्केट में गैस की कीमत आसमान छू रही है। जानकारी के मुताबिक, स्पॉट मार्केट में LNG की कीमत फिलहाल 25 डॉलर प्रति यूनिट (MMBtu) के पार पहुंच गई है। यह कीमत कतर के साथ हुए लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट वाली गैस की कीमत से दोगुनी से भी ज्यादा है।
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EV में शिफ्ट हो जाएंगे लोग: कंपनियों का डर
\r\n\r\nCNG कंपनियों ने सरकार को चेतावनी दी है कि अगर स्पॉट मार्केट से महंगी गैस खरीदकर CNG के दाम बढ़ाए गए, तो इसका सीधा और बहुत बुरा असर उनके बिजनेस पर पड़ेगा। कंपनियों को डर है कि अगर पेट्रोल-डीजल और CNG के दामों में ज्यादा अंतर नहीं रहा, तो आम लोग और फ्लीट ऑपरेटर्स (कैब, ऑटो वाले) परमानेंटली इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV - Electric Vehicles) की ओर शिफ्ट हो जाएंगे।
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अगर ऐसा हुआ तो भारत का गैस सेक्टर, जिसने पिछले एक दशक में हजारों करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया है, उसे भारी और स्थायी नुकसान उठाना पड़ेगा।
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सरकार के ESMA आदेश का प्राइवेट कंपनियों (RIL) पर असर
\r\n\r\nसरकार ने प्रोपेन और ब्यूटेन को लेकर जो निर्देश जारी किए हैं, उसका सीधा और नकारात्मक असर भारत की प्राइवेट सेक्टर की रिफाइनरी कंपनियों पर पड़ने वाला है। इसमें सबसे बड़ा नाम रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और नायरा एनर्जी (Nayara Energy) का है।
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सामान्य दिनों में, रिफाइनरियां प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का एक बड़ा हिस्सा पेट्रोकेमिकल (Petrochemicals) उत्पाद बनाने में इस्तेमाल करती हैं। इन गैसों का डायवर्जन (LPG की तरफ) होने से रिफाइनरियों में 'अल्काइलेट्स' (Alkylates) और 'पॉलीप्रोपाइलीन' (Polypropylene) के प्रोडक्शन में भारी कमी आएगी।
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अल्काइलेट्स का इस्तेमाल प्रीमियम पेट्रोल की ग्रेडिंग (Octane rating) सुधारने और उसे बेहतर बनाने में किया जाता है। एक्सपर्ट्स और ट्रेड सोर्सेज का स्पष्ट कहना है कि प्रोपेन और ब्यूटेन को उच्च मुनाफे वाले पेट्रोकेमिकल के बजाय कम मुनाफे वाली LPG बनाने में झोंकने से प्राइवेट कंपनियों के 'ग्रॉस रिफाइनिंग मार्जिन' (GRM) पर सीधा असर पड़ेगा।
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सरल शब्दों में समझें तो पॉलीप्रोपाइलीन (जिससे प्लास्टिक और फाइबर बनता है) और अल्काइलेट्स जैसे पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बाजार में LPG गैस के मुकाबले बहुत बेहतर और ऊंची कीमत पर बिकते हैं। कंपनियों को अब देशहित में अपने इस मुनाफे की कुर्बानी देनी होगी।
\r\n\r\nराहत की बात: अकेले 'होर्मुज रूट' के भरोसे नहीं है भारत
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इस LPG Cylinder Price Hike और ग्लोबल तनाव के बीच हालात निश्चित रूप से चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश की जनता को आश्वस्त किया है कि किसी को भी घबराने या पैनिक बाइंग करने की जरूरत नहीं है। भारत सरकार ने इस तरह के झटकों (Supply shocks) से निपटने के लिए पहले से ही कुछ ठोस रणनीतियां बना रखी हैं:
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1. रूस पर बढ़ती निर्भरता (Diversification of Oil Imports): भारत अब तेल आयात के लिए केवल मिडिल ईस्ट के भरोसे नहीं बैठा है। पिछले कुछ सालों की कूटनीति का फायदा अब मिल रहा है। भारत अब अपनी कुल जरूरत का लगभग 20% कच्चा तेल सीधे रूस से मंगा रहा है। फरवरी 2026 के आंकड़ों के अनुसार, भारत रूस से 10.4 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd) तेल आयात कर रहा है। रूस से आने वाला यह तेल 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के विवादित रूट से नहीं आता है, जो भारत की सप्लाई चैन को सुरक्षित बनाता है।
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2. देश में पर्याप्त रणनीतिक भंडार (Strategic Reserves): सरकारी सूत्रों और पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, देश के पास वर्तमान में पेट्रोलियम उत्पादों और LPG का पर्याप्त बफर स्टॉक (Buffer Stock) मौजूद है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मंगलौर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (MRPL) जैसी बड़ी रिफाइनरियों के शटडाउन या बंद होने की जो खबरें सोशल मीडिया पर चल रही हैं, वे महज अफवाह (Rumors) हैं। देश के सभी रिफाइनिंग प्लांट अपनी पूरी क्षमता (Full capacity) पर काम कर रहे हैं।
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इस जटिल अंतरराष्ट्रीय व्यापार और LPG Cylinder Price Hike के अर्थशास्त्र को समझने के लिए कुछ बुनियादी बातों को जानना जरूरी है:
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1. कैसे तय होती है घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत?
\r\n\r\nभारत में गैस सिलेंडर के दाम हवा में तय नहीं होते। तेल विपणन कंपनियां (OMCs) हर महीने की पहली तारीख को LPG की 'बेस प्राइस' (Base Price) तय करती हैं। इसके लिए वे मुख्य रूप से पिछले महीने के अंतरराष्ट्रीय बाजार के मूल्यों (Saudi Aramco contract prices), डॉलर के मुकाबले रुपये के एक्सचेंज रेट (Exchange Rate) और समुद्री भाड़े (Ocean Freight) का आकलन करती हैं।
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बेस प्राइस तय होने के बाद, इसमें देश के अंदर का बॉटलिंग चार्ज, इनलैंड ट्रांसपोर्टेशन लागत, स्थानीय टैक्स (GST) और डिस्ट्रीब्यूटर/डीलर का कमीशन जोड़ा जाता है। इन सबको मिलाकर वह 'खुदरा मूल्य' (Retail Price) निकाला जाता है जो ग्राहक चुकाता है। सब्सिडी वाले उज्ज्वला सिलेंडर के लिए सरकार इस तय कीमत और रियायती कीमत के बीच के अंतर की भरपाई डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए करती है, जबकि गैर-सब्सिडी वाले आम घरेलू सिलेंडर की पूरी कीमत ग्राहक को खुद अपनी जेब से चुकानी पड़ती है।
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2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट (Essential Commodities Act) 1955 क्या है?
\r\n\r\nमौजूदा गैस संकट से निपटने के लिए सरकार ने जिस कानून का सहारा लिया है, वह आवश्यक वस्तु अधिनियम (ESMA/ECA 1955) है। सरकार ने इसी कानून के तहत मिली अपनी असीमित शक्तियों का इस्तेमाल करके रिफाइनरियों को आदेश जारी किया है।
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इस कानून का मुख्य उद्देश्य उपभोक्ताओं को उचित मूल्य पर आवश्यक वस्तुओं (जैसे खाद्यान्न, दवाइयां, पेट्रोलियम उत्पाद) की आसान और निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना है। इससे पहले सरकार ने साल 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भी तेल क्षेत्र में ESMA के नियमों को कड़ाई से लागू किया था। उस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिफाइनिंग मार्जिन बहुत ज्यादा था, इसलिए रिफाइनिंग कंपनियों से साफ कहा गया था कि वे ज्यादा मुनाफे के लालच में देश का तेल बाहर एक्सपोर्ट न करें और पहले देश में फ्यूल की कमी को पूरा करें।
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3. प्रोपेन (Propane), ब्यूटेन (Butane) और LNG के उपयोग जानें
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- \r\n प्रोपेन (Propane): यह एक ज्वलनशील हाइड्रोकार्बन गैस है। इसका मुख्य इस्तेमाल घरों और होटलों में खाना पकाने (LPG के हिस्से के रूप में), सर्दियों में हीटिंग, और पेट्रोकेमिकल इंडस्ट्री में प्लास्टिक बनाने के बेस के रूप में किया जाता है।\r\n \r\n
- \r\n ब्यूटेन (Butane): यह भी प्रोपेन की तरह ही काम करती है। हमारे घरेलू LPG सिलेंडर में मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का ही मिश्रण (Mixture) होता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल सिगरेट लाइटर और एयरोसोल स्प्रे में भी होता है।\r\n \r\n
- \r\n LNG (Liquefied Natural Gas): यह मुख्य रूप से मीथेन गैस (Methane) है, जिसे बहुत कम तापमान (-162°C) पर ठंडा करके तरल (Liquid) में बदल दिया जाता है ताकि इसे जहाजों में आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सके। भारत में इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से बिजली संयंत्रों (Power plants), खाद कारखानों (Urea production) और गाड़ियों के लिए CNG बनाने में किया जाता है।\r\n \r\n
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हालिया बदलावों के बाद कीमतों का विवरण इस प्रकार है:
\r\n\r\nभारत के बड़े शहर (महानगर)
\r\n\r\n| \r\n शहर \r\n | \r\n \r\n घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 Kg) \r\n | \r\n \r\n कॉमर्शियल गैस सिलेंडर (19 Kg) \r\n | \r\n
| \r\n दिल्ली \r\n | \r\n \r\n ₹913.00 \r\n | \r\n \r\n ₹1883.00 \r\n | \r\n
| \r\n मुंबई \r\n | \r\n \r\n ₹912.50 \r\n | \r\n \r\n ₹1835.00 \r\n | \r\n
| \r\n कोलकाता \r\n | \r\n \r\n ₹939.00 \r\n | \r\n \r\n ₹1990.00 \r\n | \r\n
| \r\n चेन्नई \r\n | \r\n \r\n ₹928.50 \r\n | \r\n \r\n ₹2043.50 \r\n | \r\n
| \r\n बेंगलुरु \r\n | \r\n \r\n ₹915.50 \r\n | \r\n \r\n ₹1953.50 \r\n | \r\n
| \r\n हैदराबाद \r\n | \r\n \r\n ₹965.00 \r\n | \r\n \r\n ₹2107.00 \r\n | \r\n
| \r\n अहमदाबाद \r\n | \r\n \r\n ₹920.00 \r\n | \r\n \r\n ₹1905.00 \r\n | \r\n
| \r\n पुणे \r\n | \r\n \r\n ₹916.00 \r\n | \r\n \r\n ₹1850.50 \r\n | \r\n
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छोटे और अन्य प्रमुख शहर (Tier-2 & Tier-3)
\r\n\r\n| \r\n शहर \r\n | \r\n \r\n घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 Kg) \r\n | \r\n \r\n कॉमर्शियल गैस सिलेंडर (19 Kg) \r\n | \r\n
| \r\n नोएडा \r\n | \r\n \r\n ₹913.00 \r\n | \r\n \r\n ₹1883.00 \r\n | \r\n
| \r\n लखनऊ \r\n | \r\n \r\n ₹950.50 \r\n | \r\n \r\n ₹1978.00 \r\n | \r\n
| \r\n मेरठ \r\n | \r\n \r\n ₹910.50 \r\n | \r\n \r\n ₹1885.00 \r\n | \r\n
| \r\n बिजनौर \r\n | \r\n \r\n ₹934.00 \r\n | \r\n \r\n ₹1943.00 \r\n | \r\n
| \r\n आगरा \r\n | \r\n \r\n ₹925.50 \r\n | \r\n \r\n ₹1920.00 \r\n | \r\n
| \r\n वाराणसी \r\n | \r\n \r\n ₹976.50 \r\n | \r\n \r\n ₹2035.00 \r\n | \r\n
| \r\n पटना \r\n | \r\n \r\n ₹1011.50 \r\n | \r\n \r\n ₹2133.00 \r\n | \r\n
| \r\n जयपुर \r\n | \r\n \r\n ₹916.50 \r\n | \r\n \r\n ₹1905.00 \r\n | \r\n
| \r\n चंडीगढ़ \r\n | \r\n \r\n ₹922.50 \r\n | \r\n \r\n ₹1904.00 \r\n | \r\n
| \r\n भोपाल \r\n | \r\n \r\n ₹918.50 \r\n | \r\n \r\n ₹1895.00 \r\n | \r\n
| \r\n इंदौर \r\n | \r\n \r\n ₹941.00 \r\n | \r\n \r\n ₹1985.00 \r\n | \r\n
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\r\n\r\n\r\nनोट: राज्यों के स्थानीय टैक्स (Local VAT), ट्रांसपोर्टेशन और डीलर कमीशन के कारण एक ही राज्य के अलग-अलग जिलों में कीमतों में 10 से 30 रुपये तक का मामूली अंतर हो सकता है।\r\n
कुल मिलाकर, हालिया LPG Cylinder Price Hike मात्र एक घरेलू आर्थिक फैसला नहीं है, बल्कि यह ग्लोबल जिओ-पॉलिटिक्स, युद्ध और सप्लाई चैन के टूटने का सीधा परिणाम है। दिल्ली में 913 रुपए और कॉमर्शियल सिलेंडर के 1883 रुपए पर पहुंचने से महंगाई दर में वृद्धि होना तय है। हालांकि, भारत सरकार ने ESMA लागू करके और गैस उत्पादन के कड़े निर्देश देकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि देश में कम से कम गैस की भौतिक कमी (Physical shortage) न हो। आने वाले समय में कतर के प्लांट के दोबारा शुरू होने और मिडिल ईस्ट में शांति बहाली पर ही गैस की कीमतों में राहत निर्भर करेगी। तब तक आम उपभोक्ताओं और उद्योगों को इस बढ़ी हुई कीमत के साथ ही तालमेल बिठाना होगा।
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डिस्क्लेमर: गैस की कीमतों और वैश्विक परिदृश्य में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। यह रिपोर्ट 7 मार्च 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों और सरकारी आदेशों पर आधारित है।