नई दिल्ली / स्पेशल रिपोर्ट: देशभर में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर (LPG Cylinder) का इस्तेमाल करने वाले करोड़ों उपभोक्ताओं के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। तेल विपणन कंपनियों (Oil Marketing Companies - OMCs) ने गैस सिलेंडर की अनिवार्य e-KYC (ई-केवाईसी) कराने की अंतिम समय सीमा को बढ़ा दिया है। पहले जहां इसके लिए 16 अगस्त की तारीख तय की गई थी, वहीं अब उपभोक्ता 23 अगस्त 2026 तक अपना आधार सत्यापन और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन पूरा करा सकते हैं।READ ALSO:-धामपुर में टला बड़ा हादसा: मोहल्ला साहूवान के श्रीराम मंदिर सत्संग भवन में लगी भीषण आग, मची अफरा-तफरी; दमकल विभाग मुस्तैद
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हालांकि, 7 दिनों की इस अतिरिक्त मोहलत के बावजूद जमीन पर स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। देश के विभिन्न हिस्सों से खबरें आ रही हैं कि ऑयल कंपनियों का मुख्य डिजिटल सर्वर और मोबाइल एप्लीकेशन ठप पड़े हैं, जिसके कारण उपभोक्ताओं को भारी मानसिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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डेडलाइन बढ़ने के बावजूद क्यों परेशान हो रहे हैं उपभोक्ता?
\r\n\r\nतारीख बढ़ाए जाने के बाद भी रसोई गैस ग्राहकों की मुसीबतें कम नहीं हुई हैं। इसका मुख्य कारण तेल कंपनियों का बेहद कमजोर और ओवरलोडेड डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर (Digital Infrastructure) है।
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- \r\n ऐप्स का क्रैश होना: इंडेन (Indane), एचपी (HP Gas) और भारत गैस (Bharat Gas) की आधिकारिक मोबाइल ऐप्स पर जैसे ही ट्रैफिक बढ़ता है, ऐप्स क्रैश होने लगती हैं या फिर 'सपांस एरर' दिखाने लगती हैं।\r\n \r\n
- \r\n धीमी प्रोसेसिंग: ओटीपी आने में देरी, बायोमेट्रिक डेटा के मैच न होने और पेज के लगातार लोड होने से एक-एक वेरिफिकेशन में काफी समय लग रहा है।\r\n \r\n
- \r\n गैस एजेंसियों पर बेकाबू भीड़: ऑनलाइन माध्यमों के काम न करने की वजह से लोग सीधे अपने नजदीकी गैस डीलर्स और एजेंसियों के दफ्तरों का रुख कर रहे हैं। इसके चलते एजेंसियों के बाहर अलसुबह से ही सैकड़ों मीटर लंबी कतारें देखी जा रही हैं।\r\n \r\n
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गैस एजेंसियों और डीलर्स का क्या है कहना?
\r\n\r\nगैस एजेंसी मालिकों और डीलर्स का मानना है कि केवल 7 दिनों का अतिरिक्त समय दे देना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। जब तक केंद्रीय सर्वर की क्षमता नहीं बढ़ाई जाएगी, तब तक बैकलॉग खत्म होना असंभव है।
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डीलरों का कहना है कि:
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- \r\n दिन में कई बार मुख्य सर्वर घंटों के लिए पूरी तरह डाउन हो जाता है।\r\n \r\n
- \r\n एक बार सर्वर बंद होने से पूरे दिन का टोकन और वेरिफिकेशन शेड्यूल बिगड़ जाता है।\r\n \r\n
- \r\n काउंटर पर अतिरिक्त स्टाफ लगाने और सही कागजात मौजूद होने के बाद भी तकनीकी खराबी के कारण वे ग्राहकों का ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं कर पा रहे हैं।\r\n \r\n
- \r\n काउंटर पर मौजूद कर्मचारियों को लोगों के आक्रोश का सामना करना पड़ रहा है।\r\n \r\n
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समस्या की मुख्य तकनीकी वजह क्या है?
\r\n\r\nइस पूरे संकट का ढांचागत विश्लेषण करने पर पता चलता है कि e-KYC की पूरी व्यवस्था केंद्रीयकृत (Centralized) है।
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जब कोई ग्राहक मोबाइल ऐप या गैस एजेंसी के बायोमेट्रिक स्कैनर के जरिए अपना डेटा सबमिट करता है, तो वह अनुरोध सीधा संबंधित तेल कंपनी के मुख्य डेटा सेंटर और आधार (UIDAI) के वेरिफिकेशन सर्वर से टकराता है। जब एक साथ करोड़ों उपभोक्ता लॉगिन या स्कैन का प्रयास करते हैं, तो सर्वर इस भारी ट्रैफिक लोड को संभाल नहीं पाता और क्रैश हो जाता है। यही कारण है कि स्थानीय स्तर पर कोई भी गैस एजेंसी सर्वर डाउन होने की स्थिति में ग्राहकों की मदद करने में असमर्थ साबित हो रही है।
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23 अगस्त तक e-KYC नहीं हुई, तो क्या होगा आपका सिलेंडर बंद?
\r\n\r\ne-KYC को लेकर सबसे बड़ा भ्रम यह फैला हुआ है कि निर्धारित समय सीमा यानी 23 अगस्त 2026 तक वेरिफिकेशन न होने पर एलपीजी कनेक्शन पूरी तरह रद्द या बंद कर दिया जाएगा। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है।
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जानिए क्या होगा असर:
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- \r\n कनेक्शन रद्द नहीं होगा: किसी भी ग्राहक का गैस कनेक्शन काटा नहीं जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n सब्सिडी पर रोक: तय सीमा तक e-KYC न कराने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी (Subsidy) रोक दी जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n कमर्शियल/गैर-रियायती दरों पर खरीदारी: ऐसे ग्राहकों को अस्थायी रूप से घरेलू या रियायती दर पर सिलेंडर मिलने का अधिकार खत्म हो जाएगा। उन्हें गैर-रियायती (Non-Subsidized/Commercial) दरों पर महंगा सिलेंडर खरीदना पड़ सकता है, जो आम घरेलू रेट से काफी अधिक होता है।\r\n \r\n
- \r\n e-KYC होते ही फिर मिलेगी सब्सिडी: जैसे ही उपभोक्ता बाद में अपनी e-KYC की प्रक्रिया पूरी कर लेगा, उसका कनेक्शन पुनः सामान्य कर दिया जाएगा और वह रियायती दरों पर सिलेंडर प्राप्त कर सकेगा।\r\n \r\n
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घर बैठे मोबाइल से कैसे करें e-KYC? (आसान स्टेप्स)
\r\n\r\nयदि आप गैस एजेंसियों की लंबी लाइनों से बचना चाहते हैं, तो अपने स्मार्टफोन के जरिए खुद भी e-KYC पूरा कर सकते हैं। इसके लिए निम्नलिखित प्रक्रिया अपनाएं:
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- \r\n ऐप डाउनलोड करें: अपने मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर या एप्पल ऐप स्टोर से अपनी संबंधित गैस कंपनी का आधिकारिक ऐप (जैसे- Hello BPCL, IndianOil One, या HP Pay) डाउनलोड करें।\r\n \r\n
- \r\n रजिस्ट्रेशन/लॉगिन करें: अपने रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और एलपीजी कंज्यूमर आईडी (Consumer ID) की मदद से ऐप में लॉगिन करें।\r\n \r\n
- \r\n e-KYC विकल्प चुनें: ऐप के प्रोफाइल या सर्विसेज सेक्शन में जाएं और e-KYC वाले ऑप्शन पर क्लिक करें।\r\n \r\n
- \r\n फेस ऑथेंटिकेशन (Face Authentication): ऐप आपको 'Aadhaar FaceRD' ऐप की मदद से चेहरा स्कैन करने का निर्देश देगा। कैमरा खुलते ही अपना चेहरा स्क्रीन के सामने लाएं।\r\n \r\n
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फेस ऑथेंटिकेशन फेल हो जाए, तो घबराएं नहीं
\r\n\r\nअक्सर कई लोगों का फेस स्कैन पहली बार में रिजेक्ट हो जाता है। इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें:
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- \r\n चेहरे पर पर्याप्त और सीधी रोशनी होनी चाहिए।\r\n \r\n
- \r\n स्कैन करते समय मोबाइल को बिल्कुल स्थिर (Steady) रखें और अपनी आंखें झपकाएं।\r\n \r\n
- \r\n फेस स्कैन पूरा होने के बाद ऐप की स्क्रीन पर ‘e-KYC Success’ का मैसेज जरूर चेक करें। सिर्फ फोटो खिंच जाने का मतलब केवाईसी पूरा होना नहीं है।\r\n \r\n
- \r\n यदि ऐप पर स्टेटस सक्सेसफुल नहीं दिख रहा है, तो गैस एजेंसी के रिकॉर्ड में एक बार स्टेटस जरूर कन्फर्म कर लें।\r\n \r\n
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ऑफलाइन e-KYC कराने के 2 सबसे आसान विकल्प
\r\n\r\nअगर सर्वर या मोबाइल की तकनीकी समझ न होने के कारण आप ऐप से वेरिफिकेशन नहीं कर पा रहे हैं, तो आपके पास ऑफलाइन माध्यम के 2 बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं:
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- \r\n गैस एजेंसी जाकर: आप अपने सभी आवश्यक दस्तावेज लेकर पास की अपनी गैस एजेंसी जाएं। वहां बायोमेट्रिक मशीन (फिंगरप्रिंट स्कैनर) के जरिए 2 मिनट में आपकी e-KYC हो जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n सिलेंडर डिलीवरी मैन द्वारा: जब भी डिलीवरी बॉय आपके घर पर गैस सिलेंडर देने आए, तो आप उससे बायोमेट्रिक मशीन के बारे में पूछ सकते हैं। डिलीवरी कर्मचारियों के पास आधिकारिक पीओएस (POS) या मोबाइल डिवाइस होती है, जिसके माध्यम से वे आपके दरवाजे पर ही उंगलियों के निशान (Biometric) लेकर e-KYC पूरी कर सकते हैं।\r\n \r\n
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एलपीजी e-KYC की डेडलाइन 23 अगस्त तक बढ़ाया जाना निश्चित तौर पर एक राहत भरा कदम है, लेकिन जब तक तेल कंपनियां अपने डिजिटल सर्वर्स की क्षमता में सुधार नहीं करतीं, तब तक उपभोक्ताओं की कतारें कम होना मुश्किल है। सलाह यही है कि पैनिक करने के बजाय शांत समय (जैसे देर रात या तड़के सुबह) में मोबाइल ऐप के जरिए कोशिश करें या सिलेंडर डिलीवरी के वक्त डिलीवरी मैन की मदद से अपना वेरिफिकेशन पूरा कराएं।