नई दिल्ली (बिज़नेस डेस्क): अगर आप या आपके आस-पास कोई व्यक्ति पान मसाला (Pan Masala) का सेवन करता है, तो आने वाले कुछ ही समय में आपको पान की दुकानों पर एक बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। सड़क किनारे लटकती हुई पान मसाले की रंग-बिरंगी चमकीली प्लास्टिक की पुड़ियां (पाउच) अब इतिहास बनने जा रही हैं।READ ALSO:-भारतीय मुद्रा में ऐतिहासिक बदलाव: 10 और 20 रुपये के प्लास्टिक (पॉलीमर) नोटों को सरकार की हरी झंडी, RBI जारी करेगा 200 करोड़ नोट; जानें आपके जेब पर क्या पड़ेगा असर!
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भारत की सर्वोच्च खाद्य नियामक संस्था, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने पर्यावरण संरक्षण और जन स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पान मसाला की पैकेजिंग को लेकर एक बेहद कड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। FSSAI ने पान मसाला की पैकिंग में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक और कई अन्य सिंथेटिक पदार्थों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि FSSAI के ये नए नियम क्या हैं, कंपनियों के सामने अब क्या विकल्प बचे हैं, और आम उपभोक्ता की जेब पर इसका क्या असर पड़ने वाला है।
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\r\n\r\nक्या है FSSAI का नया नियम और कब से होगा लागू?
\r\n\r\nFSSAI ने 7 अगस्त 2026 को 'खाद्य सुरक्षा एवं मानक (पैकेजिंग) नियम, 2018' में एक बड़ा संशोधन करते हुए नई अधिसूचना जारी की है। यह अधिसूचना भारत के राजपत्र (Official Gazette) में प्रकाशित होते ही पूरे देश में कानूनी रूप से लागू हो जाएगी।
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नियम का मुख्य बिंदु: नए नियमों के अनुसार, देश में पान मसाले की बिक्री अब किसी भी प्रकार के प्लास्टिक के छोटे पाउच या पुड़ियों में नहीं की जा सकेगी। इसके बजाय, पान मसाला निर्माता कंपनियों को अब पैकेजिंग के लिए कागज (Paper), गत्ता (Cardboard), सेलुलोज (Cellulose) या प्राकृतिक स्रोतों से बनी इको-फ्रेंडली सामग्री का ही इस्तेमाल करना होगा। सबसे बड़ी शर्त यह है कि इन नए पैकेट्स में किसी भी तरह का प्लास्टिक अंश या प्रतिबंधित सिंथेटिक पदार्थ बिल्कुल नहीं होना चाहिए।
\r\n\r\n\r\n\r\nप्लास्टिक के अलावा इन खतरनाक पैकेजिंग पदार्थों पर भी लगा पूर्ण बैन
\r\n\r\nFSSAI की यह कार्रवाई केवल सामान्य प्लास्टिक (Single-use plastic) तक सीमित नहीं है। एफएसएसएआई ने बारीकी से अध्ययन करने के बाद उन सभी केमिकल और सिंथेटिक लेयर्स पर भी पाबंदी लगा दी है, जो पान मसाला को नमी से बचाने के लिए पुड़ियों के अंदर लगाए जाते थे और जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं।
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प्रतिबंधित सामग्रियों की सूची:
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- \r\n पॉलीथिन (Polyethylene) और पॉलीप्रोपाइलीन (Polypropylene): इनका इस्तेमाल पाउच को मजबूत बनाने के लिए होता था।\r\n \r\n
- \r\n पॉलिएस्टर और पीवीसी (PVC): ये सिंथेटिक पॉलीमर पर्यावरण में कभी नष्ट नहीं होते।\r\n \r\n
- \r\n परतदार सामग्री (Laminated Material): अलग-अलग प्लास्टिक की परतों को मिलाकर बनाए गए पाउच।\r\n \r\n
- \r\n एल्युमिनियम फॉइल और मेटलराइज्ड लेयर्स (Metallised Layers): पाउच के अंदर की वह चमकीली (सिल्वर) परत जो उत्पाद को लंबे समय तक ताजा रखती थी, अब पूरी तरह से प्रतिबंधित है।\r\n \r\n
पाउच बंद होने के बाद पान मसाला कंपनियों के पास अब क्या हैं विकल्प?
\r\n\r\nप्लास्टिक और एल्युमिनियम फॉइल पर प्रतिबंध लगाने के बाद, पान मसाला का स्वाद और नमी बरकरार रखना कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, FSSAI ने कंपनियों को सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल विकल्प भी सुझाए हैं, जिन पर अब उद्योग जगत को शिफ्ट होना पड़ेगा:
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- \r\n टिन के डिब्बे (Tin Containers): कंपनियां अब अपने प्रीमियम और सामान्य पान मसाला को पैक करने के लिए एयर-टाइट टिन के छोटे डिब्बों का उपयोग कर सकती हैं।\r\n \r\n
- \r\n कांच की बोतलें (Glass Containers): टिन के अलावा, छोटे कांच के जार या कंटेनर का इस्तेमाल भी किया जा सकेगा, जो स्वास्थ्य के लिए 100% सुरक्षित होते हैं।\r\n \r\n
- \r\n बायोडिग्रेडेबल पेपर पैकेट्स: छोटे बजट वाले उपभोक्ताओं के लिए कंपनियां ऐसे विशेष पेपर पैक्स का निर्माण कर सकती हैं, जो पूरी तरह से प्लास्टिक-फ्री हों और मिट्टी में आसानी से गल (Biodegrade) जाएं।\r\n \r\n
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क्या महंगा हो जाएगा पान मसाला? कंपनियों और आपकी जेब पर असर
\r\n\r\nFSSAI के इस कदम की पर्यावरणविदों द्वारा जमकर तारीफ की जा रही है, लेकिन व्यापारिक दृष्टिकोण से इसका सीधा असर कंपनियों की बैलेंस शीट और अंततः उपभोक्ताओं की जेब (Retail Price) पर पड़ने वाला है।
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लागत बढ़ने के मुख्य कारण:
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- \r\n महंगी पैकेजिंग कॉस्ट: अब तक 5 या 10 रुपये में बिकने वाले पान मसाले का प्लास्टिक पाउच बनाने की लागत मात्र कुछ पैसे आती थी। लेकिन अब इसे टिन, ग्लास या स्पेशल कोटेड इको-फ्रेंडली पेपर में पैक करने से पैकेजिंग की लागत कई गुना बढ़ जाएगी।\r\n \r\n
- \r\n ट्रांसपोर्टेशन और स्टोरेज का खर्च: टिन और कांच के डिब्बे वजन में भारी होते हैं और प्लास्टिक पाउच (जो दबकर कम जगह घेरते हैं) की तुलना में बहुत अधिक जगह घेरते हैं। इससे मालभाड़ा (Freight Charges), लोडिंग-अनलोडिंग और गोदामों में स्टोरेज का खर्च सीधा बढ़ जाएगा।\r\n \r\n
- \r\n मशीनों में बदलाव: कंपनियों को अपनी पुरानी पाउच पैकिंग मशीनों को हटाकर नई टिन या ग्लास पैकेजिंग लाइन स्थापित करनी होगी, जिसमें करोड़ों का निवेश लगेगा।\r\n \r\n
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पैकेजिंग, प्रोडक्शन और ट्रांसपोर्टेशन की इन बढ़ी हुई लागतों का बोझ पान मसाला कंपनियां अपनी जेब से नहीं भरेंगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि बहुत जल्द बाजार में पान मसाला की एमआरपी (MRP) में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। जो 5 रुपये की पुड़िया पहले आसानी से जेब में आ जाती थी, अब उसके लिए उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।
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FSSAI का यह फैसला भारत को 'प्लास्टिक मुक्त' बनाने और खाद्य सुरक्षा के मानकों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बहुत ही साहसिक और क्रांतिकारी कदम है, भले ही इससे उद्योग जगत को शुरुआत में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़े।


