ठाणे। पर्यावरण की रक्षा और बढ़ते प्लास्टिक कचरे के सही प्रबंधन के लिए महाराष्ट्र में एक बड़ा कदम उठाया गया है। महाराष्ट्र सरकार, ठाणे नगर निगम (TMC) और हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज (HCCB) के संयुक्त प्रयास से 'Maha r-PET Campaign' का विस्तार किया गया है। इस अभियान के तहत ठाणे में एक नए पीईटी (PET) कलेक्शन सेंटर का उद्घाटन किया गया है। इस सेंटर का मुख्य उद्देश्य इस्तेमाल हो चुकी प्लास्टिक बोतलों को फेंकने के बजाय उन्हें इकट्ठा करना, छांटना और रीसाइक्लिंग के जरिए फिर से इस्तेमाल के लायक बनाना है।

​इलेक्ट्रिक वाहनों और खास डिब्बों की शुरुआत

इस नए कलेक्शन सेंटर के उद्घाटन कार्यक्रम में कचरा संग्रहण व्यवस्था को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर जोर दिया गया। बोतलों को इकट्ठा करने के लिए तीन नए इलेक्ट्रिक वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इसके अलावा, खास तौर पर तैयार किए गए समर्पित कलेक्शन बिन्स (कूड़ेदान) भी लॉन्च किए गए। अभियान से जुड़ने वाले दुकानदारों (रिटेलर्स) को प्रोत्साहित करने के लिए 'ग्रीन कूल दुकान' स्टिकर और सहभागिता प्रमाणपत्र (Participation Certificates) भी जारी किए गए हैं।

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​फेंकने के बजाय बोतलों को इकट्ठा करने का समय: पंकजा मुंडे

समारोह में उपस्थित महाराष्ट्र सरकार की मंत्री पंकजा मुंडे ने इस पूरी पहल को जनभागीदारी से जोड़ने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब 'इस्तेमाल करो और फेंको' का समय बीत चुका है; अब समय बोतलों को जिम्मेदारी से एकत्र करने का है। मुंडे ने जानकारी दी कि ठाणे में मिली शुरुआती सफलता के बाद, इस महत्वपूर्ण अभियान को जल्द ही छत्रपति संभाजीनगर, नासिक और बीड जैसे शहरों में भी लागू करने की योजना है।

​कचरे से बनी बेंचों ने पेश की नई मिसाल

कचरे को कैसे उपयोगी बनाया जा सकता है, इसका एक बेहतरीन उदाहरण भी कार्यक्रम में पेश किया गया। यहां रीसाइकिल किए गए पीईटी (PET) प्लास्टिक से बनी विशेष प्रकार की बेंचों का अनावरण किया गया, जो दर्शाती हैं कि पुरानी और बेकार प्लास्टिक से बेहतरीन चीजें बनाई जा सकती हैं।

​एचसीसीबी (HCCB) के प्रतिनिधि अविनाश कांत कुमार ने बताया कि प्लास्टिक कचरे को इकट्ठा करने से लेकर उसकी प्रोसेसिंग तक की पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और आपसी सहयोग बेहद जरूरी है। इसके लिए कलेक्शन पार्टनर्स और रिटेलर्स का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जा रहा है, ताकि एकत्रित की गई पीईटी बोतलों को सीधे अधिकृत रीसाइक्लिंग चैनलों तक पहुंचाया जा सके। यह पूरी पहल संसाधनों के प्रभावी उपयोग की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

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