Meerut MDA Property Protest ने अब शहर में एक व्यापक अभियान का रूप ले लिया है। मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) की ओर से 16,726 संपत्तियों को लेकर की जा रही कार्रवाई के विरोध में स्थानीय व्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। संयुक्त व्यापार संघ के आह्वान पर शहर के विभिन्न बाजारों में काले झंडे लगाकर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
17 हजार काले झंडों से पटे बाजार शनिवार को संयुक्त व्यापार संघ के अध्यक्ष नवीन गुप्ता, अध्यक्ष अनुज और महामंत्री रविंद्र के नेतृत्व में शास्त्रीनगर, स्पोर्ट्स मार्केट, इंदिरा चौक और बेगमपुल सहित कई प्रमुख बाजारों में काले झंडे लगाए गए। नवीन गुप्ता ने जानकारी दी कि शुक्रवार तक शहर के व्यापारियों के बीच करीब 17 हजार काले झंडे वितरित किए जा चुके हैं। इससे पहले कागजी बाजार, सदर सराफा, वैली बाजार और ट्रांसपोर्टनगर के व्यापारी भी अपने प्रतिष्ठानों पर काले झंडे फहराकर इस अभियान का हिस्सा बन चुके हैं।

सरकार का विरोध नहीं, बल्कि अध्यादेश की है मांग व्यापार संघ के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि काले झंडे लगाने का यह अभियान राज्य या केंद्र सरकार के विरोध में नहीं है, बल्कि यह अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का एक लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण माध्यम है। अध्यक्ष नवीन गुप्ता ने मांग की है कि केंद्र सरकार को इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए एक अध्यादेश लाना चाहिए। इससे वैध-अवैध संपत्तियों से जुड़ी वर्तमान कार्रवाई को स्थगित किया जा सकेगा। उनका तर्क है कि अध्यादेश लाने से माननीय न्यायालय के निर्णय का सम्मान भी बरकरार रहेगा और प्रभावित होने वाले हजारों व्यापारियों व आम नागरिकों को बड़ी राहत मिलेगी।

16,726 संपत्तियों की सूची पर उठ रहे गंभीर सवाल विवाद की मुख्य जड़ वह सूची है जिसमें 16,726 संपत्तियों को शामिल किया गया है। व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने जब मेडा अधिकारियों से मुलाकात कर इस सूची का आधार पूछा, तो कई विसंगतियां सामने आईं। व्यापारियों का तर्क है कि मेरठ विकास प्राधिकरण का गठन 1976 में हुआ था और इसके बायलॉज 1978 में लागू हुए थे। ऐसे में 1976 से पहले निर्मित संपत्तियों को इस कार्रवाई की सूची में किस नियम के तहत शामिल किया गया है? व्यापारियों के इस सख्त रुख के बाद एमडीए अधिकारियों ने मामले का दोबारा सर्वे कराने का आश्वासन दिया है।
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अधिकारियों पर कार्रवाई की उठी मांग संयुक्त व्यापार संघ के उपाध्यक्ष तरुण गुप्ता ने प्रशासन से मांग की है कि दोबारा होने वाले सर्वे में सभी संपत्तियों की वास्तविक स्थिति पारदर्शी तरीके से स्पष्ट की जानी चाहिए। उन्होंने 16,726 संपत्तियों की यह त्रुटिपूर्ण सूची तैयार करने वाले संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उन पर विभागीय कार्रवाई की भी मांग की है।
तरुण गुप्ता ने कहा कि एक आम इंसान अपनी पूरी जिंदगी की गाढ़ी कमाई लगाकर अपने परिवार के लिए घर बनाता है। ऐसे फरमान उन परिवारों के सामने गहरा संकट खड़ा कर रहे हैं। व्यापारी किसी भी तरह का टकराव नहीं चाहते, इसलिए काले झंडों के माध्यम से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज बुलंद की जा रही है और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
Sabse pehle comment karne wale banein.