Meerut Uldepur Case MDA Survey को लेकर मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) के रुख से प्रभावित इलाकों के निवासियों में भारी चिंता देखी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश के अनुपालन में प्राधिकरण की संभावित कार्रवाई की आशंका को देखते हुए लोग अपने मकानों की वैधता और स्थिति जांचने के लिए रोजाना मेडा कार्यालय पहुंच रहे हैं। जोन-ए, बी, सी और डी में रहने वाले नागरिक अधिकारियों से यह जानने का प्रयास कर रहे हैं कि उनके निर्माण वैध हैं या अवैध और क्या उन पर किसी तरह की कार्रवाई हो सकती है।
16,726 भवनों का शुरू हुआ री-सर्वे अदालत के निर्देशों के तहत मेडा ने व्यापक स्तर पर दोबारा जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है:
जोन-ए में री-सर्वे: प्राधिकरण ने प्रथम चरण में जोन-ए के कुल 16,726 भवनों का री-सर्वे शुरू कर दिया है, ताकि अवैध निर्माणों का सटीक डेटा तैयार किया जा सके।
अन्य जोन में आगामी कार्रवाई: मेडा अधिकारियों के अनुसार, जोन-ए के बाद जल्द ही जोन-बी, सी और डी में भी भवनों की स्थिति जांचने के लिए सर्वे अभियान चलाया जाएगा। इस सर्वे के बाद ही वास्तविक स्थिति का आंकलन हो सकेगा।
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न्यायिक आयोग की देखरेख में 9 दिसंबर को पेश होगी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत मेडा ने कार्रवाई से जुड़ी प्रक्रिया के लिए 35 लाख रुपये की राशि जमा करा दी है। वर्तमान में न्यायिक आयोग के निर्देशन में उल्देपुर क्षेत्र की अवैध कॉलोनियों पर होने वाली कार्रवाई की रूपरेखा तैयार की जा रही है। प्राधिकरण को आगामी 9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट में अपनी प्रगति रिपोर्ट दाखिल करनी है। मेडा उपाध्यक्ष संजय कुमार मीना ने स्पष्ट किया है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों का शत-प्रतिशत अनुपालन किया जाएगा।
ग्रामीणों की समिति और प्रशासन का रुख कार्रवाई के संभावित समय और क्षेत्र को लेकर स्थानीय लोगों के बीच बना संशय दूर करने के लिए उल्देपुर के निवासियों और 'संयुक्त मेरठ बचाओ संघर्ष समिति' के बीच बैठकों का दौर जारी है। उधर, जिला प्रशासन की ओर से जिलाधिकारी ने पहले ही स्थिति स्पष्ट कर दी है कि इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान किसी भी प्रकार के आंदोलन के बजाय केवल वैधानिक और कानूनी प्रक्रिया से ही संभव है। अब सभी की निगाहें 9 दिसंबर की अदालती सुनवाई और मेडा की री-सर्वे रिपोर्ट पर टिकी हैं।
Sabse pehle comment karne wale banein.