Saturn Opposition 2026 की खगोलीय घटना 4 अक्टूबर 2026 की रात को घटने जा रही है, जो खगोल प्रेमियों और अंतरिक्ष विज्ञान में रुचि रखने वालों के लिए एक दुर्लभ और विहंगम दृश्य पेश करेगी। इस दौरान सौरमंडल का सबसे सुंदर और 'वलयों का राजा' कहा जाने वाला शनि ग्रह अपनी विपरीत स्थिति (Opposition) में पहुंचेगा। यह वर्ष 2026 का वह समय होगा जब शनि ग्रह पृथ्वी के सबसे निकट, आकार में सबसे बड़ा और रोशनी में सबसे अधिक चमकीला दिखाई देगा।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला (तारामण्डल) गोरखपुर, उत्तर प्रदेश के एस्ट्रोनॉमी एजुकेटर एवं प्रसिद्ध खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस विशेष खगोलीय घटना की वैज्ञानिक बारीकियों, समय, चमक, दूरी और ग्रहों के अद्भुत संयोजन की विस्तृत जानकारी साझा की है।

विज्ञापन
विज्ञापन

क्या होता है खगोल विज्ञान में 'विपरीत स्थिति' (Opposition) का अर्थ? खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि खगोल विज्ञान में विपरीत स्थिति (Opposition) एक ऐसी अवस्था है जब पृथ्वी, सूर्य और किसी बाहरी ग्रह (जैसे कि शनि, बृहस्पति या मंगल) के ठीक बीच में आ जाती है। इस सीधी रेखा में आने के कारण ग्रह, सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में स्थित हो जाता है। इसका सीधा परिणाम यह होता है कि जैसे ही शाम को सूर्य पश्चिम दिशा में अस्त होता है, यह ग्रह पूर्व दिशा से उदित हो जाता है। इसके बाद पूरी रात आसमान में चमकने के बाद, सुबह सूर्योदय के समय यह ग्रह पश्चिम में अस्त होता है।

शनि ग्रह की विपरीत स्थिति लगभग प्रत्येक 378 दिनों (यानी करीब 54 सप्ताह) के अंतराल पर आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पृथ्वी को सूर्य का एक पूरा चक्कर लगाने में 365 दिन (1 वर्ष) लगते हैं, जबकि शनि को अपनी विशाल कक्षा में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 29.4 पृथ्वी वर्ष का लंबा समय लगता है। इस गति अंतर के कारण पृथ्वी को हर साल शनि की सीध में दोबारा पहुंचने के लिए अपनी कक्षा में थोड़ा अतिरिक्त सफर तय करना पड़ता है, जिससे विपरीत स्थिति की तिथि हर वर्ष लगभग दो सप्ताह आगे खिसक जाती है।

4 अक्टूबर 2026 की घटना का सटीक समय और स्थिति खगोलविद अमर पाल सिंह के अनुसार, 4 अक्टूबर 2026 को भारतीय समयानुसार (IST) शाम 5:30 बजे शनि ग्रह अपनी पूर्ण विपरीत स्थिति में पहुंचेगा। हालांकि, इसे सूर्यास्त के बाद से ही पूरी रात आसानी से देखा जा सकेगा।

दृश्यता की बात करें तो शनि ग्रह शाम को लगभग 5:50 बजे सीट्स (Cetus) तारामंडल क्षेत्र में पूर्वी क्षितिज से थोड़ा सा उत्तर दिशा की ओर से ऊपर आता हुआ दिखाई देगा। यह पूरी रात आकाश का एक प्रमुख आकर्षण रहेगा और तड़के सूर्योदय के समय पश्चिमी क्षितिज पर अस्त होगा।

दूरी, मैग्नीट्यूड चमक और वलयों (रिंग्स) की बनावट विपरीत स्थिति के दौरान बाहरी ग्रह पृथ्वी के सबसे करीब होते हैं। 4 अक्टूबर 2026 को शनि ग्रह और पृथ्वी के बीच की दूरी लगभग 784 मिलियन मील (1.26 बिलियन किलोमीटर) होगी। यह दूरी लगभग 8.43 खगोलीय इकाई (AU) या 70 प्रकाश-मिनट के बराबर है।

इस रात शनि ग्रह की चमक प्लस 0.32 (+0.32) मैग्नीट्यूड तक पहुंच जाएगी, जो इसे रात के आसमान के सबसे प्रमुख चमकीले तारों के समकक्ष खड़ा कर देती है। दूरबीन से देखने वालों के लिए सबसे खास बात यह होगी कि शनि की डिस्क का कोणीय व्यास अपने अधिकतम आकार यानी 19.7 आर्कसेकंड में दिखाई देगा।

शनि के वलयों (छल्लों) के बारे में जानकारी देते हुए अमर पाल सिंह ने बताया कि मार्च 2025 में शनि अपने वलय तल (Ring Plane) से गुजरा था, तब इसके छल्ले पृथ्वी से किनारे (edge-on) दिखाई दे रहे थे और छोटी दूरबीनों से लगभग अदृश्य हो गए थे। लेकिन अक्टूबर 2026 में, वलय फिर से खुलने लगे हैं और पृथ्वी के सापेक्ष माइनस 7.5 डिग्री दक्षिण की ओर झुके हुए दिखाई देंगे। यद्यपि यह 2017 के अधिकतम 27 डिग्री के झुकाव जितना नहीं है, फिर भी छोटी दूरबीनों से भी इसके सुंदर वलय स्पष्ट रूप से देखे जा सकेंगे।

4 से 7 अक्टूबर 2026: आसमान में ग्रहों और तारों की महफिल अमर पाल सिंह ने बताया कि 4 अक्टूबर से 7 अक्टूबर 2026 तक रात के आकाश में केवल शनि ही नहीं, बल्कि अन्य ग्रह, तारे और चंद्रमा मिलकर एक अद्भुत खगोलीय नजारा बनाएंगे:

  • शनि ग्रह: शाम 5:50 बजे के बाद पूर्वी क्षितिज पर सीट्स तारामंडल में प्लस 0.32 मैग्नीट्यूड के साथ चमकेगा।

  • चंद्रमा और तारे: मध्यरात्रि लगभग 12:30 बजे कर्क (Cancer) तारामंडल में माइनस 9.57 मैग्नीट्यूड की चमक के साथ चंद्रमा उदित होगा। चंद्रमा के ठीक ऊपर कैस्टर (Castor) और पोलैक्स (Pollux) तारे दिखाई देंगे।

  • मंगल ग्रह: रात लगभग 12:50 बजे कर्क तारामंडल में ही चंद्रमा के नीचे प्लस 1.10 मैग्नीट्यूड की चमक के साथ मंगल का उदय होगा।

  • बृहस्पति और रेगुलस: रात लगभग 2:05 बजे सिंह (Leo) तारामंडल में बृहस्पति माइनस 1.74 मैग्नीट्यूड के साथ उदित होगा। इसके ठीक बाद रात 2:50 बजे सिंह तारामंडल का प्रसिद्ध तारा रेगुलस (Regulus) प्लस 1.40 मैग्नीट्यूड की चमक बिखेरते हुए उदित होगा।

  • विशेष युति (Conjunction): 7 अक्टूबर की रात लगभग 2:40 बजे क्षितिज पर चंद्रमा और रेगुलस तारे की एक बेहद खूबसूरत युति दिखाई देगी, जहां दोनों पिंड एक-दूसरे के काफी निकट नजर आएंगे।

अंधविश्वास से मुक्ति और शनि का वास्तविक विज्ञान खगोलविद अमर पाल सिंह ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि हमारे समाज में शनि ग्रह को लेकर अनेक भ्रांतियां और अंधविश्वास फैले हुए हैं। उन्होंने अपील की कि बिना वैज्ञानिक प्रमाणों और तथ्यों के किसी भी बात को नहीं मानना चाहिए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाकर ही समाज से अंधविश्वासों का निवारण संभव है।

विज्ञान के अनुसार, शनि सूर्य से छठा ग्रह है। 17वीं शताब्दी में दूरबीन के आविष्कार के बाद इसके वलय दिखाई दिए थे। अंतरिक्ष मिशनों से पता चला है कि इसके बारीक और खूबसूरत छल्ले मुख्य रूप से बर्फ के छोटे-छोटे कणों, धूल और चट्टानों से बने हैं, जिसके कारण इसे 'वलयों का सम्राट' कहा जाता है। इसके अलावा, शनि के कम से कम 293 ऐसे चंद्रमा हैं जिनकी कक्षाएं प्रमाणित हो चुकी हैं, जिनमें से 13 चंद्रमाओं का व्यास 50 किलोमीटर से अधिक है।

शनि ग्रह को कैसे और कब देखें? शनि को देखने के लिए किसी उपकरण की अनिवार्य आवश्यकता नहीं है; इसे नंगी आंखों से भी पूर्व दिशा में एक स्थिर, चमकीले पीले रंग के पिंड के रूप में पहचाना जा सकता है। लेकिन अगर आप इसके छल्लों का अनुभव करना चाहते हैं, तो ट्राइपॉड पर लगी किसी भी स्थिर दूरबीन या 6 इंच के छोटे घरेलू टेलीस्कोप का उपयोग कर सकते हैं। प्रकाश प्रदूषण से दूर साफ मौसम में इसके वलय और डिस्क स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे।

अमर पाल सिंह ने आश्वस्त किया कि यदि 4 अक्टूबर की रात मौसम की वजह से यह दृश्य न दिखे, तो निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि 7 अक्टूबर तक यह खगोलीय संयोजन थोड़े-बहुत समय अंतर के साथ आसमान में देखने को मिलता रहेगा। उन्होंने संदेश दिया कि "सही ज्ञान ही सभी समस्याओं का समाधान है, और यही विज्ञान है।"

विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें