गोरखपुर, उत्तर प्रदेश। गोरखपुर में डायल-112 में तैनात उत्तर प्रदेश पुलिस के सिपाही श्याम सुंदर चौहान को लेकर विभागीय मामला सामने आया है। वह संतकबीर नगर की धनघटा विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी (सपा) के टिकट पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, सिपाही काफी समय से निलंबित है और पुलिस लाइन में हाजिरी भी नहीं लगा रहा। विभाग उसकी लगातार गैरहाजिरी का कारण पता करने में जुटा है।
1994 बैच का सिपाही, धनघटा सीट पर नजर
श्याम सुंदर चौहान मूल रूप से संतकबीर नगर जिले के महुली थाना क्षेत्र के नैना झाला गांव का रहने वाला है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वह उत्तर प्रदेश पुलिस के 1994 बैच का सिपाही है। उसकी तैनाती अब तक 11 जिलों में रह चुकी है।
वर्ष 2023 में कुशीनगर से स्थानांतरण के बाद उसे गोरखपुर में डायल-112 में तैनाती मिली थी। इसी दौरान उसने संतकबीर नगर की धनघटा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी शुरू कर दी। वर्ष 2023 की उसकी सोशल मीडिया पोस्ट में क्षेत्र के लोगों को नए साल की शुभकामनाएं देने का उल्लेख मिलता है। इसके बाद भी वह क्षेत्र से जुड़ी गतिविधियों और राजनीतिक कार्यक्रमों के बारे में पोस्ट करता रहा।
सपा के कार्यक्रमों में सक्रियता, सोशल मीडिया पर पोस्टर
श्याम सुंदर चौहान की सोशल मीडिया पोस्ट और तस्वीरों में समाजवादी पार्टी के कार्यक्रमों से जुड़ी उसकी सक्रियता दिखाई देती है। कुछ पोस्टर में वह लाल टोपी पहने नजर आता है। पोस्टरों पर उसके नाम के साथ ‘सिपाही’ भी लिखा गया है।
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करीब एक महीने पहले संतकबीर नगर के धनघटा क्षेत्र के लोहरेया में सपा की बूथ अध्यक्षों, जोन प्रभारियों और सेक्टर प्रभारियों की समीक्षा बैठक हुई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, श्याम सुंदर ने बैठक को संबोधित किया था। उसने अपना परिचय देते हुए कहा था कि वह श्याम सुंदर चौहान सिपाही है और सभी का स्वागत करता है।
बैठक में उसने बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने की बात कही। वह पार्टी नेतृत्व से टिकट मिलने पर धनघटा सीट से चुनाव लड़ने की दावेदारी कर रहा है। हालांकि, सपा ने उसे इस सीट से आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया है या नहीं, इसकी पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
अखिलेश यादव के समर्थन में भी दिए बयान
श्याम सुंदर चौहान ने सपा के कार्यक्रम में अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने की अपील भी की थी। अपने संबोधन में उसने खुद को अनुसूचित जाति से संबंधित बताते हुए भाजपा के दलित जनप्रतिनिधियों पर आरक्षण के मुद्दे पर सवाल उठाए थे। उसने संविधान और चुनाव के भविष्य को लेकर भी अपनी राजनीतिक राय रखी थी।
उसके बयानों को उसके राजनीतिक विचारों के रूप में देखा जाना चाहिए। आरक्षण और संविधान को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध सामग्री में नहीं है।
पुलिस विभाग में रहते राजनीतिक गतिविधियों पर नियम
श्याम सुंदर ने एक फोन बातचीत में कहा था कि वह शुरुआत से सपा की नीतियों से प्रभावित रहा है। उसके मुताबिक, पुलिस विभाग में रहते हुए वह लोगों को न्याय दिलाने में खुद को असमर्थ महसूस करता था। इसी कारण उसने विधायक बनने के बारे में सोचा। उसने तीन साल से क्षेत्र में सक्रिय रहने और लोगों की मदद करने की बात भी कही।
उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 के नियम 5 में सरकारी कर्मचारियों की राजनीतिक गतिविधियों और चुनाव में भागीदारी पर प्रतिबंध का प्रावधान है। नियम के तहत सरकारी सेवक राजनीतिक दल से जुड़ने या चुनाव में हस्तक्षेप करने जैसी गतिविधियों में भाग नहीं ले सकते। https://indiankanoon.org/doc/49696060/
निलंबन के बाद भी गैरहाजिरी, पुलिस कर रही संपर्क
जानकारी के मुताबिक, श्याम सुंदर को करीब तीन महीने पहले निलंबित किया गया था। उसके बारे में यह भी आरोप है कि वह लंबे समय तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहा, जबकि उसकी हाजिरी दर्ज होती रही। हालांकि, हाजिरी किस तरह दर्ज हुई और इसमें किसकी भूमिका थी, इस बारे में विभागीय स्थिति स्पष्ट नहीं है।
गोरखपुर के एसपी क्राइम अयोध्या सिंह ने बताया कि श्याम सुंदर चौहान काफी समय से निलंबित है और हाजिरी भी नहीं लगा रहा। पुलिस उससे संपर्क कर लगातार गैरहाजिर रहने का कारण जानने का प्रयास कर रही है।
फिलहाल, उसकी राजनीतिक दावेदारी और विभागीय स्थिति दोनों अलग-अलग विषय हैं। आगे की कार्रवाई के संबंध में उपलब्ध जानकारी में कोई अंतिम विभागीय निर्णय सामने नहीं आया है।
Sabse pehle comment karne wale banein.