उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में धड़ल्ले से खड़े किए गए अवैध निर्माणों और कॉलोनियों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का शिकंजा कसता जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित 7 सदस्यीय उच्चस्तरीय न्यायिक आयोग मेरठ पहुंच चुका है। Meerut Illegal Colonies News के तहत इस आयोग की अध्यक्षता देश के सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया कर रहे हैं। आयोग के मेरठ आगमन के साथ ही जिला प्रशासन और मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) के अधिकारियों में खलबली मच गई है। आयोग ने सर्किट हाउस में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के साथ मैराथन बैठक करने के बाद शहर के चर्चित उल्देपुर क्षेत्र में जाकर अवैध कॉलोनियों का स्थलीय निरीक्षण किया।
उल्देपुर में बनी अवैध कॉलोनियों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नजर
मामले की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में पिछले कुछ वर्षों के दौरान पनपे भारी अवैध निर्माण और अनियोजित कॉलोनियों का स्वतः संज्ञान लिया था। कोर्ट के कड़े रुख के बाद 21 सितंबर 2026 को इस विशेष न्यायिक आयोग का गठन किया गया था। आयोग का मुख्य फोकस उल्देपुर क्षेत्र है, जहां कथित तौर पर भूमाफियाओं और कॉलोनाइजरों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर 150 से अधिक अवैध कॉलोनियों का जाल बिछा दिया गया है।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान प्रतिवादी विभाग के अधिवक्ताओं से जब इन कॉलोनियों के संबंध में जवाब तलब किया गया, तो यह बात सामने आई कि ये तमाम आवासीय कॉलोनियां निजी भूमियों पर बसाई गई हैं, जहां आम नागरिकों ने प्लॉट खरीदे हैं। हालांकि, इन कॉलोनियों को विकसित करने के लिए मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) से किसी प्रकार की वैधानिक अनुमति या मानचित्र (Map Approval) स्वीकृत नहीं कराया गया था।

सर्किट हाउस में अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक
मेरठ पहुंचने पर न्यायिक आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया ने सर्किट हाउस में जिला प्रशासन और विकास प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में मंडलायुक्त भानु चंद्र गोस्वामी, जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) बीबीजीटीएस मूर्ति, एमडीए उपाध्यक्ष संजय कुमार मीणा, सचिव बृजेश सिंह तथा आयोग के नोडल अधिकारी बनाए गए नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव पी. गुरु प्रसाद प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›बैठक के दौरान आयोग ने जिले में लगातार पनप रहे अवैध निर्माणों और प्रशासनिक सुस्ती पर गंभीर चर्चा की। हालांकि आयोग के आने की आहट मिलते ही एमडीए ने पहले ही शहर के कई हिस्सों में अवैध निर्माणों पर बुलडोजर चलाना शुरू कर दिया था। एमडीए सचिव बृजेश सिंह ने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण ने न्यायालय के निर्देशों का पूरी तरह से पालन किया है और इसके लिए आयोग की कार्रवाई हेतु कोषागार में 35 लाख रुपये का बजट भी संतोषित किया गया है।
उल्देपुर पहुंचकर आयोग ने किया जमीनी मुआयना
बैठक के तुरंत बाद न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया प्रशासनिक और विकास प्राधिकरण के तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सीधे उल्देपुर पहुंचे। यहां उस क्षेत्र का सघन मुआयना किया गया जहां बड़े पैमाने पर अवैध कॉलोनियां विकसित की गई हैं। लगभग 20 मिनट तक चले इस स्थलीय निरीक्षण के दौरान आयोग के अध्यक्ष ने मौके की वास्तविक स्थिति को परखा और अधिकारियों से जरूरी जानकारियां हासिल कीं। निरीक्षण के बाद आयोग की टीम वापस लौट आई।
न्यायिक आयोग की जांच के मुख्य पांच बिंदु
यह न्यायिक आयोग अपनी विस्तृत जांच के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित पाँच महत्वपूर्ण बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा:
🏪 आपके शहर के ऑफर
भूमि का स्वामित्व: क्या उन भू-खंडों की भूमि, जिन पर ये अवैध आवासीय कॉलोनियां खड़ी की गई हैं, वास्तव में सरकार के स्वामित्व (सरकारी जमीन) में आती है?
वैध स्वामियों की पहचान: यदि वह भूमि सरकार की नहीं है, तो इन विशाल भू-खंडों के वास्तविक और कागजी वैध स्वामी कौन-कौन लोग हैं?
लेन-देन की प्रक्रिया: यदि जमीन निजी व्यक्तियों की है, तो भूमि स्वामियों और प्लॉट खरीदने वाले खरीदारों के बीच वित्तीय लेन-देन किस प्रकार और किन शर्तों पर हुआ?
प्राधिकरण की निष्क्रियता: मेरठ विकास प्राधिकरण (MDA) पिछले पांच वर्षों से अधिक समय तक अपनी आंखों के सामने इन विशाल अवैध कॉलोनियों को विकसित होने की अनुमति क्यों देता रहा और विभाग क्यों निष्क्रिय बना रहा?
अधिकारियों की संलिप्तता: क्या ये अवैध कॉलोनियां एमडीए के भ्रष्ट अधिकारियों की मिलीभगत और साठगांठ से पनपी हैं? यदि हां, तो इसके लिए कौन-कौन से जिम्मेदार अधिकारी दोषी हैं?
इस उच्चस्तरीय जांच के बाद आने वाले दिनों में मेरठ के कई भ्रष्ट अधिकारियों और भूमाफियाओं पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।
Sabse pehle comment karne wale banein.