समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से एक बड़ी कानूनी राहत मिली है। Azam Khan Pan Card Case (डबल पैन कार्ड मामला) में सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने दोनों पिता-पुत्र की 10 साल की सजा को सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है और उन्हें जमानत दे दी है। हालांकि, अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा की गई दोषसिद्धि (Conviction) पर रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया है।
हाईकोर्ट के इस अहम फैसले के बाद अब्दुल्ला आजम के जेल से बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। लेकिन, आजम खान की रिहाई को लेकर अभी भी असमंजस की स्थिति बरकरार है।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶आजम खान की रिहाई पर सस्पेंस क्यों?
अब्दुल्ला आजम भले ही जेल से बाहर आ जाएं, लेकिन आजम खान की रिहाई फिलहाल स्पष्ट नहीं है। कानूनी जानकारों के अनुसार, आजम खान के खिलाफ वर्तमान में दो अन्य मामले पेंडिंग हैं, जिनमें जांच एजेंसियां सक्रिय हैं:
हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आजम खान के खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया है।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›10 सितंबर को यूपी विजिलेंस (UP Vigilance) ने भी उनके खिलाफ एक केस दर्ज किया था।
यदि इन दोनों मामलों में पुलिस या जांच एजेंसियां कोर्ट से वारंट-बी (Warrant-B) हासिल नहीं करती हैं, तभी आजम खान जेल से बाहर आ सकेंगे।
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ट्रायल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में दी गई थी चुनौती
रामपुर की एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट ने अब्दुल्ला आजम के डबल पैन कार्ड मामले में दोनों को दोषी करार दिया था। 17 नवंबर 2025 को कोर्ट ने पिता-पुत्र दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी।
इसके बाद राज्य सरकार के वकील ने 5 मई 2026 को सजा की अवधि बढ़ाने के लिए रामपुर की अपर कोर्ट (सेशन कोर्ट) में अपील दाखिल की थी। सुनवाई के बाद अपर कोर्ट ने 23 मई 2026 को आजम खान की सजा को 3 साल और बढ़ाकर कुल 10 साल कर दिया था। हालांकि, कोर्ट ने बेटे अब्दुल्ला की सजा की अवधि में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी।
इस फैसले के खिलाफ आजम खान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया था। उनकी अपील में ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए दोषसिद्धि पर रोक लगाने, सजा निलंबित करने और अंतरिम जमानत पर रिहा करने की मांग की गई थी। 15 अक्टूबर को इस मामले में विस्तृत बहस के बाद जस्टिस समित गोपाल की सिंगल बेंच ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे गुरुवार को सुनाया गया।
क्या है बहुचर्चित डबल पैन कार्ड मामला?
इस बहुचर्चित मामले की शुरुआत साल 2019 में हुई थी, जब रामपुर के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी। वर्तमान भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने इस मामले की शिकायत की थी, जिसके आधार पर भारतीय न्याय संहिता (पहले आईपीसी) की धारा 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इससे पहले साल 2017 में बसपा प्रत्याशी नवाब काजिम अली खान उर्फ नवेद मियां ने भी चुनाव आयोग और पुलिस से इस संबंध में शिकायत की थी।
मुख्य आरोप: आरोप था कि अब्दुल्ला आजम के पास अलग-अलग जन्मतिथि वाले दो अलग-अलग पैन कार्ड मौजूद थे। पुलिस जांच में पाया गया कि एक पैन कार्ड में अब्दुल्ला की जन्मतिथि 1 जनवरी 1993 दर्ज थी, जबकि दूसरे पैन कार्ड में जन्मतिथि 30 सितंबर 1990 लिखी गई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि इन फर्जी और हेरफेर किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल अब्दुल्ला आजम ने विधानसभा चुनाव लड़ने और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं में लाभ लेने के लिए किया था।
Sabse pehle comment karne wale banein.