UP Govt Jobs Character Verification Rules: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी (Sarkari Naukri) की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बेहद अहम खबर है। हाल ही में दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के दौरान 'सत्ता परिवर्तन' (Regime Change) जैसी देशविरोधी गतिविधियों की बात सामने आने के बाद, उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। राज्य सरकार ने सरकारी नौकरियों में चरित्र सत्यापन (Character Verification) के नियमों को और अधिक सख्त कर दिया है।
प्रमुख सचिव (नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग) एम. देवराज द्वारा जारी नए शासनादेश के अनुसार, अब सत्ता परिवर्तन के लिए हिंसा का रास्ता अपनाने वाले संगठनों से जुड़े लोगों के लिए उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी पाना लगभग असंभव होगा।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶क्या है नया शासनादेश?
जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि प्रदेश के विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों में सीधी भर्ती (Direct Recruitment) के तहत चयनित अभ्यर्थियों का चरित्र सत्यापन अब पहले से ज्यादा कड़ाई से किया जाएगा।
- हिंसात्मक संगठन: ऐसे अभ्यर्थी जो किसी ऐसे संगठन के सदस्य हैं, जिनका घोषित उद्देश्य हिंसात्मक तौर-तरीकों से व्यवस्था को बदलना (रिजीम चेंज करना) है, उन्हें सरकारी सेवा के लिए अपात्र (Disqualified) माना जाएगा।
- राजनीतिक विचारधारा छूट: हालांकि, आदेश में यह साफ किया गया है कि केवल किसी विशेष राजनीतिक विचारधारा के आधार पर किसी भी अभ्यर्थी को अयोग्य नहीं ठहराया जाएगा।
इन गंभीर अपराधों में बंद हुए नौकरी के दरवाजे
नए आदेश के तहत कुछ गंभीर अपराधों की एक सूची जारी की गई है। यदि किसी अभ्यर्थी की संलिप्तता हत्या, डकैती, बलात्कार, महिलाओं की लज्जा भंग, भ्रष्टाचार, आतंकवादी कृत्य, पेपर लीक (Paper Leak) और सॉल्वर गैंग (Solver Gang) जैसे जघन्य अपराधों में पाई जाती है, तो उसके लिए सरकारी नौकरी के दरवाजे पूरी तरह से बंद कर दिए गए हैं।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›सिर्फ एफआईआर होने पर अयोग्य नहीं होंगे अभ्यर्थी
युवाओं को राहत देते हुए शासनादेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि केवल एफआईआर (FIR) दर्ज होने या पुलिस जांच लंबित (Pending) रहने मात्र से अभ्यर्थी को स्वतः अयोग्य नहीं माना जाएगा।
🏪 आपके शहर के ऑफर
- अंतिम रूप से कोर्ट से बरी (Acquitted) होने पर।
- आपसी समझौते से निपटे मामलों में।
- किशोर न्याय कानून (Juvenile Justice Act) के तहत आने वाले मामलों में स्वतः अयोग्यता का नियम लागू नहीं होगा।
सत्यापन के लिए 30 दिन की डेडलाइन
सत्यापन प्रक्रिया को पारदर्शी और तेज बनाने के लिए पुलिस और स्थानीय अभिसूचना इकाई (LIU) को सख्त निर्देश दिए गए हैं:
- 30 दिन में रिपोर्ट: पुलिस और एलआईयू को सत्यापन की रिपोर्ट मिलने के 30 दिन के अंदर नियुक्ति प्राधिकारी को सौंपनी होगी। समय पर रिपोर्ट न मिलने पर गृह विभाग इसकी सीधी निगरानी करेगा।
- घर जाकर पूछताछ नहीं: चरित्र सत्यापन के लिए पुलिस या एलआईयू अधिकारी अब अभ्यर्थी के घर जाकर पूछताछ नहीं करेंगे और न ही अभ्यर्थी की भौतिक उपस्थिति (Physical Presence) अनिवार्य होगी।
- पक्ष रखने का मौका: यदि सत्यापन रिपोर्ट प्रतिकूल (Negative) होती है, तो जिलाधिकारी अपनी संस्तुति भेजने से पहले अभ्यर्थी को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर देंगे।
पूर्व कर्मचारियों और प्रोविजनल नियुक्ति पर नियम
आदेश में यह भी कहा गया है कि जो कर्मचारी पहले से ही सरकारी सेवा में कार्यरत हैं, उनका नए सिरे से चरित्र सत्यापन नहीं किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर उनकी पिछली तैनाती से जरूरी जानकारी मांगी जा सकती है।
इसके अलावा, केवल चरित्र सत्यापन रिपोर्ट लंबित होने के कारण किसी अभ्यर्थी का नियुक्ति पत्र नहीं रोका जाएगा। विभाग अभ्यर्थी से एक 'स्व-घोषणा पत्र' (Self Declaration) लेकर उसे औपबंधिक (Provisional) नियुक्ति पत्र जारी कर सकता है। लेकिन यदि बाद में सत्यापन में जानकारी गलत पाई जाती है या अभ्यर्थी अयोग्य साबित होता है, तो उसकी नियुक्ति तत्काल रद्द कर दी जाएगी और कानूनी कार्रवाई (Legal Action) भी की जाएगी।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह समाचार उत्तर प्रदेश के नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग द्वारा जारी शासनादेश और मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है। विस्तृत नियमों और शर्तों के लिए आधिकारिक विभागीय वेबसाइट का संदर्भ लें।
Sabse pehle comment karne wale banein.