उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में सेना और अग्निवीर (Agniveer) भर्ती के नाम पर भोले-भाले युवाओं से लाखों रुपये ऐंठने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की संयुक्त कार्रवाई में मदपाल नामक एक दलाल को गिरफ्तार किया गया है। प्रारंभिक जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस Agniveer Recruitment Scam Meerut में आरोपी ने पिछले एक साल के भीतर 20 से अधिक युवाओं को अपना शिकार बनाया और उनसे 30 लाख रुपये से ज्यादा की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस अब आरोपी के पूरे नेटवर्क और सैन्य क्षेत्र में उसके संभावित सहयोगियों की गहन पड़ताल कर रही है।

तीन पीड़ितों की शिकायत पर मिलिट्री इंटेलिजेंस हुई सक्रिय

एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले ने इस अहम खुलासे की जानकारी देते हुए बताया कि करीब दस दिन पहले तीन पीड़ित युवाओं ने मेरठ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस की मध्य कमान यूनिट में इस धोखाधड़ी की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

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शिकायत मिलते ही मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) की टीम तुरंत हरकत में आई। टीम ने अमरोहा स्थित आरोपी के पैतृक गांव और उसके स्थानीय संपर्कों की पूरी गोपनीय जानकारी जुटाई। इसके बाद, इंटेलिजेंस टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर एक संयुक्त अभियान (Joint Operation) चलाया और सटीक घेराबंदी कर आरोपी मदपाल को गिरफ्तार कर लिया।

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खेती के बहाने युवाओं से बढ़ाता था मेलजोल

पुलिस की पूछताछ और जांच में सामने आया है कि आरोपी मदपाल मूल रूप से अमरोहा का रहने वाला है और गांव में अपने पिता के साथ खेती-बाड़ी का काम करता था। खेतों पर आने-जाने के दौरान उसकी मुलाकात अक्सर ऐसे युवाओं से होती थी जो सेना या पुलिस भर्ती की तैयारी करते हुए दौड़ लगाते थे।

मदपाल बहुत ही शातिर तरीके से इन युवाओं से मेलजोल बढ़ाता था। धीरे-धीरे वह उन्हें अपनी बातों के जाल में फंसा लेता और यह दावा करता था कि सेना के बड़े अधिकारियों और पुलिस महकमे में उसकी गहरी पहुंच है। सेना की वर्दी पहनने का सपना देख रहे युवा आसानी से उसका भरोसा कर लेते थे और ठगी का शिकार हो जाते थे।

भर्ती केंद्र के बाहर खड़ा कर जमाता था रौब

जांच एजेंसियों के अनुसार, मदपाल युवाओं का विश्वास जीतने के लिए एक विशेष पैंतरा अपनाता था। वह शिकार हुए युवाओं को सेना के भर्ती केंद्रों या सैन्य क्षेत्रों (Cantt Area) तक लेकर जाता था। वहां पहुंचकर वह युवाओं को बाहर खड़ा कर देता था और खुद अकेले अंदर चला जाता था।

इससे भोले-भाले युवाओं को यह भ्रम हो जाता था कि आरोपी की सच में सेना के भीतर अधिकारियों तक पहुंच है। अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि भर्ती केंद्र के अंदर जाते समय क्या कोई अन्य व्यक्ति या बिचौलिया उसकी मदद करता था? पुलिस उसके संभावित सहयोगियों की भूमिका को लेकर भी सख्ती से पूछताछ कर रही है।

मूल दस्तावेज रख लेता था गिरवी, 30 लाख की ठगी का अंदेशा

पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस द्वारा अलग-अलग स्तर पर की गई जांच में यह अंदेशा जताया गया है कि मदपाल ने एक साल के भीतर 20 से अधिक युवाओं से 30 लाख रुपये से अधिक की रकम ऐंठी है।

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी कथित तौर पर भर्ती का झांसा देकर युवाओं के मूल शैक्षणिक और पहचान दस्तावेज (Original Documents) अपने पास जमा करा लेता था। एजेंसियों का मानना है कि दस्तावेज अपने कब्जे में रखने से पीड़ितों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनता था और वे ठगी का अहसास होने के बावजूद उससे रकम वापस मांगने की हिम्मत नहीं जुटा पाते थे।

फर्जी दस्तावेज और रैकेट के अन्य सदस्यों की तलाश तेज

वर्तमान में पुलिस और इंटेलिजेंस की टीमें यह पता लगा रही हैं कि क्या मदपाल के पास सेना से जुड़े कोई फर्जी दस्तावेज, कॉल लेटर या मुहरें भी मौजूद थीं?

फिलहाल, जांच एजेंसियां अन्य संभावित पीड़ितों की पहचान करने, रकम के लेन-देन (Money Trail) का पता लगाने और आरोपी के कॉल रिकॉर्ड्स के जरिए उसके पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हुई हैं। एसपी सिटी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही ठगी के मामलों की वास्तविक संख्या और इस बड़े रैकेट में शामिल अन्य सफेदपोशों या सहयोगियों की भूमिका पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

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