सुहागिन महिलाओं के सबसे बड़े पर्वों में से एक 'करवा चौथ' 29 अक्टूबर को देश भर में अपार श्रद्धा, उल्लास और भक्ति-भाव के साथ मनाया जा रहा है। पति की लंबी उम्र, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए रखा जाने वाला यह निर्जला व्रत अपने कठोर नियमों के लिए जाना जाता है। इस अवसर पर पूजा के सही समय और चंद्रोदय को लेकर महिलाओं में काफी उत्सुकता रहती है।

इस वर्ष के पंचांग और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, पूजा का विशेष शुभ मुहूर्त शाम के समय बन रहा है। बिजनौर जिले के धामपुर निवासी प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित निशांत गौड़ ने Karwa Chauth Puja Muhurat, कथा श्रवण के नियम और स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों की विस्तार से जानकारी दी है।

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शाम 5:36 से 6:53 बजे तक रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त

पंचांग गणनाओं के अनुसार, 29 अक्टूबर को करवा चौथ की मुख्य पूजा का शुभ समय शाम 5:36 बजे से शुरू होकर शाम 6:53 बजे तक रहेगा। पंडित निशांत गौड़ ने बताया कि इस सवा घंटे के शुभ मुहूर्त में भगवान श्री गणेश, माता पार्वती, भगवान शिव और करवा माता की विधि-विधान से पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है।

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श्रद्धालुओं को इसी अवधि में अपनी पूजा-थाली सजानी चाहिए और देवी-देवताओं का आह्वाहन करना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्थानीय पंचांग और भौगोलिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग शहरों में इस शुभ मुहूर्त में कुछ मिनटों का मामूली अंतर हो सकता है।

गोधूलि बेला में सुनें करवा चौथ की कथा

व्रत कथा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पंडित निशांत गौड़ ने बताया कि करवा चौथ की कथा सुनने का सबसे उत्तम समय गोधूलि बेला है। शाम 4 बजे से लेकर सूर्यास्त होने तक के समय को कथा श्रवण के लिए बहुत शुभ माना गया है। कथा सुनते समय हाथ में चावल या गेहूं के दाने रखने चाहिए और पूरी श्रद्धा के साथ भगवान का स्मरण कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करनी चाहिए।

रात 8:10 से 8:14 बजे के बीच होगा चंद्रोदय

करवा चौथ के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व है, क्योंकि चंद्र देव को अर्घ्य दिए बिना यह व्रत पूरा नहीं माना जाता। मौसम और ज्योतिषीय अनुमानों के अनुसार, मेरठ और बिजनौर (पश्चिमी यूपी) के आसपास के क्षेत्रों में रात करीब 8:10 से 8:14 बजे के बीच चंद्रोदय होने की संभावना है।

चंद्रमा निकलने के बाद महिलाएं छलनी से पहले चांद के दर्शन करती हैं, उसे अर्घ्य अर्पित करती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखकर उनके हाथ से जल ग्रहण कर व्रत का पारण करती हैं। मौसम में धुंध या बादलों के कारण चंद्रमा के दर्शन में थोड़ी देरी हो सकती है, इसलिए धैर्य बनाए रखें।

पुरुष भी रख सकते हैं अपनी आस्था के अनुसार व्रत

आमतौर पर करवा चौथ को केवल महिलाओं का व्रत माना जाता है, लेकिन बदलते परिवेश में इसमें भी बदलाव देखा जा रहा है। पंडित निशांत गौड़ के अनुसार, करवा चौथ का व्रत केवल महिलाओं तक ही सीमित नहीं है। पति-पत्नी के प्रेम के इस पर्व पर पुरुष भी अपनी इच्छा, आस्था और पत्नी के प्रति समर्पण भाव से यह व्रत रख सकते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भक्ति भाव से की गई गणेश जी और चंद्र देव की पूजा पूरे परिवार में खुशहाली लाती है।

बीमार और गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य को दें प्राथमिकता

कठिन निर्जला व्रत होने के कारण स्वास्थ्य विशेषज्ञों और ज्योतिषाचार्यों ने बीमार लोगों के लिए विशेष हिदायत दी है। पंडित निशांत गौड़ ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि कोई बीमारी से जूझ रहा है या किसी महिला का स्वास्थ्य ठीक नहीं है, तो उन्हें अपनी सेहत को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए।

जरूरत पड़ने पर बीमार लोग, बुजुर्ग या गर्भवती महिलाएं पानी पीकर या फलाहार लेकर भी यह व्रत कर सकती हैं। यदि किसी को नियमित दवा लेनी है, तो व्रत के नाम पर उसे बिल्कुल नहीं टालना चाहिए। ईश्वर केवल सच्ची श्रद्धा और भाव देखते हैं, इसलिए शरीर और स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचाकर व्रत रखने की कोई आवश्यकता नहीं है।

DISCLAIMER (अस्वीकरण):इस लेख में दी गई पूजा के मुहूर्त, चंद्रोदय का समय और व्रत के नियमों से संबंधित जानकारी पंचांग गणनाओं और ज्योतिषाचार्य (पंडित निशांत गौड़) के विचारों पर आधारित है। भौगोलिक स्थिति (शहर/अक्षांश) के अनुसार चंद्रोदय के समय में भिन्नता हो सकती है। Khabreelal इस जानकारी की पूर्ण सटीकता का दावा नहीं करता है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में व्रत रखने से पहले अपने चिकित्सक की सलाह अवश्य लें।

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