नई दिल्ली: भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में निवेशकों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स जैसे पेटीएम (Paytm), गूगल पे (Google Pay), और फोन पे (PhonePe) के माध्यम से बेचे जा रहे डिजिटल गोल्ड निवेश उत्पादों से दूर रहने की सख्त सलाह दी है। SEBI ने स्पष्ट किया है कि ये उत्पाद न तो सिक्योरिटी (प्रतिभूति) माने जाते हैं और न ही कमोडिटी डेरिवेटिव, जिसका मतलब है कि इन पर किसी भी नियामक निकाय (Regulatory Body) का सीधा नियंत्रण नहीं है।READ ALSO:-SIR फॉर्म कैसे भरें और कौन से दस्तावेज़ हैं ज़रूरी, यहां देखें पूरी चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
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इस चेतावनी का सीधा अर्थ है कि यदि इन प्लेटफॉर्म्स पर कोई डिफॉल्ट होता है, तो SEBI निवेशकों को कोई वैधानिक सुरक्षा या शिकायत निवारण तंत्र (Grievance Redressal Mechanism) प्रदान नहीं कर पाएगा। ऐसे में, यह जानना जरूरी है कि जिनका पहले से डिजिटल गोल्ड में निवेश है, उन्हें अब क्या करना चाहिए और सुरक्षित तरीके से सोने में निवेश के क्या विकल्प उपलब्ध हैं।
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डिजिटल गोल्ड क्या है और क्यों है अनियंत्रित?

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डिजिटल गोल्ड, सोने का इलेक्ट्रॉनिक रूप है, जिसे एप्स के जरिए खरीदा जाता है। कंपनी दावा करती है कि वे वॉल्ट में आपके खरीदे गए सोने के बराबर फिजिकल गोल्ड रखती है।
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    शुरुआत: भारत में इसे 2012 में ऑगमॉन्ट (Augmont) द्वारा लॉन्च किया गया था, ताकि लोग 1 रुपये जैसी छोटी राशि में भी सोना खरीद सकें।
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    लोकप्रियता: MMTC-PAMP (MMTC और स्विस MKS PAMP का संयुक्त उद्यम) के आने और पेटीएम, फोनपे जैसी कंपनियों के साथ साझेदारी के बाद यह बहुत लोकप्रिय हो गया, और इसका बाजार 13,800 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
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    नियामक शून्य: SEBI इसे सिक्योरिटी या कमोडिटी डेरिवेटिव नहीं मानता। वहीं, RBI भी इसे बैंकिंग या डिपॉजिट प्रोडक्ट नहीं मानता। इसलिए यह पूरी तरह से प्लेटफॉर्म के "भरोसे" पर चल रहा है, जिस कारण यह अनियंत्रित (Unregulated) है। (External link: SEBI Official Press Release URL)
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SEBI की चेतावनी के बाद मौजूदा निवेशकों को क्या करना चाहिए?

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जिन निवेशकों के पास पहले से डिजिटल गोल्ड निवेश है, उन्हें तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि SEBI ने इसे प्रतिबंधित (Ban) नहीं किया है, बल्कि केवल जोखिमों के प्रति आगाह किया है। विशेषज्ञों की सलाह है:
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    डिलीवरी लें: आप अपने डिजिटल गोल्ड को फिजिकल गोल्ड (सिक्के या बिस्किट) में बदल कर उसकी डिलीवरी ले सकते हैं, जिससे काउंटरपार्टी रिस्क (Counterparty Risk) खत्म हो जाएगा।
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    सुरक्षित विकल्प में शिफ्ट हों: इसे बेचकर तुरंत SEBI द्वारा विनियमित उत्पादों (Regulated Products) में निवेश करें।
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    जोखिम स्वीकार करें: अगर निवेश छोटा है और प्लेटफॉर्म की ऑडिटिंग पर आपको भरोसा है, तो आप इसे रख सकते हैं, लेकिन ध्यान रहे कि किसी भी डिफॉल्ट की स्थिति में जोखिम आपका होगा।
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गोल्ड में निवेश के 3 सुरक्षित और विनियमित तरीके

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SEBI और RBI द्वारा नियंत्रित सुरक्षित तरीकों से डिजिटल गोल्ड निवेश की जगह पैसा लगाया जा सकता है, जो पारदर्शिता और निवेशक सुरक्षा प्रदान करते हैं:
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1. फिजिकल गोल्ड (Physical Gold)
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    सुरक्षित तरीका: निवेश के लिए ज्वेलरी खरीदने से बचें, क्योंकि उसमें 10-20% मेकिंग चार्ज और शुद्धता का खतरा होता है। इसकी जगह हॉलमार्क वाले सोने के सिक्के या बिस्किट खरीदना सबसे बेहतर है।
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    फायदे: सबसे ठोस और पारंपरिक तरीका।
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    नुकसान: सुरक्षा (Safety) और स्टोरेज की चिंता।
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2. गोल्ड ETF (Exchange-Traded Fund)

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    कैसे काम करता है: ये स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE) पर शेयर्स की तरह ट्रेड होते हैं। एक यूनिट लगभग 1 ग्राम गोल्ड के बराबर होती है। दाम सीधे सोने के बाजार मूल्य से जुड़े होते हैं।
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    जरूरी: इसमें निवेश के लिए डीमैट अकाउंट (Demat Account) अनिवार्य है।
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    फायदे: अत्यधिक तरलता (Liquidity), चोरी या शुद्धता की कोई चिंता नहीं, और लागत-कुशल (Cost-Efficient)। (Internal link to related article on Gold ETF vs SGB)
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3. गोल्ड म्यूचुअल फंड्स (Gold Mutual Funds)

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    कैसे काम करता है: ये फंड मैनेजर्स द्वारा संचालित होते हैं, जो मुख्य रूप से गोल्ड ETFs और गोल्ड से जुड़े स्टॉक्स में पैसा लगाते हैं।
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    जरूरी: इसके लिए डीमैट अकाउंट की जरूरत नहीं पड़ती है।
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    फायदे: SIP या लम्पसम दोनों तरह से निवेश किया जा सकता है। यह गोल्ड ETF की तरह ही सुरक्षित है, लेकिन ब्रोकर अकाउंट की आवश्यकता नहीं होती।
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डिजिटल गोल्ड अधिक महंगा क्यों?

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ज़ीरोधा (Zerodha) के सीईओ नितिन कामथ जैसे वित्तीय विशेषज्ञों ने भी डिजिटल गोल्ड की लागत अक्षमता पर प्रकाश डाला है। डिजिटल गोल्ड निवेश में आपको upfront ही लगभग 6% का नुकसान होता है, जिसमें 3% GST और 2-3% प्लेटफॉर्म मार्जिन (spreads) शामिल होता है, जो इसे ETFs और म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले महंगा बनाता है।
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SEBI की चेतावनी के बाद डिजिटल गोल्ड निवेश एक जोखिम भरा विकल्प बन गया है। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने मौजूदा डिजिटल गोल्ड को बेचकर या उसकी डिलीवरी लेकर, गोल्ड ETF, गोल्ड म्यूचुअल फंड्स या फिजिकल गोल्ड बिस्किट/सिक्कों जैसे SEBI द्वारा विनियमित और सुरक्षित विकल्पों में निवेश करें, जो अधिक पारदर्शी और कॉस्ट-एफिशिएंट हैं।
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