देशभर में तेजी से फैल रहे Digital Arrest SC News और साइबर ठगी के मामलों पर देश की सर्वोच्च अदालत ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुजुर्गों, पेंशनर्स और रिटायर्ड कर्मचारियों को डराकर उनकी जिंदगी भर की कमाई लूटने वालों को 'बेरहम अपराधी' करार देते हुए इसे 'डिजिटल डकैती' की संज्ञा दी है। चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने आरोपियों को जमानत (Bail) देने का कड़ा विरोध किया है।
28 अक्टूबर 2026 को सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान साफ किया कि डिजिटल अरेस्ट कर जबरन वसूली (Extortion) करने वाले क्रूर अपराधियों से निपटने के लिए बेहद सख्त कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता है।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶"मौका मिला तो रद्द करेंगे जमानत, ट्रायल से पहले हो सजा"
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने एक ऐसा मामला आया जिसमें दो आरोपियों के खिलाफ 12 राज्यों में 35 साइबर अपराध (Cyber Crime) के मामले दर्ज थे। इन आरोपियों की कंपनी के बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) का इस्तेमाल कथित रूप से ठगी की रकम को ट्रांसफर करने के लिए किया गया था। आरोपियों ने सभी मामलों को एक जगह जोड़ने की मांग की, जिसे कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।
इसी दौरान केरल के एर्नाकुलम के एक 81 वर्षीय बुजुर्ग का मामला भी सामने आया, जिनसे डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1.90 करोड़ रुपये ठग लिए गए थे। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा, "अगर कानून में गुंजाइश है, तो इन बेरहम अपराधियों को ट्रायल से पहले ही सजा मिलनी चाहिए। अगर हमें मौका मिला, तो हम डिजिटल अरेस्ट के आरोपियों को किसी भी अदालत से बेल (जमानत) पर रिहा नहीं होने देंगे।"
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›हालांकि, जानकारों के अनुसार यह अदालत की मौखिक टिप्पणी है, अभी कोई नया कानून या जमानत पर पूर्ण प्रतिबंध लागू नहीं हुआ है, लेकिन यह अदालतों और जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ा सख्त संदेश जरूर है।
8 महीने में लूटे गए 647 करोड़ रुपये
देश में डिजिटल अरेस्ट का जाल कितनी तेजी से फैल रहा है, इसका अंदाजा हालिया आंकड़ों से लगाया जा सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में केवल जनवरी से अगस्त (8 महीने) के बीच देशभर में डिजिटल अरेस्ट से जुड़ी 21,900 से अधिक शिकायतें दर्ज की गईं। इन मामलों में ठगों ने आम जनता के 647 करोड़ रुपये से अधिक लूट लिए। इससे पहले 2025 में शिकायतों की संख्या 58,239 थी, जिनमें 1,211 करोड़ रुपये की ठगी दर्ज की गई थी।
डिजिटल अरेस्ट रोकने में बैंकिंग सिस्टम की 5 बड़ी कमियां
सुप्रीम कोर्ट ने 29 अक्टूबर 2026 की सुनवाई में विशेष रूप से बैंकिंग सिस्टम (Banking System) की कमजोरियों और लापरवाही पर भी कड़े सवाल उठाए:
KYC की अनदेखी: बैंक खाते खोलते समय केवाईसी (KYC) और खाताधारक की पहचान की जांच कितनी प्रभावी है, इस पर सवाल है।
संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर रोक नहीं: जब किसी खाते के सामान्य रिकॉर्ड से अलग अचानक बहुत बड़ी रकम ट्रांसफर होने लगती है, तो बैंक उसे तुरंत होल्ड क्यों नहीं करते?
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फिजिकल वेरिफिकेशन का अभाव: किसी असामान्य और बड़े ट्रांजैक्शन को मंजूरी देने से पहले बैंक सीधे खाताधारक से संपर्क (कॉल/वीडियो) कर पुष्टि क्यों नहीं करता?
जवाबदेही और मुआवजा: यदि बैंक की सुरक्षा प्रणाली की लापरवाही से ग्राहक के साथ साइबर ठगी होती है, तो बैंक की जवाबदेही तय कर पीड़ित को मुआवजा (Compensation) दिलाने की व्यवस्था क्यों न हो? कोर्ट ने आरबीआई (RBI) के केवाईसी नियमों की समीक्षा करने का भी सुझाव दिया है।
क्या है डिजिटल अरेस्ट और कैसे रहें सुरक्षित?
डिजिटल अरेस्ट साइबर ठगी का एक नया और खौफनाक तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI, कस्टम, ट्राई (TRAI) या सुप्रीम कोर्ट का अधिकारी बताकर पीड़ित को कॉल करते हैं। वे पीड़ित पर मनी लॉन्ड्रिंग या ड्रग्स पार्सल जैसे झूठे आरोप लगाकर उसे घंटों तक स्काइप या व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर बंधक (Digital Arrest) बनाए रखते हैं। गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर और फर्जी वारंट भेजकर बैंक खातों में लाखों रुपये ट्रांसफर करा लिए जाते हैं।
बचाव के 4 तरीके:
फोन कॉल या वीडियो कॉल पर किसी के डराने पर कोई पैसा ट्रांसफर न करें।
जांच एजेंसियां कभी भी वीडियो कॉल पर पूछताछ कर पैसे नहीं मांगती हैं, ऐसे कॉल्स तुरंत काट दें।
बैंक की डिटेल और OTP किसी से साझा न करें।
ठगी का शिकार होने पर तुरंत नेशनल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या
cybercrime.gov.inपर शिकायत दर्ज करें।
Sabse pehle comment karne wale banein.