नई दिल्ली: होम लोन और अन्य ऋणों पर ऊंची ईएमआई (EMI) का भुगतान कर रहे लाखों उपभोक्ताओं के लिए एक राहत भरी खबर है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिया है कि भविष्य में नीतिगत ब्याज दरों (policy interest rates) में और कटौती की गुंजाइश बनी हुई है। उनके इस बयान से रेपो रेट कटौती की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जिसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा।READ ALSO:-सावधान: क्या सिर्फ 'आधार कार्ड' देने से जुड़ जाएगा वोटर लिस्ट में नाम? चुनाव आयोग ने दूर किया कन्फ्यूजन, जान लें नए नियम
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'जी बिजनेस' को दिए एक हालिया इंटरव्यू में गवर्नर मल्होत्रा ने कहा, "अक्टूबर में पिछली MPC (मौद्रिक नीति समिति) मीटिंग में यह साफ तौर पर बताया गया था कि पॉलिसी रेट्स में कटौती की गुंजाइश है।" उन्होंने आगे कहा कि तब से मिले मैक्रो-इकोनॉमिक डेटा ने यह संकेत नहीं दिया है कि रेट कम करने की गुंजाइश कम हुई है।
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दिसंबर में रेपो रेट कटौती की उम्मीद क्यों?
\r\n\r\nआरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 2025 की पहली छमाही में पॉलिसी रेट्स में कुल 100 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की थी, लेकिन अगस्त से रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। हालांकि, अब बाजार दिसंबर में रेपो रेट कटौती की उम्मीद कर रहा है, जिसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
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- \r\n रिकॉर्ड कम खुदरा महंगाई: भारत में खुदरा महंगाई अक्टूबर 2025 में 0.25% के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भारी कमी और जीएसटी दरों में कटौती के कारण हुई है।\r\n \r\n
- \r\n MPC मिनट्स: अक्टूबर की एमपीसी मीटिंग के मिनट्स से पता चला था कि एमपीसी के सदस्यों ने संकेत दिया था कि देश का महंगाई आउटलुक और बेहतर हो रहा है, जिससे भविष्य में रेट में कटौती की गुंजाइश बनती है।\r\n \r\n
- \r\n EMI पर असर: अगर आरबीआई अगली मौद्रिक समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों में कटौती करता है, तो बैंकों द्वारा होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें कम हो सकती हैं। इससे EMI भरने वालों को थोड़ी राहत मिलेगी। (External link: RBI Monetary Policy Committee Minutes URL)\r\n \r\n
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रुपये में गिरावट पर आरबीआई गवर्नर का मत
\r\n\r\nरेपो रेट कटौती के संकेतों के बीच, आरबीआई गवर्नर मल्होत्रा ने रुपये में हालिया गिरावट पर भी अपनी राय व्यक्त की।
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- \r\n स्वाभाविक गिरावट: उन्होंने कहा कि रुपये में हालिया गिरावट स्वाभाविक है। रुपये में 3-3.5% सालाना गिरावट ऐतिहासिक औसत के हिसाब से है।\r\n \r\n
- \r\n आरबीआई का दखल: हालांकि, RBI मुद्रा में ज्यादा उतार-चढ़ाव को प्रबंधित करने के लिए दखल (Intervention) देता रहता है।\r\n \r\n
- \r\n एशियाई मुद्राओं में प्रदर्शन: इस साल रुपये में 4% से थोड़ी ज्यादा गिरावट आई है, और यह सबसे खराब परफॉर्म करने वाली एशियाई मुद्राओं में से एक रही है।\r\n \r\n
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RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान ने आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट कटौती की प्रबल संभावना जता दी है। रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंची खुदरा महंगाई दर इस कटौती के लिए मजबूत आधार तैयार करती है। यदि दिसंबर में MPC दरें घटाती है, तो यह होम लोन और अन्य ऋणों पर EMI कम होने के रूप में करोड़ों भारतीय उपभोक्ताओं को बड़ी राहत प्रदान कर सकती है, हालांकि अर्थशास्त्रियों को ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप रेट्स में अभी भी यथास्थिति का संकेत मिला है।
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