उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना से सांसद की कानूनी परेशानियां अचानक बढ़ गई हैं। गाजियाबाद की अदालत ने उनके खिलाफ Chandrashekhar Azad Arrest Warrant जारी कर दिया है। यह कार्रवाई एक पुराने मामले में लगातार अदालत से गैरहाजिर रहने के कारण की गई है। कोर्ट ने सिर्फ गिरफ्तारी का वारंट ही नहीं, बल्कि उनकी संपत्ति कुर्क करने (जब्त करने) का भी सख्त आदेश दिया है।

​गाजियाबाद की विशेष एमपी-एमएलए (MP-MLA) कोर्ट में इस मामले की सुनवाई चल रही है। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, सांसद को कई बार समन भेजे गए थे, लेकिन वह लगातार न्यायपालिका की कार्यवाही से दूर रहे। इसी कड़ी में गुरुवार को हुई अहम सुनवाई के दौरान भी वह अदालत में पेश नहीं हुए। इसके बाद अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें फरार मानते हुए गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया।

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​क्या है 2018 का पूरा मामला?

सांसद के खिलाफ यह मामला नया नहीं है। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, यह घटना 2018 की है, जिसकी एफआईआर साहिबाबाद पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई गई थी। यह मुकदमा मुख्य रूप से एक युवक के साथ हुई मारपीट और दुर्व्यवहार से जुड़ा हुआ है। पुलिस ने इस संबंध में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 323 और धारा 305 के तहत मामला दर्ज किया था। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में आजाद के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से यह एक प्रमुख मामला है।

​हथियारों को लेकर हुआ था विवाद

इस मामले में पीड़ित पक्ष के वकील भजनलाल गौतम ने घटना की विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि साल 2018 में गाजियाबाद के नूरपुर गांव का निवासी उनका मुवक्किल धर्मेंद्र साहिबाबाद के वृंदावन गार्डन में एक विवाह समारोह में शामिल होने गया था। इसी कार्यक्रम में चंद्रशेखर भी अपने समर्थकों के साथ पहुंचे थे।

​वकील के अनुसार, आजाद के साथ आए लोगों के पास काफी हथियार थे। इसे देखकर धर्मेंद्र ने सहज रूप से पूछ लिया कि विवाह समारोह में इतने हथियार लेकर क्यों आए हैं? आरोप है कि इस साधारण सवाल पर चंद्रशेखर भड़क गए और उन्होंने कहा कि क्या तुम्हें राइफलें दिखाई नहीं दे रही हैं।

​मारपीट और जान से मारने की धमकी का आरोप

शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि इस कहासुनी के तुरंत बाद चंद्रशेखर ने युवक को थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद उनके साथ मौजूद गुलजार सिद्दीकी, पंकज जाटव और लगभग 15 अन्य अज्ञात लोगों ने धर्मेंद्र को बुरी तरह पीटा। जब पीड़ित ने इस मारपीट का विरोध करने की कोशिश की, तो आरोपियों द्वारा उसे जान से मारने की धमकियां भी दी गईं। अब इसी मामले में अदालत ने सख्त कदम उठाते हुए पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। आगामी विधानसभा चुनावों की सुगबुगाहट के बीच यह अदालती फैसला आजाद समाज पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

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