नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली और एनसीआर की हवा 'जहरीली' हो चुकी है। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के खतरनाक स्तर पर पहुंचने के बाद अब देश की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट (Delhi Pollution Par Supreme Court) ने एक अहम सुनवाई करते हुए स्कूलों में आयोजित होने वाले स्पोर्ट्स फंक्शन और आउटडोर गतिविधियों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि मौजूदा हालात में बच्चों को खुले में दौड़ाना उन्हें 'गैस चैंबर' में डालने जैसा है।READ ALSO:-लॉरेंस का भाई 'गैंगस्टर अनमोल बिश्नोई' अमेरिका से भारत लाया गया: सलमान खान फायरिंग और मूसेवाला मर्डर का है आरोपी, NIA ने एयरपोर्ट से दबोचा
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सीजेआई बीआर गवई, जस्टिस के. विनोद चंद्रन और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण अब एक मौसमी समस्या नहीं रही, इसलिए इसका स्थायी समाधान जरूरी है। कोर्ट ने अब इस मामले की हर महीने सुनवाई करने का फैसला किया है।
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"बच्चों को गैस चैंबर में नहीं डाल सकते"

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सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता अपराजिता सिंह ने कोर्ट का ध्यान इस ओर खींचा कि गंभीर प्रदूषण के बीच भी कई स्कूल वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिताओं (Sports Day) की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "बच्चे सुबह-सुबह धुंध और धुएं के बीच प्रैक्टिस कर रहे हैं, यह उन्हें सीधे गैस चैंबर में धकेलने जैसा है।"
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इस दलील पर सहमति जताते हुए दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) को निर्देश दिया कि वे नवंबर और दिसंबर महीने में होने वाले सभी आउटडोर स्कूल कार्यक्रमों को रोकने या आगे बढ़ाने के लिए तुरंत गाइडलाइन जारी करें। कोर्ट ने कहा कि बच्चों का स्वास्थ्य सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। 
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बेरोजगार मजदूरों को मिलेगा भत्ता

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दिल्ली-एनसीआर में GRAP-3 (ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान) लागू होने के कारण निर्माण कार्यों (Construction) पर रोक लगा दी गई है। इससे हजारों दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। इस मुद्दे पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित मजदूरों को जीवनयापन के लिए भत्ता या आर्थिक सहायता प्रदान करें।
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कोर्ट ने सभी एनसीआर राज्यों (दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान) के मुख्य सचिवों को आदेश दिया है कि वे भत्ते को लेकर तुरंत नोटिफिकेशन जारी करें और अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करें।
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सुप्रीम कोर्ट के 4 प्रमुख निर्देश

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आज की सुनवाई में दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने चार मुख्य बिंदुओं पर जोर दिया:
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    मजदूरी भत्ता: GRAP-3 के कारण बेरोजगार हुए कंस्ट्रक्शन मजदूरों को आर्थिक मदद दी जाए।
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    स्पोर्ट्स पर रोक: स्कूलों में आउटडोर स्पोर्ट्स एक्टिविटी को टाला जाए।
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    नियमित समीक्षा: राज्य सरकारें वायु प्रदूषण कम करने के उपायों की नियमित समीक्षा करें।
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    मासिक सुनवाई: प्रदूषण का मामला अब हर महीने कोर्ट में लिस्ट किया जाएगा ताकि लगातार निगरानी हो सके।
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क्या है दिल्ली का हाल? (AQI Status)

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बुधवार सुबह दिल्ली की हवा 'गंभीर' श्रेणी में दर्ज की गई। औसत AQI 413 रहा, जबकि वजीरपुर जैसे इलाकों में यह 459 तक पहुंच गया। आनंद विहार, बवाना और रोहिणी में भी स्थिति भयावह है। हवा में पीएम 2.5 और पीएम 10 का स्तर सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा है। दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता इसी बात को लेकर है कि तमाम दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार क्यों नहीं दिख रहा है। 
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पराली और धूल पर भी हुई चर्चा

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पिछली सुनवाई (12 नवंबर) में कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा सरकार से पराली जलाने की घटनाओं पर रिपोर्ट मांगी थी। आज भी कोर्ट ने दोहराया कि GRAP-3 के नियम सख्ती से लागू होने चाहिए। वकील गोपाल शंकरनारायणन ने बताया कि बैन के बावजूद कई जगहों पर खुदाई और निर्माण कार्य चोरी-छिपे चल रहा है, जिस पर कोर्ट ने सख्त कार्रवाई की बात कही।
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दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश ऐसे समय में आया है जब अस्पतालों में सांस के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि अब सिर्फ कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस परिणाम दिखाने होंगे। 
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दिल्ली प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट के आज के आदेश ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि बच्चों की सेहत के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाएगा। स्कूलों में खेल गतिविधियों पर रोक और मजदूरों को भत्ता देने का फैसला मानवीय आधार पर लिया गया एक बड़ा कदम है। अब देखना होगा कि राज्य सरकारें और CAQM इन निर्देशों का पालन कितनी मुस्तैदी से करते हैं, क्योंकि दिल्ली की जनता साफ हवा में सांस लेने के लिए तरस रही है।
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