नई दिल्ली (ग्लोबल इकॉनमी डेस्क): 21वीं सदी को भारत की सदी कहा जाता है, और अब इस दावे पर दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित आर्थिक मंच अपनी मुहर लगाने जा रहा है। विश्व की भू-राजनीति (Geopolitics) और वैश्विक अर्थव्यवस्था के नए नियम तय करने वाला सबसे बड़ा और प्रभावशाली मंच 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम' (Bloomberg New Economy Forum) साल 2026 में पहली बार भारत की सरजमीं पर आयोजित होने जा रहा है।READ ALSO:-IIMT यूनिवर्सिटी में शोक और आक्रोश: MBA छात्रा अनु गुप्ता की मौत पर छात्रों ने निकाला कैंडल मार्च, नम आंखों से मांगी इंसाफ की भीख
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आगामी 13 से 15 अक्टूबर 2026 तक देश की राजधानी नई दिल्ली में यह महासम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इस फोरम का भारत में आना इस बात का सबसे बड़ा और पुख्ता प्रमाण है कि दुनिया की आर्थिक धुरी अब पश्चिम से खिसक कर पूर्व (विशेषकर भारत) की ओर तेजी से घूम रही है। इस आयोजन में दुनिया भर के नीति-निर्माता, पूर्व राष्ट्राध्यक्ष, केंद्रीय बैंकों के प्रमुख, तकनीकी दिग्गज और फॉर्च्यून 100 (Fortune 100) कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs) एक छत के नीचे जुटेंगे।
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क्या है इस बार की थीम और क्यों है यह खास? (Theme of 2026 Forum)
\r\n\r\nइस साल नई दिल्ली में आयोजित होने वाले फोरम की थीम “अ वर्ल्ड इन प्ले: डिफाइनिंग द न्यू लिवर्स ऑफ पॉवर” (A World in Play: Defining the New Levers of Power) रखी गई है।
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इस थीम का सीधा अर्थ है—'एक बदलती हुई दुनिया, जहां सत्ता और शक्ति के नए केंद्र स्थापित हो रहे हैं।' कोरोना महामारी (COVID-19), रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व के तनाव ने दुनिया को यह सिखा दिया है कि किसी एक देश (जैसे चीन) पर आर्थिक और सप्लाई चेन के लिए पूरी तरह निर्भर रहना कितना खतरनाक हो सकता है। ऐसे में यह फोरम इस बात पर बहस करेगा कि भविष्य की वैश्विक शक्ति (Global Power) किन नए 'लीवर्स' (जैसे- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन एनर्जी, और सुरक्षित सप्लाई चेन) के जरिए नियंत्रित होगी। भारत, इस पूरी बहस के केंद्र में एक 'सॉल्वर' (समाधानकर्ता) के रूप में उभरेगा।
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पीएम मोदी का विजन: "भारत अब सिर्फ एक बाजार नहीं, भविष्य का भागीदार है"
\r\n\r\nइस ऐतिहासिक घोषणा पर देश के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अत्यंत गर्व और दूरदृष्टि के साथ अपनी बात रखी है। पीएम मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में भारत ने जिस तरह से डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (UPI आदि), बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) में छलांग लगाई है, यह उसी का परिणाम है।
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प्रधानमंत्री मोदी ने कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"भारत आज एक अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। दुनिया अब भारत को केवल एक बड़े उपभोक्ता बाजार या 'निवेश गंतव्य' (Investment Destination) के संकुचित नजरिए से नहीं देखती। आज का भारत विश्व के भविष्य को आकार देने वाला एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय भागीदार (Trusted Partner) बन चुका है।"\r\n
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पीएम मोदी ने आगे स्पष्ट किया कि नई दिल्ली में होने वाला यह फोरम पूरी दुनिया को भारत की असीम आर्थिक ऊर्जा, जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) और वैश्विक नेतृत्व क्षमता का साक्षात अनुभव कराएगा। यह सम्मेलन दुनिया को दिखाएगा कि कैसे 140 करोड़ की आबादी वाला देश अपनी युवा शक्ति और नवाचार के दम पर 'ग्लोबल साउथ' (Global South) की आवाज बन रहा है।
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माइकल ब्लूमबर्ग का बयान: भारत के बिना वैश्विक अर्थव्यवस्था की कल्पना अधूरी
\r\n\r\n'ब्लूमबर्ग एलपी' (Bloomberg LP) और 'ब्लूमबर्ग फिलैंथ्रोपीज़' के संस्थापक, और न्यूयॉर्क शहर के पूर्व मेयर, माइकल ब्लूमबर्ग (Michael Bloomberg) ने नई दिल्ली को इस फोरम के लिए चुनने के पीछे के स्पष्ट कारण बताए हैं।
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माइकल ब्लूमबर्ग ने कहा:
\r\n\r\n\r\n\r\n\r\n"भारत आज वैश्विक नवोन्मेष (Innovation), अंतरराष्ट्रीय निवेश और दुनिया की ग्लोबल सप्लाई चेन (Global Supply Chain) का सबसे केंद्रीय स्तंभ बन चुका है। नई दिल्ली इस समय पूरी दुनिया में नए विचारों, तकनीकी प्रगति और रणनीतिक साझेदारियों (Strategic Partnerships) के लिए सबसे आदर्श स्थान है।"\r\n
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भारत में ब्लूमबर्ग के 30 साल: यह आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब ब्लूमबर्ग एलपी भारत में अपने सफल संचालन के 30 वर्ष पूरे कर रहा है। 1990 के दशक में आर्थिक उदारीकरण के बाद से ब्लूमबर्ग ने भारत की विकास यात्रा को करीब से देखा है। यह फोरम न केवल भारत की इस 30 साल की आश्चर्यजनक आर्थिक यात्रा का जश्न मनाएगा, बल्कि अगले 30 सालों के लिए भारत की वैश्विक आर्थिक भूमिका का रोडमैप भी तैयार करेगा।
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ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम 2026: दिल्ली में किन 5 बड़े मुद्दों पर होगा महा-मंथन?
\r\n\r\nजब दुनिया के 500 से अधिक सबसे ताकतवर और अमीर लोग दिल्ली में बैठेंगे, तो उनके एजेंडे में मुख्य रूप से 5 बड़े मुद्दे होंगे, जो भविष्य की अर्थव्यवस्था की दिशा तय करेंगे:
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1. आपूर्ति श्रृंखला का पुनर्निर्माण (Rebuilding Supply Chains - The China+1 Strategy)
\r\n\r\nदुनिया भर की बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब चीन पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए 'चाइना प्लस वन' (China Plus One) रणनीति अपना रही हैं। इस फोरम में सबसे बड़ी चर्चा इसी बात पर होगी कि भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब कैसे बनाया जाए। सेमीकंडक्टर निर्माण से लेकर एप्पल (Apple) के आईफोन असेंबलिंग तक, भारत पहले ही खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में साबित कर रहा है।
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2. ऊर्जा संक्रमण और ग्रीन इकॉनमी (Energy Transition & Climate Finance)
\r\n\r\nजलवायु परिवर्तन (Climate Change) आज दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती है। जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) से हटकर सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen) की तरफ बढ़ने के लिए अरबों डॉलर की 'क्लाइमेट फाइनेंसिंग' की जरूरत है। भारत के 'नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन' और रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्यों पर विदेशी निवेशकों की नजर रहेगी।
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3. तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Tech & AI)
\r\n\r\nएआई (AI) और डीप टेक (Deep Tech) के दौर में डेटा ही नई शक्ति है। इस सम्मेलन में सिलिकॉन वैली के तकनीकी दिग्गज भारत की टेक प्रतिभा और यहां के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (जैसे आधार, यूपीआई, और ओएनडीसी) की सफलता के मॉडल को वैश्विक स्तर पर लागू करने पर विचार-विमर्श करेंगे।
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4. वैश्विक पूंजी का प्रवाह (Flow of Global Capital)
\r\n\r\nदुनिया भर के संप्रभु धन कोष (Sovereign Wealth Funds) और पेंशन फंड सुरक्षित और उच्च रिटर्न वाले बाजारों की तलाश में हैं। पश्चिमी देशों में मंदी की आहट और चीन की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच, भारत 7% से अधिक की विकास दर के साथ सबसे चमकता हुआ सितारा है। यह फोरम भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की नई लहर ला सकता है।
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5. वैश्विक शक्ति संतुलन (Shifting Balance of Power)
\r\n\r\nयह केवल अर्थशास्त्र का नहीं, बल्कि कूटनीति का भी मंच है। अमेरिका और चीन के बीच चल रहे ट्रेड वॉर (Trade War) और भू-राजनैतिक तनावों के बीच, भारत गुटनिरपेक्षता और 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की नीति पर चल रहा है। दुनिया के बड़े नेता दिल्ली में इस बात पर मंथन करेंगे कि बहुध्रुवीय (Multi-polar) विश्व व्यवस्था को कैसे स्थिर रखा जाए।
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भारत के लिए इस फोरम की मेजबानी के क्या हैं मायने? (The Impact on India)
\r\n\r\nब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम जैसे स्तर के आयोजन की मेजबानी भारत के लिए महज एक इवेंट (कार्यक्रम) नहीं है, बल्कि यह एक गेम-चेंजर साबित होने वाला है। इसके कई दूरगामी लाभ होंगे:
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- \r\n FDI (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) में बंपर उछाल: जब 500 से अधिक ग्लोबल सीईओ दिल्ली की सड़कों, बुनियादी ढांचे और भारत के नीति-निर्माताओं के विजन को अपनी आंखों से देखेंगे, तो भारत के प्रति उनका विश्वास बढ़ेगा। इससे मैन्युफैक्चरिंग, रिटेल और टेक सेक्टर में विदेशी निवेश की बाढ़ आ सकती है।\r\n \r\n
- \r\n 'ब्रांड इंडिया' की मजबूती: G20 शिखर सम्मेलन (2023) की अपार सफलता के बाद, इस फोरम की मेजबानी यह साबित करती है कि 'ब्रांड इंडिया' अब 'मेगा-ग्लोबल इवेंट्स' आयोजित करने में पूरी तरह सक्षम है। इससे भारत की 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) में भी वृद्धि होगी।\r\n \r\n
- \r\n स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए मौका: इस सम्मेलन के जरिए भारतीय कॉरपोरेट्स (Tata, Reliance, Adani, Mahindra आदि) और उभरते हुए यूनिकॉर्न स्टार्टअप्स को दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों के साथ वन-टू-वन नेटवर्किंग करने और ग्लोबल पार्टनरशिप (Joint Ventures) क्रैक करने का अभूतपूर्व अवसर मिलेगा।\r\n \r\n
- \r\n रोजगार सृजन: निवेश के करार होने और विदेशी कंपनियों के भारत में अपनी फैक्ट्रियां या ऑफिसेज खोलने से देश के युवाओं के लिए लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।\r\n \r\n
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ग्लोबल साउथ की आवाज बन रहा है भारत (Voice of the Global South)
\r\n\r\nब्लूमबर्ग फोरम में भारत केवल अपनी बात नहीं रखेगा, बल्कि वह अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और एशिया के उन सभी विकासशील देशों (Global South) का प्रतिनिधित्व करेगा, जो अब तक वैश्विक आर्थिक नीतियों में हाशिए पर थे। भारत यह संदेश देगा कि विश्व बैंक और आईएमएफ (IMF) जैसी पुरानी संस्थाओं में सुधार का समय आ गया है और दुनिया की नीतियां अब कुछ चंद पश्चिमी देशों के बंद कमरों में नहीं तय की जा सकतीं।
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अक्टूबर 2026 में नई दिल्ली में आयोजित होने वाला 'ब्लूमबर्ग न्यू इकॉनमी फोरम' इस बात का ऐतिहासिक दस्तावेज बनेगा कि भारत अब सिर्फ दुनिया का 'बैक-ऑफिस' (Back-office) या 'बाजार' नहीं रह गया है, बल्कि वह विश्व अर्थव्यवस्था का 'फ्रंट-ऑफिस' और 'संचालक' बन चुका है।
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'विकसित भारत @2047' (Viksit Bharat 2047) के विजन को साकार करने की दिशा में यह सम्मेलन मील का पत्थर साबित होगा। जब माइकल ब्लूमबर्ग और दुनिया भर के सीईओ दिल्ली से वापस लौटेंगे, तो उनके पास सिर्फ निवेश के आंकड़े नहीं होंगे, बल्कि 'न्यू इंडिया' (New India) का एक ऐसा नया नैरेटिव होगा जो पूरी दुनिया में गूंजेगा कि— "अगला दशक और सदी, दोनों भारत के हैं।"
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