उत्तर प्रदेश के बिजनौर जनपद में आम जनता की समस्याओं को त्वरित गति से सुलझाने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। शनिवार को जिले की नजीबाबाद तहसील स्थित कवि दुष्यंत कुमार सभागार में संपूर्ण समाधान दिवस का वृहद आयोजन किया गया। इस Bijnor Samadhan Diwas कार्यक्रम की अध्यक्षता खुद जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने की। जनसुनवाई के दौरान डीएम ने सभी विभागीय अधिकारियों को कड़े शब्दों में स्पष्ट संदेश दिया कि जनता की शिकायतों के निपटारे में किसी भी स्तर पर कोई हीलाहवाली या लापरवाही बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन का मुख्य लक्ष्य हर फरियादी को त्वरित न्याय दिलाना और उन्हें बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की परेशानी से बचाना है।
खबरीलाल के बिजनौर संवाददाता शकील अहमद की ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, तहसील दिवस में सुबह से ही दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से बड़ी संख्या में फरियादी अपनी अलग-अलग समस्याएं लेकर पहुंचे थे। इस दौरान मुख्य रूप से राजस्व विभाग, पुलिस प्रशासन, बिजली विभाग, जल निगम और पंचायती राज विभाग से जुड़ी कुल 36 शिकायतें जिलाधिकारी के पटल पर प्रस्तुत की गईं। डीएम उमेश प्रताप सिंह ने मामलों की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और संबंधित अधिकारियों को तुरंत अपने पास तलब किया। आपसी समन्वय और प्रशासनिक तत्परता के परिणामस्वरूप 36 में से 10 शिकायतों का मौके पर ही (ऑन-द-स्पॉट) निस्तारण कर दिया गया। एक ही दिन में तत्काल न्याय मिलने से कई फरियादियों ने गहरी राहत की सांस ली और प्रशासन की तारीफ की।
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लंबित मामलों के लिए तय की गई समय सीमा मौके पर निस्तारित मामलों के बाद, शेष बची 26 शिकायतों को लेकर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने तहसील में मौजूद सभी संबंधित विभागों के जिला और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि वे इन लंबित मामलों का निपटारा एक सख्त और निर्धारित समय सीमा के भीतर करना सुनिश्चित करें। उन्होंने साफ तौर पर निर्देश दिए कि शिकायतों का निस्तारण केवल खानापूर्ति या रजिस्टर में दर्ज करने के लिए नहीं होना चाहिए, बल्कि इसमें पूरी गुणवत्ता, जवाबदेही और पारदर्शिता झलकनी चाहिए। अधिकारी यह पक्का करें कि एक बार शिकायत का निवारण होने के बाद किसी भी ग्रामीण या नागरिक को उसी पुरानी समस्या के लिए दोबारा सरकारी चौखट पर न आना पड़े।

स्थलीय जांच के लिए कार्यालय छोड़ने के निर्देश ग्रामीण क्षेत्रों में अक्सर भूमि विवाद, चकरोड पर अवैध कब्जा, अतिक्रमण और पुलिस से जुड़े जमीनी मामले ज्यादा आते हैं। इन विशेष मामलों को लेकर जिलाधिकारी ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़े निर्देश जारी किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन विवादित मामलों में स्थलीय जांच (Physical Verification) की सख्त आवश्यकता है, वहां कोई भी लेखपाल, कानूनगो या अधिकारी केवल अपने वातानुकूलित कार्यालय में बैठकर मनगढ़ंत रिपोर्ट तैयार न करे। सभी जिम्मेदार अधिकारियों को स्वयं विवादित स्थल (Ground Zero) पर अनिवार्य रूप से पहुंचना होगा। वहां जाकर दोनों पक्षों की बातें सुननी होंगी, साक्ष्यों को परखना होगा और पूरी निष्पक्षता के साथ तथ्यात्मक (Factual) रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। जमीनी हकीकत को समझे बिना किया गया कागजी समाधान किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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फरियादी की संतुष्टि ही समाधान का असली पैमानाBijnor Samadhan Diwas के अवसर पर डीएम उमेश प्रताप सिंह ने मौजूद अधिकारियों को सुशासन और उत्तर प्रदेश सरकार की मंशा का असल मतलब समझाया। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिकायतों का समाधान केवल सरकारी फाइलों के पन्नों तक ही सीमित रहकर दम न तोड़े। जब तक उस समाधान से पीड़ित शिकायतकर्ता की पूरी तरह से संतुष्टि नहीं हो जाती, तब तक प्रशासनिक नजरिए से समस्या का निस्तारण अधूरा ही माना जाएगा। जनसुनवाई कार्यक्रम में उच्चाधिकारी की इस अभूतपूर्व सख्ती से तहसील परिसर में मौजूद निचले स्तर के अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल देखने को मिला।
नजीबाबाद में आयोजित इस संपूर्ण समाधान दिवस में उप जिलाधिकारी (SDM), तहसीलदार, पुलिस क्षेत्राधिकारी (CO), और खंड विकास अधिकारी (BDO) सहित जिले के सभी प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारी पूरी मुस्तैदी के साथ मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में चेतावनी दी कि यदि शासन के इन कड़े निर्देशों की किसी ने भी अनदेखी की, तो भविष्य में उस लापरवाह अधिकारी की सीधे जिम्मेदारी तय की जाएगी और उसके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक एवं विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। प्रशासनिक स्तर पर जनसुनवाई के ऐसे पारदर्शी और प्रभावी आयोजनों से आम लोगों का सरकार और सिस्टम के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होता दिखाई दे रहा है।
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