इस वर्ष रोशनी का महापर्व दीपावली 8 नवंबर 2026, दिन रविवार को पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कार्तिक अमावस्या की तिथि 8 नवंबर को सुबह 11:27 बजे से शुरू होकर 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे तक रहेगी। दिवाली पर माता लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर जी की पूजा का विशेष विधान है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से की गई पूजा से घर में सुख, समृद्धि, धन और शांति का वास होता है।
इस बार गृहस्थों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों के लिए अपनी सुविधानुसार घर, दुकान या ऑफिस में पूजा करने के लिए दिन से लेकर आधी रात तक शुभ मुहूर्त (चौघड़िया, प्रदोष काल और स्थिर लग्न) उपलब्ध हैं। दिवाली के पावन अवसर पर पूरे परिवार का एक साथ मिलकर श्रद्धाभाव और उत्साह से पूजन करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है। 'खबरीलाल' आपको लक्ष्मी पूजा की वह सही और संक्षिप्त विधि बता रहा है, जिससे आप मात्र 10 मिनट में संपूर्ण लक्ष्मी-गणेश पूजन कर सकते हैं।
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व्यापारी अक्सर दिन के समय अपनी दुकानों और कार्यालयों में पूजा करना पसंद करते हैं, जबकि घरों में मुख्य पूजा सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल और वृषभ लग्न (स्थिर लग्न) में की जाती है। नई दिल्ली के समयानुसार 8 नवंबर 2026 को पूजा के विभिन्न मुहूर्त इस प्रकार हैं:
पूजन का समय और प्रकार Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join › | शुभ मुहूर्त (8 नवंबर 2026) | विशेष उपयोग |
|---|---|---|
अमृत चौघड़िया (दिन) | सुबह 11:27 से दोपहर 12:05 तक | ऑफिस और फैक्ट्रियों में शुरुआती पूजा के लिए |
शुभ चौघड़िया (दोपहर) | दोपहर 01:27 से दोपहर 02:48 तक | ऑफिस, दुकान और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों के लिए सर्वोत्तम |
प्रदोष काल (शाम) | शाम 05:31 से रात 08:09 तक | घरों में सामान्य रूप से पूजा आरंभ करने का समय |
वृषभ लग्न / स्थिर लग्न (मुख्य मुहूर्त) | शाम 05:54 से रात 07:50 तक | घर-परिवार के साथ मुख्य लक्ष्मी-गणेश पूजन का सर्वश्रेष्ठ समय |
शुभ चौघड़िया (शाम) | शाम 05:31 से शाम 07:10 तक | घरों और देर तक खुली रहने वाली दुकानों के लिए |
अमृत चौघड़िया (रात) | शाम 07:10 से रात 08:48 तक | देर शाम की पूजा के लिए उपयुक्त |
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| रात 11:38 से मध्यरात्रि 12:31 (9 नवंबर) | तांत्रिक पूजा और मां काली की विशेष साधना के लिए |
पूजन सामग्री की पूरी लिस्ट
पूजा आरंभ करने से पहले सभी आवश्यक सामग्री एक जगह एकत्रित कर लें ताकि पूजा के दौरान उठना न पड़े:
लाल या पीला साफ कपड़ा (चौकी पर बिछाने के लिए), एक लकड़ी की चौकी
लक्ष्मी-गणेश जी और माता सरस्वती की मूर्ति या तस्वीर
कलश, नारियल, आम या अशोक के पत्ते
रोली, कुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षत (साबुत चावल)
ताजे फूल (विशेषकर कमल और गेंदे के फूल), दूर्वा (दूब घास)
पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद और शक्कर का मिश्रण), गंगाजल और शुद्ध जल
इत्र, जनेऊ, कलावा (मौली)
धूप, दीप (घी और तेल के दीपक), कपूर, रुई की बत्ती
नैवेद्य (भोग): खील, बताशे, मिठाइयां (लड्डू/मोदक), पान, सुपारी, लौंग, इलायची, और फल
दक्षिणा (सिक्के या रुपये), तिजोरी या बहीखाता (दुकान/ऑफिस के लिए)
10 मिनट में करें संपूर्ण लक्ष्मी-गणेश पूजन (सरल विधि)
अगर आपके पास समय का अभाव है या आप किसी पंडित के बिना स्वयं पूजा कर रहे हैं, तो इस क्रमानुसार 10 मिनट में विधि-विधान से पूजा संपन्न कर सकते हैं:
पवित्रीकरण और संकल्प: सबसे पहले स्नान कर साफ और नए वस्त्र (विशेषकर लाल या पीले) धारण करें। पूजा स्थान पर आसन बिछाकर बैठें। अपने ऊपर और पूजा सामग्री पर 'ॐ अपवित्रः पवित्रो वा...' मंत्र का जाप करते हुए गंगाजल छिड़कें। इसके बाद दाएं हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र और स्थान बोलकर पूजा का संकल्प लें और जल को जमीन पर छोड़ दें।
कलश स्थापना: चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा स्थापित करें। दाईं ओर एक कलश में जल भरकर रखें, उस पर आम के पत्ते और एक नारियल रखें। कलश पर रोली से स्वास्तिक बनाएं।
भगवान गणेश का आह्वान और पूजन: किसी भी पूजा में सबसे पहले प्रथम पूज्य भगवान गणेश का ध्यान किया जाता है। 'ॐ गं गणपतये नमः' का 11 बार जाप करते हुए उन्हें रोली, अक्षत, दूर्वा, फूल और लड्डू का भोग अर्पित करें।
माता लक्ष्मी का आह्वान और स्नान: माता लक्ष्मी का ध्यान करें और 'ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः' मंत्र का जाप करें। इसके बाद मूर्ति को (या यदि तस्वीर है तो प्रतीकात्मक रूप से) पहले शुद्ध जल से, फिर पंचामृत से, और अंत में गंध व इत्र मिले जल से स्नान कराएं।
पंचोपचार और अष्टलक्ष्मी पूजन: माता लक्ष्मी को वस्त्र (कलावा या चुनरी), चंदन, कुमकुम और कमल का फूल अर्पित करें। अष्टलक्ष्मी (धन, धान्य, धैर्य, शौर्य, विद्या, विजय, संतान और गजलक्ष्मी) का स्मरण करते हुए उन्हें प्रणाम करें। माता को धूप दिखाएं और घी का दीपक प्रज्वलित करें।
नैवेद्य (भोग) अर्पण: माता लक्ष्मी और गणेश जी को खील, बताशे, फल और घर में बनी मिठाइयों का नैवेद्य चढ़ाएं। साथ ही पान, सुपारी और दक्षिणा अर्पित करें।
बहीखाता और कुबेर पूजन (दुकान/ऑफिस के लिए): यदि आप ऑफिस या दुकान में पूजा कर रहे हैं, तो अपने नए अकाउंट बुक्स (बहीखातों), लैपटॉप या तिजोरी पर कुमकुम से 'शुभ' और 'लाभ' लिखें। एक चांदी का सिक्का रखें और धन के देवता कुबेर ('ॐ कुबेराय नमः') तथा ज्ञान की देवी सरस्वती ('ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः') का पूजन करें।
आरती और पुष्पांजलि: पूजा के अंत में पूरे परिवार या स्टाफ के साथ मिलकर खड़े हो जाएं। थाली में कपूर या घी का दीपक जलाकर भगवान गणेश और फिर माता लक्ष्मी की आरती (ॐ जय लक्ष्मी माता) गाएं। अंत में हाथ में फूल लेकर पुष्पांजलि अर्पित करें और पूजा के दौरान हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
पूजा संपन्न होने के बाद पूरे घर, प्रतिष्ठान और मुख्य द्वार पर दीपक जलाएं। ध्यान रहे कि पूजा स्थल पर एक अखंड दीपक (या बड़ा दीया) रात भर जलता रहे।
डिस्क्लेमर (Disclaimer): इस लेख में दी गई शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और मान्यताओं की जानकारी पारंपरिक पंचांग और वैदिक मान्यताओं पर आधारित है। 'खबरीलाल' इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना मानता है। स्थान (शहर) के अनुसार मुहूर्त के समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है, इसलिए सटीक समय के लिए अपने स्थानीय पंचांग या योग्य ज्योतिषी से भी संपर्क किया जा सकता है।
Sabse pehle comment karne wale banein.