SDM Sushil Mishra Controversy: उत्तर प्रदेश के बरेली (Bareilly) जिले की आंवला तहसील (Aonla Tehsil) से एक बेहद चौंकाने वाला और शर्मनाक मामला सामने आया है। यहां राष्ट्रीय जनगणना (National Census) के प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान एक बड़े प्रशासनिक अधिकारी की बदजुबानी के चलते शिक्षकों और प्रशासन के बीच भारी विवाद खड़ा हो गया है।

आरोप है कि आंवला के एसडीएम (SDM) सुशील मिश्रा ने दोपहर के वक्त भोजन (Food Packets) के लिए लाइन में लगे शिक्षकों को देखकर अपना आपा खो दिया और उनके लिए “भूखे-नंगे कुत्ते” जैसे बेहद अपमानजनक और अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया।

जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶

​एसडीएम की इस अभद्र भाषा से भड़के सैकड़ों शिक्षकों ने मौके पर ही हंगामा खड़ा कर दिया और तुरंत जनगणना की ट्रेनिंग रोक दी। देर रात बड़ी संख्या में शिक्षक बरेली शहर के दामोदर स्वरूप पार्क में अनिश्चितकालीन धरने (Protest) पर बैठ गए हैं और उन्होंने जिलेभर में जनगणना कार्य के बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

​क्या है पूरा विवाद? (How the Controversy Started)

जानकारी के अनुसार, आंवला तहसील क्षेत्र में स्थित सरस्वती शिशु मंदिर में जनगणना कार्य के लिए प्रगणक (Enumerators) बनाए गए प्राथमिक व उच्च प्राथमिक शिक्षकों का महत्वपूर्ण प्रशिक्षण (Training) चल रहा था।

गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे जब ट्रेनिंग के बीच भोजनावकाश हुआ, तो सभी शिक्षक तय व्यवस्था के अनुसार भोजन के पैकेट लेने के लिए लाइन में खड़े हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, ठीक उसी समय SDM आंवला सुशील मिश्रा वहां पहुंचे।

​कतार में खड़े शिक्षकों को देखकर एसडीएम भड़क गए और अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए जोर से कहा:

​"ये भूखे-नंगे कुत्ते कहां-कहां से आ जाते हैं…"

​शिक्षकों ने कहा- "हम मुफ्त का खाना खाने नहीं आए हैं"

इस सरेआम अपमान को सुनकर वहां मौजूद शिक्षक आक्रोशित हो गए। शिक्षकों ने एसडीएम को तुरंत करारा जवाब देते हुए कहा कि वे यहां कोई मुफ्त का खाना खाने नहीं आए हैं, बल्कि प्रशासन के बुलावे पर अपना 'राष्ट्रीय कर्तव्य' (जनगणना की ड्यूटी) निभाने पहुंचे हैं।

इसके बाद शिक्षकों ने मौके पर ही प्रशिक्षण का बहिष्कार कर दिया और एसडीएम सुशील मिश्रा के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।

​शिक्षक संघ ने की निलंबन की मांग (Teachers Demand Suspension)

इस घटना के बाद प्राथमिक शिक्षक संघ (Prathmik Shikshak Sangh) पूरी तरह से लामबंद हो गया है। संघ के जिलाध्यक्ष नरेश गंगवार ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि 'शिक्षक समाज का निर्माता और मार्गदर्शक होता है। किसी जिम्मेदार प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारी द्वारा शिक्षकों को कुत्ता और भूखा-नंगा कहना, पूरे शिक्षक समुदाय और शिक्षा जगत का घोर अपमान है, जिसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।'

​शिक्षक संघ ने तुरंत जिलाधिकारी (DM Bareilly) को एक ज्ञापन सौंपा है। इस ज्ञापन में एसडीएम आंवला सुशील मिश्रा के खिलाफ तत्काल प्रभाव से निलंबन (Suspension) और कठोर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

​रात भर धरने पर डटे रहे शिक्षक, जनगणना कार्य ठप

आंवला से निकलकर जिलेभर के सैकड़ों शिक्षक रात में ही बरेली के दामोदर स्वरूप पार्क पहुंच गए और धरने पर बैठ गए। शिक्षक नेताओं ने प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए साफ कहा है कि जब तक एसडीएम सुशील मिश्रा सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते और प्रशासन उन पर कोई ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं करता, तब तक कोई भी शिक्षक जनगणना ड्यूटी में शामिल नहीं होगा।

​SDM सुशील मिश्रा ने नहीं दिया कोई जवाब

इस पूरे विवाद और गंभीर आरोपों पर एसडीएम आंवला सुशील मिश्रा का पक्ष जानने के लिए जब स्थानीय मीडिया ने उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। फिलहाल, इस विवाद के चलते बरेली में राष्ट्रीय जनगणना का काम पूरी तरह से ठप होने की कगार पर पहुंच गया है। अब सभी की नजरें बरेली के डीएम और शासन के अगले कदम पर टिकी हैं।

​डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह समाचार मौके पर मौजूद शिक्षकों के बयानों, प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा दिए गए ज्ञापन और स्थानीय संवाददाताओं की रिपोर्ट पर आधारित है।

विज्ञापन
विज्ञापन
पढ़िए फटाफट खबरेंस्वाइप करके पढ़ें