Ranjha Vikram Singh Comeback: मुंबई (अनिल बेदाग)। सिनेमा हमेशा से ही समाज और हमारी संस्कृति का आईना रहा है। जब सिनेमा के रुपहले पर्दे पर आस्था, ऐतिहासिकता और गहरी मानवीय भावनाओं का अद्भुत संगम होता है, तो एक ऐसी कहानी जन्म लेती है, जो सीधे दर्शकों की आत्मा और उनके दिलों को छू जाती है। भारतीय सिनेमा में इन दिनों अपनी जड़ों की ओर लौटने और पौराणिक कथाओं (Mythological Movies) को भव्य रूप में पेश करने का एक नया दौर शुरू हुआ है।
इसी कड़ी में एक बहुत ही भव्य और आध्यात्मिक अनुभव लेकर आ रही है आगामी भक्ति फिल्म 'मंगलमय सालासर' (Mangalmay Salasar)। दर्शकों के लिए यह एक बड़ी खुशखबरी है कि लंबे अंतराल के बाद मशहूर बॉलीवुड और साउथ फिल्मों के अभिनेता तथा फिल्म निर्माता रांझा विक्रम सिंह (Ranjha Vikram Singh) इस बहुप्रतीक्षित फिल्म के साथ निर्माण (Film Production) के क्षेत्र में अपनी दमदार वापसी करने जा रहे हैं।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶आर्यन सक्सेना और रांझा विक्रम सिंह का अनूठा संगम
सिनेमाई दुनिया में एक बेहतरीन फिल्म तभी बनती है जब निर्माता और निर्देशक की सोच एक समान हो। 'मंगलमय सालासर' में भी रांझा विक्रम सिंह और बहुमुखी प्रतिभा के धनी आर्यन सक्सेना (Aryan Saxena) का एक अनूठा सिनेमाई संगम देखने को मिलेगा।
इस भव्य ऐतिहासिक और आध्यात्मिक फिल्म की कहानी, शानदार पटकथा (लेखन) और निर्देशन की पूरी कमान आर्यन सक्सेना खुद संभाल रहे हैं। आर्यन का उद्देश्य इस फिल्म के माध्यम से दर्शकों को एक ऐसी दुनिया में ले जाना है, जहां शुद्ध भक्ति और ईश्वरीय चमत्कार का सीधा अनुभव किया जा सके।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›18वीं सदी के राजस्थान की भव्य पृष्ठभूमि
फिल्म 'मंगलमय सालासर' की कहानी कोई साधारण फिक्शन नहीं है, बल्कि यह 18वीं सदी के राजस्थान (18th Century Rajasthan) की प्रामाणिक ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर आधारित है।
यह फिल्म मुख्य रूप से सालासर बालाजी धाम (Salasar Balaji Temple) के संस्थापक और परम संत बाबा मोहन दास जी (Baba Mohan Das Ji) की अटूट श्रद्धा, उनके कठोर तप, त्याग और भगवान हनुमान (Lord Hanuman) के प्रति उनकी अनन्य भक्ति को बड़े पर्दे पर पूरी भव्यता के साथ जीवंत करेगी।
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बाबा मोहन दास जी का जीवन हर उस व्यक्ति के लिए एक बड़ी प्रेरणा है, जो भक्ति मार्ग पर चलना चाहता है। राजस्थान के चुरू जिले में स्थित सालासर बालाजी मंदिर आज देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इस फिल्म के जरिए दर्शक जान पाएंगे कि कैसे बाबा मोहन दास जी की निस्वार्थ भक्ति से प्रसन्न होकर स्वयं बजरंगबली ने उन्हें दर्शन दिए थे और उस पवित्र धाम की स्थापना हुई थी।
रांझा विक्रम सिंह के लिए उद्देश्यपूर्ण सिनेमा की शुरुआत
'हीरोपंती' जैसी शानदार फिल्मों में अपने दमदार अभिनय का लोहा मनवा चुके रांझा विक्रम सिंह के लिए 'मंगलमय सालासर' महज एक व्यावसायिक फिल्म का प्रोजेक्ट नहीं है। इसे वे अपने करियर की एक नई दिशा और उद्देश्यपूर्ण सिनेमा (Meaningful Cinema) से जुड़ने की एक पवित्र पहल मानते हैं।
उनका मानना है कि आज की युवा पीढ़ी को अपने इतिहास, संत परंपरा और सनातन संस्कृति (Sanatan Culture) से परिचित कराना बेहद आवश्यक है। 'मंगलमय सालासर' के जरिए वे दर्शकों को वही पारलौकिक अनुभव देना चाहते हैं, जिसे देखकर लोगों के मन में शांति और श्रद्धा का भाव उत्पन्न हो।
सिनेमाई भव्यता और गहरी भावनाएं (Cinematic Grandeur)
निर्देशक आर्यन सक्सेना इस ऐतिहासिक परिवेश को पर्दे पर उतारने के लिए काफी गहराई से रिसर्च और तकनीकी काम कर रहे हैं।
- भावनात्मक गहराई: फिल्म में बाबा मोहन दास जी के संघर्ष और उनकी साधना की भावनात्मक गहराई को बहुत ही बारीकी से दिखाया जाएगा।
- भव्य प्रस्तुति: 18वीं सदी के राजस्थान के परिधानों, महलों, रेगिस्तानी इलाकों और उस दौर के सामाजिक परिवेश को रीक्रिएट करने के लिए बड़े पैमाने पर वीएफएक्स (VFX) और विशाल सेट का निर्माण किया जाएगा।
यह फिल्म एक स्पष्ट संदेश लेकर आ रही है कि सच्ची भक्ति और श्रद्धा की ताकत से असंभव को भी संभव किया जा सकता है। फिल्म 'मंगलमय सालासर' का निर्माण कार्य जल्द ही बड़े पैमाने पर शुरू होने जा रहा है और दर्शकों को इस आध्यात्मिक सिनेमाई सफर का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
यह समाचार फिल्म 'मंगलमय सालासर' की आधिकारिक घोषणा और फिल्म निर्माताओं (पीआर टीम) द्वारा साझा की गई जानकारी पर आधारित है।
Sabse pehle comment karne wale banein.