उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) और आसपास के दिल्ली-एनसीआर क्षेत्रों के मौसम में लगातार हो रहे बदलाव और खतरनाक स्तर तक बढ़ते वायु प्रदूषण ने लोगों की सेहत पर भारी असर डालना शुरू कर दिया है। सर्दी की हल्की शुरुआत के साथ ही अस्पतालों और क्लीनिकों में खांसी, गले में खराश, नाक की एलर्जी (Allergy), और आंखों में तेज जलन के मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल आया है। Meerut Air Pollution Health Risk के चलते विशेष रूप से दमा (Asthma) और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) के मरीजों की परेशानियां कई गुना बढ़ गई हैं।

क्यों बढ़ रहा है सर्दी में प्रदूषण और स्मॉग का खतरा? चिकित्सकों और पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दी शुरू होने के साथ ही वातावरण का तापमान गिर जाता है और हवा भारी हो जाती है। वायुमंडलीय परिस्थितियों में इस बदलाव (Temperature Inversion) के कारण प्रदूषक तत्व (Pollutants) ऊपर उठने के बजाय वातावरण के निचले हिस्से में ही जमा होने लगते हैं। इन प्रदूषक तत्वों में जहरीली गैसों के साथ-साथ अत्यंत महीन पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5 और PM 10) भारी मात्रा में शामिल होते हैं। सुबह और शाम के समय इन कणों का घनत्व सबसे अधिक होता है। यही प्रदूषक तत्व स्मॉग (Smog - Smoke + Fog) का रूप ले लेते हैं और सांस के जरिए सीधे हमारे फेफड़ों (Lungs) की गहराई तक पहुंचकर श्वसन तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं।

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डॉक्टरों ने दी चेतावनी: इनहेलर का प्रयोग न रोकें शहर के वरिष्ठ श्वास रोग विशेषज्ञ ने बताया कि मौसम बदलने और प्रदूषण बढ़ने के कारण अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सीओपीडी के मरीजों की हालत बिगड़ने का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। डॉ. ने दमा और सीओपीडी के मरीजों को विशेष सावधानी बरतने की सख्त सलाह दी है। उन्होंने कहा कि ऐसे मरीजों को अपना 'प्रिवेंटिव इनहेलर' (Preventive Inhaler) और दवाइयां नियमित रूप से लेते रहना चाहिए। मरीज भूलकर भी अपनी मर्जी से या खुद को स्वस्थ मानकर इनहेलर का इस्तेमाल बंद न करें।

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सुबह-शाम टहलने से बचें, घर में ही करें व्यायाम प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए डॉक्टरों ने स्वस्थ व्यक्तियों और बुजुर्गों के लिए भी खास 'हेल्थ एडवाइजरी' (Health Advisory) जारी की है:

  • सुबह जल्दी और शाम ढलने के बाद वातावरण में प्रदूषक तत्व सबसे ज्यादा होते हैं, इसलिए इस समय बाहर टहलने (Morning/Evening Walk) या खुली हवा में भारी व्यायाम करने से पूरी तरह बचें।

  • धूप पूरी तरह निकलने और हवा साफ होने के बाद ही बाहर निकलें। बेहतर होगा कि लोग घर के अंदर ही योगासन, स्ट्रेचिंग और प्राणायाम करें।

  • ठंड और प्रदूषण के प्रभाव को कम करने के लिए शरीर को हाइड्रेटेड रखें और गर्म पेय पदार्थों (गुनगुना पानी, काढ़ा, ग्रीन टी) का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें।

दिवाली पर पटाखों का धुआं बना सकता है स्थिति गंभीर आगामी दीपावली (Diwali) पर्व को लेकर भी डॉक्टरों ने चिंता जाहिर की है। दिवाली के दौरान जलाए जाने वाले पटाखों से निकलने वाला गाढ़ा और जहरीला धुआं (Firecracker Pollution) सांस की इन समस्याओं को अत्यधिक गंभीर और जानलेवा स्थिति तक पहुंचा सकता है। विशेषज्ञों ने अपील की है कि सांस के मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और छोटे बच्चों को प्रदूषण वाले वातावरण और धुएं से बिल्कुल दूर रखा जाना चाहिए। यदि किसी भी व्यक्ति को सांस लेने में भारी तकलीफ, लगातार उठती खांसी, छाती में जकड़न या कोई अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहने के बजाय तत्काल किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से परामर्श लें और इलाज में बिल्कुल भी देरी न करें।

(डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई स्वास्थ्य संबंधी जानकारी, सुझाव और चेतावनियां सामान्य चिकित्सकीय सलाह और विशेषज्ञों की राय पर आधारित हैं। Khabreelal.com इसका उद्देश्य केवल आप तक स्वास्थ्य जागरूकता पहुंचाना मानता है। किसी भी प्रकार की स्वास्थ्य समस्या, एलर्जी, दमा या आपातकालीन स्थिति होने पर कृपया घरेलू उपचार या लेख के सुझावों पर निर्भर न रहें और तुरंत अपने प्रमाणित श्वास रोग विशेषज्ञ या पारिवारिक डॉक्टर से संपर्क कर उचित चिकित्सा लें।)

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