उत्तर प्रदेश के मेरठ (Meerut) जनपद में दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ एक बहुत बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई को अंजाम दिया है। मेरठ के परतापुर थाना क्षेत्र में प्रशासन की टीम ने एक मकान के नीचे बने गुप्त सुरंगनुमा तहखाने (Underground Bunker) में संचालित हो रही नकली चांदी के वर्क (Silver Foil/Varkh) की अवैध फैक्टरी का पर्दाफाश किया है। Meerut Fake Silver Foil Factory Busted की इस कार्रवाई से मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। टीम ने मौके से भारी मात्रा में तैयार नकली वर्क, कच्चा माल और 6-7 आधुनिक मशीनें बरामद की हैं।

ऊपर से सामान्य मकान, अंदर मिला गुप्त दरवाजा खाद्य सुरक्षा विभाग को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि परतापुर क्षेत्र में त्योहार के मद्देनजर बड़े पैमाने पर एल्यूमिनियम फॉयल का इस्तेमाल करके नकली चांदी का वर्क तैयार किया जा रहा है और उसे शहर की विभिन्न मिठाई की दुकानों पर सप्लाई किया जा रहा है। सूचना के आधार पर गुरुवार शाम पुलिस फोर्स के साथ संयुक्त टीम ने जब संबंधित मकान पर छापा मारा, तो पहली नजर में वह एक सामान्य आवासीय मकान दिखाई दिया। बाहर से केवल दो कमरे नजर आ रहे थे और फैक्टरी चलने का कोई आभास नहीं था। हालांकि, टीम ने जब मकान के चप्पे-चप्पे की बारीकी से तलाशी ली, तो एक दीवार के पीछे छिपा हुआ गुप्त दरवाजा मिला।

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सुरंगनुमा सीढ़ियों से नीचे तहखाने तक पहुंची टीम मौके पर मौजूद गुलिस्तां नाम की महिला की मौजूदगी में जब उस गुप्त दरवाजे को खुलवाया गया, तो उसके पीछे नीचे उतरने के लिए संकरी और सुरंगनुमा सीढ़ियां बनी हुई थीं। ये सीढ़ियां सीधे एक बड़े और गुप्त तहखाने (Basement) तक जाती थीं। इस तहखाने के भीतर एक पूरी अवैध फैक्टरी चलाई जा रही थी, जिसकी भनक आसपास के लोगों को भी नहीं थी।

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6-7 मशीनों से एल्यूमिनियम फॉयल से बन रहा था नकली वर्क तहखाने के अंदर का नजारा देखकर अधिकारी भी हैरान रह गए। वहां फैक्टरी में 6 से 7 बड़ी मशीनें लगाई गई थीं। इन मशीनों के जरिए एल्यूमिनियम फॉयल को लगातार पीटकर और घिसकर बेहद पतली परतें तैयार की जा रही थीं। इसी खतरनाक एल्यूमिनियम परत को असली चांदी के वर्क के विकल्प के रूप में मिठाइयों पर सजावट के लिए इस्तेमाल किया जाना था। तलाशी के दौरान टीम ने भारी मात्रा में तैयार नकली वर्क, रोल्स और अन्य कच्चा माल अपने कब्जे में ले लिया।

लिवर, किडनी और आंतों पर पड़ सकता है घातक असर मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी (Chief Food Safety Officer) रवि शर्मा ने मामले की गंभीरता को समझाते हुए बताया कि एल्यूमिनियम फॉयल का उपयोग सामान्य खाद्य पदार्थों की पैकिंग के लिए किया जाता है, लेकिन इसे चांदी के वर्क के रूप में सीधे खाद्यान्न या मिठाइयों पर खाना मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे नकली एल्यूमिनियम वर्क के सेवन से मनुष्य के लीवर, किडनी और आंतों पर गंभीर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और व्यक्ति गंभीर बीमारियों की चपेट में आ सकता है।

12 नमूने जांच के लिए भेजे गए, मुख्य आरोपी फरार खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने मौके से तैयार नकली वर्क, फॉयल और कच्चे माल के कुल 12 नमूने (Samples) एकत्र किए हैं। इन सभी नमूनों को मुहरबंद कर परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है, ताकि रिपोर्ट आने के बाद कानूनी कार्रवाई को मजबूत किया जा सके। छापामार कार्रवाई के दौरान मौके पर गुलिस्तां नामक महिला तो मिल गई, लेकिन फैक्टरी का संचालन करने वाले अन्य मुख्य आरोपी मौके से फरार होने में कामयाब रहे। अब पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीमें यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस तहखाने में तैयार किया गया नकली चांदी का वर्क अब तक मेरठ और आसपास के किन-किन मिठाई कारोबारियों और दुकानों तक सप्लाई किया जा चुका है।

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