उत्तर प्रदेश के जनपद बागपत (Baghpat) के दोघट कस्बे ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल कर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश का नाम रोशन किया है। बागपत जिले के दोघट क्षेत्र की मात्र 22 महीने की शुद्ध मुर्रा नस्ल की कटड़ी 'वृंदा' (Vrinda) ने मेरठ में आयोजित राष्ट्रीय पशु मेले में अपनी प्राकृतिक सुंदरता और उत्कृष्ट नस्लीय विशेषताओं के दम पर पूरे भारत में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। इस ऐतिहासिक जीत के बाद से वृंदा के मालिक और पूरे दोघट क्षेत्र में खुशी व गर्व का माहौल है। यह जीत इस बात का प्रमाण है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पशुपालक नस्ल सुधार और पशु संवर्धन में राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट कार्य कर रहे हैं।
मेरठ के सरदार पटेल विश्वविद्यालय में दिखा वृंदा का जलवा प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 3 नवंबर 2026 को मेरठ स्थित सरदार पटेल विश्वविद्यालय (Sardar Patel University Meerut) में प्रतिष्ठित 'सरदार वल्लभभाई पटेल एवं कृषि अनुसंधान पशु मेला प्रतियोगिता' का भव्य आयोजन किया गया था। इस राष्ट्रीय स्तर के पशु मेले में देश भर के कई राज्यों से बेहतरीन और उत्कृष्ट नस्ल के पशुओं ने अपनी-अपनी विशेषताओं के साथ प्रतिभाग किया था। इस महाकुंभ में बागपत के दोघट निवासी पशुपालक प्रमोद सिंह खोड अपनी 22 माह की मुर्रा कटड़ी 'वृंदा' को लेकर पहुंचे थे। प्रतियोगिता के दौरान निर्णायक मंडल ने जब पशुओं की सुंदरता और उनके शारीरिक मापदंडों को परखा, तो वृंदा की अद्वितीय बनावट और शुद्ध नस्लीय लक्षणों ने सभी का मन मोह लिया। सुंदरता एवं उत्कृष्ट मुर्रा नस्ल की श्रेणी में 'वृंदा' ने ऑल इंडिया स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर अपनी निर्विवाद श्रेष्ठता साबित की और चैंपियन का खिताब अपने नाम किया।
जंतर–मंतर गेम खेलें। पुलिस बनकर कॉकरोचों को पहचानो या आंदोलनकारी बनकर पहुंचो जंतर मंतर। खेलें ▶
अर्जुन कुंगड़ बुल की ब्लड लाइन और शानदार मातृवंशावली पशुपालन के क्षेत्र में किसी भी पशु की श्रेष्ठता उसकी वंशावली पर निर्भर करती है। वृंदा के मालिक प्रमोद सिंह खोड ने बताया कि यह कटड़ी सौ प्रतिशत शुद्ध मुर्रा (Murrah) नस्ल की है और इसकी ब्लड लाइन पशुपालन जगत के प्रसिद्ध 'अर्जुन कुंगड़ बुल' से सीधे जुड़ी हुई है। केवल पिता ही नहीं, बल्कि वृंदा की मातृवंशावली भी बेहद उत्कृष्ट और रिकॉर्ड-तोड़ रही है। वृंदा की मां 'गंगा' ने अपने समय में 21 लीटर दूध उत्पादन का शानदार रिकॉर्ड बनाया था। इतना ही नहीं, वृंदा की नानी ने भी दूध उत्पादन के क्षेत्र में 26 लीटर का भारी-भरकम रिकॉर्ड स्थापित किया था। यही कारण है कि उत्तम जेनेटिक्स के चलते वृंदा में बचपन से ही एक बेहतरीन मुर्रा भैंस के सभी आदर्श गुण पूरी तरह मौजूद हैं।

प्राकृतिक सुंदरता और बनावट है वृंदा की सबसे बड़ी पहचान प्रतियोगिता में वृंदा की जीत का सबसे बड़ा कारण इसकी शारीरिक बनावट और उम्दा नस्लीय गुण रहे। मालिक प्रमोद सिंह खोड के अनुसार, वृंदा का रंग पूरी तरह से जेट ब्लैक (गहरा काला) है। इसके शरीर से लेकर पूंछ तक कहीं भी एक सफेद बाल तक दिखाई नहीं देता, जो शुद्ध मुर्रा की सबसे बड़ी निशानी है। इसके छोटे और बिल्कुल छल्लेदार सींग, घनी काली पूंछ, बेहद मजबूत हाथ-पैर, आकर्षक और सुडौल गर्दन, शानदार हाइट और बेहतरीन लंबाई इसकी सुंदरता को एक अलग ही पहचान देते हैं। वृंदा की सबसे खास बात यह है कि मेले में इसे किसी भी प्रकार के विशेष कृत्रिम श्रृंगार या तेल-सजावट की आवश्यकता नहीं पड़ी। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और आकर्षक व्यक्तित्व ही इतना प्रभावी था कि इसने देशभर से आई अन्य सभी भैंसों और कटड़ियों को काफी पीछे छोड़ दिया।
Follow the Khabreelal News channel on WhatsApp Join ›🏪 आपके शहर के ऑफर

पशुपालक प्रमोद सिंह की मेहनत लाई रंग, हुए भावुक अपनी कटड़ी की इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण उपलब्धि पर मालिक प्रमोद सिंह खोड बेहद भावुक नजर आए। उन्होंने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि मात्र 22 महीने की कम उम्र में वृंदा ने जिस तरह ऑल इंडिया स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है, वह उनके जीवन की सबसे बड़ी और गौरवपूर्ण उपलब्धियों में से एक है। श्री प्रमोद ने कहा, वृंदा ने केवल मेरा ही नहीं, बल्कि दोघट, जनपद बागपत और समस्त क्षेत्रवासियों का गौरव बढ़ाया है। वृंदा के प्रति मैं हमेशा कृतज्ञ और आभारी रहूंगा। इसने अपनी कम उम्र में जो सम्मान और पहचान हमें दिलाई है, उसे मैं जीवन भर याद रखूंगा।
पशुपालन केवल व्यवसाय नहीं, समर्पण और प्रेम का नाम है प्रमोद सिंह खोड ने क्षेत्र के अन्य किसानों और युवा पशुपालकों को संदेश देते हुए कहा कि पशुपालन केवल धन कमाने का व्यवसाय नहीं है, बल्कि यह समर्पण, कठोर मेहनत, लगन और अपनी नस्ल के प्रति अगाध प्रेम का विषय है। यदि पशुओं की वैज्ञानिक तरीके से उचित देखभाल की जाए और उनकी नस्लीय विशेषताओं को संरक्षित किया जाए, तो पशुपालन के क्षेत्र में भी आसानी से राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरव हासिल किया जा सकता है।

वृंदा की यह शानदार जीत केवल एक प्रतियोगिता में प्राप्त प्रथम स्थान मात्र नहीं है, बल्कि यह दोघट, बागपत और पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के पशुपालन जगत के लिए सम्मान का एक बहुत बड़ा प्रतीक बन गई है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से दोघट कस्बे एवं आसपास के पूरे ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों, किसानों और पशुप्रेमियों में अपार खुशी का माहौल है। मात्र 22 महीने की उम्र में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान हासिल करना निश्चित रूप से इस क्षेत्र के डेयरी फार्मिंग जगत के लिए एक बड़ी और प्रेरणादायक उपलब्धि है। वृंदा की इस सफलता ने साबित कर दिया है कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में उन्नत पशुपालन की अपार संभावनाएं और राष्ट्रीय स्तर की प्रतिभाएं मौजूद हैं।
खबरीलाल न्यूज़ का Telegram चैनल जॉइन करें Join ›
Sabse pehle comment karne wale banein.