उत्तर प्रदेश की क्रांतिधरा मेरठ (Meerut) में दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले वायु प्रदूषण के लगातार बढ़ते स्तर ने जिला प्रशासन और आम जनता दोनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। सर्दियों की दस्तक के साथ ही हवा में स्मॉग (Smog) और धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता है। इसी कड़ी में गुरुवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (Air Quality Index - AQI) 200 के खतरनाक आंकड़े को छू गया। हवा में घुले इस जहरीले धुएं और लगातार बिगड़ती आबोहवा पर समय रहते काबू पाने के लिए जिला प्रशासन ने बेहद सख्त और व्यापक कदम उठाए हैं। Meerut Air Pollution की इस गंभीर होती स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए पूरे जिले में सभी प्रकार के छोटे-बड़े निर्माण और विकास कार्यों पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है।

जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह के कड़े निर्देश, विभागों को दी सख्त हिदायत बढ़ते प्रदूषण स्तर को नियंत्रित करने के लिए जिलाधिकारी (DM) डॉ. वीके सिंह ने तत्काल प्रभाव से एक्शन लिया है। उन्होंने मेडा (मेरठ विकास प्राधिकरण - MEDA), नगर निगम (Municipal Corporation), लोक निर्माण विभाग (PWD) सहित जिले के सभी संबंधित विकास विभागों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि इन विभागों के अधिकार क्षेत्र में चल रहे सभी सरकारी और निजी निर्माण कार्यों को बिना किसी देरी के तुरंत प्रभाव से रुकवाया जाए।

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प्रशासन का मुख्य उद्देश्य इन निर्माण स्थलों से उड़ने वाली धूल, सीमेंट के कणों और हानिकारक प्रदूषणकारी तत्वों (PM 2.5 और PM 10) को हवा में घुलने से रोकना है। दीपावली से पहले हवा की गुणवत्ता में हर हाल में सुधार लाना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गया है, ताकि शहरवासियों, विशेषकर बुजुर्गों और बच्चों को सांस लेने योग्य स्वच्छ हवा मिल सके।

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नियम तोड़ा तो ठेकेदारों और कार्यदायी संस्थाओं पर होगी कठोर दंडात्मक कार्रवाई जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह ने प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में गश्त बढ़ाकर निर्माण कार्यों की चौबीसों घंटे निगरानी करें। डीएम ने चेतावनी दी है कि यदि इस सख्त प्रतिबंध के बावजूद किसी भी इलाके में कोई भी निजी ठेकेदार, बिल्डर या सरकारी एजेंसी गुपचुप तरीके से निर्माण कार्य कराती हुई पाई गई, तो उसे किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

ऐसे लोगों के खिलाफ निर्माण सामग्री जब्त करने, भारी-भरकम जुर्माना लगाने के साथ-साथ एफआईआर (FIR) दर्ज कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पर्यावरण और जनस्वास्थ्य की सुरक्षा के इस संवेदनशील मामले में किसी भी स्तर पर जरा सी भी लापरवाही या ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी संबंधित विभागों को इन निर्देशों का शत-प्रतिशत और कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के लिए पाबंद किया गया है।

दीपावली पर केवल 'ग्रीन क्रैकर्स' (Green Crackers) जलाने की ही अनुमति त्योहारी सीजन के दौरान आतिशबाजी से हवा में फैलने वाले जहरीले धुएं और वायु प्रदूषण को नियंत्रित रखने के लिए भी प्रशासन ने कड़े नियम लागू किए हैं। शहर और देहात क्षेत्रों में सामान्य और अत्यधिक धुआं फैलाने वाले पटाखों की बिक्री व इस्तेमाल पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध रहेगा।

प्रशासन ने दीपावली के अवसर पर केवल पर्यावरण के अनुकूल 'ग्रीन पटाखे' (Green Crackers) ही बेचने और जलाने की अनुमति दी है। ये पटाखे कम धुआं और कम शोर उत्पन्न करते हैं। अधिकारियों और पुलिस प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इन नियमों का जमीनी स्तर पर पालन सुनिश्चित कराएं। बाजारों में पुलिस की टीमें लगातार गश्त करेंगी और अवैध पटाखों की बिक्री करने वालों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। त्योहारी सीजन में प्रदूषण का स्तर अचानक न बढ़े, इसके लिए ड्रोन और सर्विलांस टीमों के जरिए भी निगरानी रखी जाएगी।

त्योहारी सीजन में मिलावटखोरी पर कड़ा प्रहार, एडीएम स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी तय दीपावली के शुभ मौके पर बाजारों में मिठाइयों, मावा (खोया), पनीर, दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है। मांग और आपूर्ति के इस भारी अंतर का फायदा उठाकर कुछ असामाजिक तत्व और मुनाफाखोर खाद्य पदार्थों में मिलावट करना शुरू कर देते हैं। ऐसे मिलावटखोरों पर अंकुश लगाने और नागरिकों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए जिला प्रशासन ने आला अधिकारियों की विशेष जवाबदेही और जिम्मेदारी तय कर दी है:

  • शहरी क्षेत्र की कमान: मेरठ शहर के सभी प्रमुख बाजारों, व्यावसायिक केंद्रों, मिठाई की दुकानों और रिहायशी इलाकों में मिलावटी मिठाइयों तथा दूषित खाद्य पदार्थों की बिक्री रोकने की पूरी जिम्मेदारी अपर जिलाधिकारी नगर (ADM City) आदित्य प्रजापति को सौंपी गई है। उनके नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीमें शहर में लगातार छापेमारी करेंगी।

  • देहात क्षेत्र की निगरानी: वहीं, मेरठ के ग्रामीण इलाकों, कस्बों, देहात क्षेत्रों और बाहरी जनपदों की सीमाओं से आने वाले खाद्य पदार्थों (विशेषकर मावा और दूध) की गुणवत्ता जांचने तथा मिलावटखोरी पर नकेल कसने का महत्वपूर्ण जिम्मा अपर जिलाधिकारी प्रशासन (ADM Administration) विजय वर्धन तोमर संभालेंगे।

पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए प्रशासन का संकल्प प्रशासन का यह प्राथमिक और अंतिम उद्देश्य है कि त्योहार के इस पावन सीजन में मेरठ के सभी नागरिकों को पूरी तरह से शुद्ध, मिलावट रहित और स्वास्थ्यवर्धक खाद्य सामग्रियां ही उपलब्ध हों। इसके तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) की कई विशेष टीमें दोनों एडीएम अधिकारियों के सीधे निर्देशन में शहर से लेकर सुदूर देहात तक सघन चेकिंग अभियान चलाएंगी। संदिग्ध मावा, पनीर और मिठाइयों के सैंपल लेकर उन्हें तत्काल लैब में जांच के लिए भेजा जाएगा। यदि किसी भी उत्पाद में मिलावट या जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ के सबूत पाए जाते हैं, तो दोषियों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।

दीपावली से ठीक पहले मेरठ जिला प्रशासन की यह दोहरी रणनीति शहरवासियों के लिए एक बड़ी राहत लेकर आई है। एक तरफ जहां निर्माण कार्यों पर रोक और ग्रीन पटाखों की व्यवस्था से Meerut Air Pollution को नियंत्रित कर लोगों के फेफड़ों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ खाद्य सुरक्षा को कड़ाई से लागू कर लोगों को बीमारियों से बचाने का पूरा खाका तैयार कर लिया गया है। प्रशासन की अपील है कि आम जनता भी प्रदूषण कम करने और शुद्धता बनाए रखने में अपना पूर्ण सहयोग प्रदान करे।

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